रंगक्रांति शिविर में मनाया गया विश्व रंगमंच दिवस, झाबुआ में रंगमंच के लिए कई चुनौतियां, नहीं नाटकों के मंचन के लिए कोई सभागार.

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नाटक का मंचन करते हुए कलाकार ।

27 मार्च को पूरे विश्व में रंगमंच दिवस के रूप में मनाया जाता है । नगर में चल रहे रंगक्रांति शिविर के प्रतिभागियों ने भी रंगमंच की बारिकियों को सीखते हुए इस दिन को मनाया । शिविर में करीब 200 प्रतिभागी भाग ले रहे हैं ।  इनमें से कई रंगमंच के जरिये अभिनय की दुनिया में जाना चाहते हैं ।

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रंगक्रांति शिविर निर्देशक और ख्यात रंगकर्मी भूषण भट्ट ।

शिविर निर्देशक भूषण भट्ट का कहना है कि रंगमंच एक कलाकार के सपनों का संसार होता है । कलाकार इस रंगमंच पर सबकुछ कर सकता है । जहां तक उसकी कल्पना जाती है, वो सब कुछ मंच पर उतार सकता है ।  बकौल भूषण भट्ट रंगमंच को लेकर अब काफी संभावनाएं हैं । टीवी, फिल्मों में जाने का ये एक अच्छा जरिया होता है । वहीं अब तो रंगमंच सीबीएसई पाठ्यक्रम में ऐच्छिक विषय के रूप में शामिल कर लिया गया है । पिछले कुछ सालों में रंगमंच को कैरियर के रूप में लिया जा रहा है । यहीं कारण है कि पहले जहां केवल राष्ट्रीय नाट्य विद्याल ही हुआ करता था, अब लगभग राज्य का अपना नाट्य स्कूल है, जो रंगमंच और रंगमंचीय कलाओं को लेकर समर्पित है ।  रंगक्रांति शिविर में जो बच्चे रंगमंच से जुड़ी कलाओं को सीखने आ रहे हैं, उनमें काफी प्रतिभा है । अगर बच्चे लगातार मेहनत करते रहे तो आने वाले सालों में हम इन बच्चों को एक अलग मुकाम पर देंखेगे ।

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अभिनय मुद्रा में झाबुआ के रंगकर्मी भरत व्यास ।

पिछले कई सालों से रंगकर्म की अलख जगाने वाले भरत व्यास के मुताबिक झाबुआ जैसे शहर में रंगकर्म करना उतना आसान नहीं है । रंगमंच करना झाबुआ जैसी जगह में एक बड़ी चुनौती है ।  बाकि कलाओं मुकाबले ये  खर्चीली है । बाहरी मदद भी इतनी नहीं मिल पाती कि नाटकों का मंचन का खर्चा निकाला जा सके ।

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नाटक फांस के एक दृश्य में साज़ रंग के कलाकार ।

रंगकर्मी और साज़ के अध्यक्ष धर्मेन्द्र मालवीय ने कहा कि आज विश्व रंगमंच दिवस है, लेकिन झाबुआ में रंगमंच करने वाले कलाकारों को एक सभागृह, ऑडिटोरियम की कमी खलती है । शहर में एक अच्छा ऑडिटोरियम रंगमंच के विकास में काफी सहायक सिद्ध हो सकता है । यहां के कलाकार भी टीवी सीरियल में अपनी प्रतिभा दिखा चुके हैं । रंगक्रांति शिविर में प्रशिक्षण देने आए रंगकर्मी ऩंदनसिंह के मुताबिक रंगमंच एक अलग ही दुनिया होती है । ये दुनिया बहुत कुछ सीखाती है ।

रंगकर्मी  वीरेन्द्र सिंह ने बताया कि अंतर्राष्ट्रीय रंगमंच दिवस की स्थापना 1961 में नेशनल थियेट्रिकल इंस्टीट्यूट द्वारा की गई थी। तब से यह प्रति वर्ष २७ मार्च को विश्वभर में फैले नेशनल थियेट्रिकल इंस्टीट्यूट के विभिन्न केंद्रों में तो मनाया ही जाता है, रंगमंच से संबंधित अनेक संस्थाओं और समूहों द्वारा भी इस दिन को विशेष दिवस के रूप में आयोजित किया जाता है। इस दिवस का एक महत्त्वपूर्ण आयोजन अंतर्राष्ट्रीय रंगमंच संदेश है, जो विश्व के किसी जाने माने रंगकर्मी द्वारा रंगमंच तथा शांति की संस्कृति विषय पर उसके विचारों को व्यक्त करता है। 1962 में पहला अंतर्राष्ट्रीय रंगमंच संदेश फ्रांस की जीन काक्टे ने दिया था। वर्ष 2002 में यह संदेश भारत के प्रसिद्ध रंगकर्मी गिरीश कर्नाड  द्वारा दिया गया था।

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