मन के संकल्पों को शुद्ध एवं शुभ बनाए: प्रो. स्वामीनाथन गरिमामय भव्य समारोह में ‘वाह जिंदगी वाह’ कार्यक्रम का हुआ शुभारंभ

vah 01झाबुआ पोस्ट । ब्रह्राकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के तत्वावधान में रोटरी क्लब एवं आसरा पारमार्थिक ट्रस्ट के सहयोग से स्थानीय आॅफिसर्स काॅलोनी के प्रांगण में ‘वाह जिंदगी वाह’ के त्रि-दिवसीय जीवन उत्सव शिविर केे शुभारंभ कार्यक्रम के प्रमुख वक्ता एवं मार्गदर्शक विश्व विख्यात आध्यात्मिक वक्ता प्रो. ईव्ही स्वामीनाथन के मुख्य आतिथ्य, ब्रह्राकुमारी ज्योति दीदी, कार्यक्रम संयोजक यशवंत भंडारी, वरिष्ठ अभिभाषक एवं रोटरी क्लब के पूर्व अध्यक्ष दिनेश सक्सेना, भारतीय जीवन बीमा निगम के शाखा प्रबंधक रतनसिंह मोहनिया, आसरा पारमार्थिक ट्रस्ट के अध्यक्ष राजेश नागर तथा रोटरी क्लब के सचिव जगदीश सिसौदिया के आतिथ्य में दीप प्रज्जवलित कर किया गया। इस अवसर पर उपस्थित अतिथियों का ब्रह्राकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के सदस्यों द्वारा पुष्प गुच्छ भेंटकर स्वागत किया गया।

कार्यक्रम के प्रारंभ में ब्रह्राकुमारी जयंती दीदी ने प्रो. स्वामीनाथन का परिचय देते हुए कार्यक्रम के उद्देश्य के बारे में बताया। साथ ही कहा कि हमारे सक्रिय प्रयासों से आज प्रो. स्वामीनाथन हमारे बीच उपस्थित है। तीन दिन तक अपने ज्ञान के प्रकाश से उपस्थित आत्माओं को आलोकित करेंगे। प्रो. स्वामीनाथन का झाबुआ में कार्यक्रम होना हम सभी के लिए एक अद्भुत एवं अद्वितीय सौभाग्य है। कार्यक्रम के शुभारंभ की घोषणा वरिष्ठ अभिभाषक दिनेश सक्सेना ने करते हुए प्रो. स्वामीनाथन का झाबुआ नगर की ओर से स्वागत किया।

जीवन शैली में परिवर्तन आवश्यक है

वाह जिंदगी वाह कार्यक्रम में अपने उद्बोधन की शुरूआत करते हुए प्रो. स्वामीनाथन ने कहा कि आज हम दुनिया के बारे में जानते है, परन्तु स्वयं के बारे में जानने की हमे फुर्सत नहीं है। जब हम स्वयं की शक्ति के बारे में जानेंगे तो हमारी जीवन शैली में अपने आप परिवर्तन होता चला जाएगा। हमारे मन के संकल्प शुद्ध एवं शुभ बनते जाएंगे। आपने एक कहानी के माध्यम से बताया कि जहां खुशियों के देवदूत आते है, वहां पर धन एवं सफलता के देवदूत स्वयं उनके पीछे-पीछे चले आते है, इसलिए आज प्रत्येक मनुष्य को मुस्कराना सीखना होगा। आपने शायराना अंदाज में कहा ‘देखो तो ख्वाब है जिंदगी, पढ़ा तो किताब है जिंदगी, जानो तो ज्ञान है जिदंगी और मुस्कराओ तो आसान है जिंदगी’।

दिन की शुरूआत ईश्वर को नमस्कार करने के साथ करे

आपने अपनी अद्भुत प्रवचन शैली में उपस्थित आध्यात्मिक श्रोताआंे को संबोधित करते हुए कहा कि आज हम ‘हैप्पी एवं हैल्दी लाईफ’ को कैसे जीये, इस संबंध में चर्चा करेंगे। आपने बताया कि जीवन में स्वस्थ, कार्यकुशलता, आपसी संबंध, एकाग्रता एवं क्रोध पर नियंत्रण कैसे किया जाए, इस संबंध में इन तीन दिनों में हम अपने विचारो को साझा करेंगे। स्वास्थ्य के संबंध में आपने बताया कि तन के साथ मन भी स्वस्थ होना आवश्यक है। हम मन के मालिक बने, मन हमारा मालिक नहीं बनना चाहिए। इसके लिए हमे हमारी जीवन शैली में परिवर्तन करना पड़ेगा। हमारी प्रतिदिन की शुरूआत ईश्वर को नमस्कार करने के साथ हल्के व्यायाम से होना चाहिए।

