मध्य प्रदेश के उमरिया जिले की शान और सुप्रसिद्ध बैगा चित्रकार पद्म श्री जोधइया बाई का रविवार की शाम 86 वर्ष की आयु में लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। अपने संघर्षशील और प्रेरणादायक जीवन में जोधइया बाई ने बैगा चित्रकला को देश-विदेश में पहचान दिलाई।
चित्रकला की शुरुआत और योगदान
जोधइया बाई ने 70 वर्ष की उम्र में चित्रकला सीखनी शुरू की। शिक्षा से वंचित रहते हुए भी उन्होंने अपने गुरू आशीष स्वामी से कला की बारीकियां सीखीं। इसके बाद उन्होंने बैगा चित्रकला को नए आयाम तक पहुंचाया, जिससे उनकी पहचान वैश्विक स्तर पर स्थापित हुई। उनके कला-संस्कार ने बैगा संस्कृति को संरक्षित और प्रचारित किया।

जोधाईया बाई को बैगा चित्रकला के लिए पद्म श्री से नवाजा गया ।
अंतिम संस्कार और श्रद्धांजलि
उनके अंतिम संस्कार में कलेक्टर नीरज कुमार सिंह, एसपी प्रदीप शर्मा, और पूर्व जेल मंत्री व भाजपा सांसद ज्ञान सिंह सहित प्रशासनिक अधिकारियों ने कंधा देकर श्रद्धांजलि अर्पित की। क्षेत्र के तमाम नागरिकों और प्रशंसकों ने भी उन्हें अंतिम विदाई दी।
बीमारी और निधन
बीते एक साल से जोधइया बाई पैरालिसिस और अन्य गंभीर बीमारियों से जूझ रही थीं। उनके निधन से आदिवासी कला जगत ने एक अपूरणीय क्षति झेली है।
पद्म श्री जोधइया बाई को पूर्व मुख्यमंत्री की श्रद्धांजलि
मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने जोधइया बाई के साथ अपनी तस्वीरें साझा करते हुए सोशल मीडिया पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी। उन्होंने लिखा, “जोधइया बाई ने बैगा चित्रकला को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। उनका योगदान सदैव याद रखा जाएगा।”
कला जगत में प्रेरणा का स्रोत
जोधइया बाई का जीवन यह साबित करता है कि उम्र और शिक्षा की कमी भी सृजनात्मकता और दृढ़ संकल्प के सामने बाधा नहीं बन सकती। उनका योगदान देश के सांस्कृतिक धरोहर को सहेजने और उसे नई पीढ़ियों तक पहुंचाने में अमूल्य रहेगा।