भागवत गीता मनुष्य को जीवन जीने की कला सीखाती है- स्वामी बालकृष्णशरण देव

bhagwat_kalash ytraझाबुआ पोस्ट । श्री क़ष्ण एक क्रांतिकारी व्यक्तित्व है । लोगों के मन की दूरियों को मिटा कर उन्होंने प्रेम का संदेश प्रसारित किया । घृणा,द्वेष आदि दूर्भावों को दूर करने का महान कार्य किया । राधा और कृष्ण का संबंध आत्मा तथा परमात्मा का अलौकिक नाता है । अपने भीतर छिपा हुआ परमात्मा भी प्रेम के अभाव में दिखलाई नही पडता ।  मुश्किल की घड़ियों में भी हिम्मत ना हारने और मुस्कराने का नाम है कृष्ण । उनका चरित्र कोई सामान्य किस्सा कहानी नही बल्कि ,एक समग्र जीवन दर्शन है । कृष्ण तो खिलखिलाता हुआ युगधर्म है ।     रविवार से शुरू हुई झाबुआ के तीर्थेन्द्र नगर हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में ये बातें स्वामी बालकृष्णशरण देव जी ने भागवत कथा का श्रवण करने आए श्रद्धालुओ से कही । स्वामी ने कृष्ण के चरित्र का बखान करते हुए कहा कि भक्ति हमें निर्भय और प्रसन्न बनाती है । भक्त किसी भी परिस्थिति में उदास नही होता ।

भगवान के नाम का बल  संसार का सर्वश्रेष्ठ बल होता है । भागवत हमें जीवन जीने की  कला सिखाती हैै । जिसका जीवन मंगलमय बन गया, उसका मरण अवष्य ही महामहोत्सव बन जाता हेै । कथा मनोरंजन नही आत्ममंथन का साधन है । कथा सुनकर ही हमे अपने अपराधो का बोध न हुआ और प्रायष्चित का संकल्प जागृत नही हुआ तो हमारा सारा श्रमण व्यर्थ हो जावेगा ।

उम्र बडी हो जाने या बाल पक जाने से कोई महान नही होता । ऋषियों द्वारा निर्धारित धर्म  मर्यादा का पालन करने से ही जीवन में श्रेष्ठता आती है । संसार ईष्वर की रचना है । अतः यह घृणा करने योग्य नही है । किन्तु माया उपादान से बना होने के कारय यह प्रेम करने योग्य भी नही हे । हमारे प्रेम का केन्द्र तो कवेल प्रभु के चरणारविन्द ही है ।

ओल्ड हाउंसिग बोर्ड कालोनी स्थित तीर्थेन्द्रधाम पर आज से प्रारंभ हुई श्री भागवत कथा में उपस्थित  श्रद्धालुओं को श्री मदभागवत के माहत्म्य पर  प्रकाष डालते हुए पूज्य डा. स्वामी श्री कृष्णषरण देव महाराज ने बताया कि संसार का स्वरूप तो गुण दोष मय है किन्तु विवेकी साधक सारग्रही होता है । साधना में सफलता उसी को प्राप्त होती है जो नियम और निष्ठा की रक्षा करता है ।sm

इसके पूर्व रविवार प्रातः 9 बजे से ही पूरा नगर ही श्रीकृष्ण भक्ति में डूबा हुआ नजर आया । स्थानीय तीर्थेन्द्रधाम पूरानी हाउंसिग बोर्ड कालोनी पर प्रारंभ होने वाली श्री मद भागवत कथा रस प्रवाह के पूर्व  पैलेसे गार्डन से श्री मद भागवत जी एवं पूज्य स्वामी बालकृष्ण देवजी की विषाल शोभायात्रा निकाली गईजिसमें 108 कलष को सिर पर उठाकर एक ही परिधान में महिलाओं एवं बच्चियों ने कलष यात्रा निकाली उसकी पीछे मुख्,य जजमान   एसके रघुवंषी एवं उनकी पत्नी श्रीमती रंजना रघुवंषी द्वारा सिर पर भागवत जी को उठा कर चल समारोह में चल रहे थे । सैकेडों की संख्या में नगर के सभी समाजजनों एवं धार्मिक एवं सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने इसमें भाग लिया । राजवाडा चैक पर महन्त मनीष बैरागी ने कलषयात्रा एवं स्वामी जी का पूजनादि कर पुष्पांजलि से स्वागत किया । वही चारभूजा चैराहे पर पण्डित अजय रामावत ने जुलुस का पुष्पवर्षा कर स्वागत किया ।भजनों की धुन पर अनुषासित चल समारोह से पूरा नगर भक्तिमय हो गया । आजाद चैक, बाबेल चैराहा, थांदला गेट होकर चल समारोह बेंड बाजों व आतिषबाजी के साथ साक्षात वृंदावनधाम की अनुभूति दे रहा था । पूरे चल समारोह में शीतल जल की अनुकरणीय व्यवस्था  की गई थी । उत्कृष्ठ  मार्ग से होता हुआ चल समारोह तीर्थेन्द्रधाम पहूंचा जहां स्वामीजी ने श्रीमद भागवत जी की विधि विधान से पूजा करवा कर पोथी की स्थापना यजमान दंपत्ति से करवाई ।  कार्यक्रम का संचालन श्री शरतषास्त्री ने किया । स्वामीजी ने  उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए भागवत को महानग्रंथ बताते हुए साक्षात वांगमय भगवाल की समग्र षक्तियों के साथ इसमे बिराजित रहने का जिक्र किया । उन्होने कहा कि सात दिनों तक सभी परीक्षित भाव में प्रवेष करेगें । हरेक के जीवन में सिर्फ सात दि नही होते है । परमात्मा ने नगर को यह अवसर प्रदान किया है इसका सभी लाभ उठाने । इन सात दिनों मे झाबुआ की यह धरा साक्षात वृंदावनधाम बन जावेगी ।उन्होने कहा कि इन सात दिनों में सभी आत्मचिंतन करेगें तथा समाज सेवा के विषेष प्रकल्प, जीवदया के क्षेत्र मकें कार्य कर समाज  में सेवा के भाव पैदा होगें । इसमें वेदांत के पुट के साथ ही आध्यात्मिक रहस्य का आभास भी होगा ।

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Categories: धर्म-संस्कृति

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