राजयोग की ओर बढ़ना होगा

आपने टीवी देखते हुए खाना खाने वाले को नसीहत देते हुए कहा कि जैसा खाते अन्न, वैसा होता मन, इसलिए हमेशा भोजन करते समय टीवी के स्थान पर हमे ईश्वर का स्मरण करना चाहिए। जिससे हमारे मन के अंदर शुद्ध एवं शुभ सुविचार गतिमान रहे तथा ईष्या, द्वेष, अहंकार, प्रतिशोध, काम, क्रोध आदि र्दुगुणों से हमारा मन दूर रहेगा। इसके लिए हमे राजयोग की ओर बढ़ना होगा। राजयोग से मन एवं बुद्धि का विकास तो होगा ही, साथ ही हम सोचेंगे, वहीं करने की आत्म शक्ति हममे जागृत करना होगा शुरू हो जाएगा। मनुष्य के कार्य करने की शैली के संबंध में आपने कहा कि मनुष्य यदि कार्य करेगा तो गलती करेगा ही। तथा जो गलती को माफ करता है, उसका मन दिव्यता को प्राप्त करता है तथा वह हमेशा खुश रहता है।

मैं कौन हूॅ, यह जाने

कार्यक्रम के द्वितीय सत्र का शुभारंभ शनिवार को प्रातः 6 बजे हुआ। सर्वप्रथम प्रो. स्वामीनाथन ने उपस्थित सभी आत्मार्थी भ्राता एवं बहनों को हल्का-पुल्का व्यायाम करवाया तथा व्यायाम के संबंध में जानकारी देते हुए कहा कि हमारे व्यायाम करने की शैली केवल शारीरिक नहीं होना चाहिए। मेडीटेशन के साथ यदि हम व्यायाम करते है तो निश्चित रूप से उस व्यायाम से हमारा तन एवं मन को भी उर्जा प्राप्त होती है। आपने बताया कि व्यायाम सदैव खुले प्राकृतिक स्थान पर सूर्य के प्रकाश में ही करना चाहिए। जिससे हमारे शरीर एवं मन को शुद्ध ऑक्सीजन प्राप्त हो सके।

पूर्णतः शुद्ध शाकाहारी भोजन ही करना चाहिए

आपने कहा कि हम स्वयं अपने भाग्य विधाता है तथा हम हमारी स्मरण शक्ति के साथ ही शक्तिशाली मन बना सकते है। आज हमे शक्तिशाली मन बनाने की आवश्यकता है। एक शक्तिशाली मन ही सफलता की उंचाईयों को छू सकता है। भोजन के संबंध में आपने बताया कि दुनिया के जितने भी महान व्यक्ति हुए है, वे शाकाहारी ही है, इसलिए हमे पूर्णतः शुद्ध, शाकाहारी भोजन ही करना चाहिए। जिससे हमारे मन में अच्छे विचार आए। हम आज अपने शरीर को ही आत्मा समझ बैठे है, जबकि आत्मा का स्वरूप शरीर से भिन्न है, परन्तु आत्मा शरीर के अंदर ही रहती है, अतः हमे आत्मा के स्वरूप को समझना होगा और हमे यह महसूस करना होगा कि हमारी आत्मा एक सर्व शक्तिमान आत्मा है, एक शांत स्वरूप आत्मा है, एक शक्ति स्वरूप आत्मा है एवं एक चेतन्य शक्ति के रूप में हमारी आत्मा हमारे साथ है। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में शहर के गणमान्य नागरिक, प्राध्यापक अभिभाषक, पाॅलिटेक्निक काॅलेज के छात्र एवं महिलाएं उपस्थित थी।vah

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Categories: धर्म-संस्कृति

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