महायज्ञ एवं भंडारे के साथ श्रीमद् भागवत कथा का हुआ समापन, हजारों भक्तों ने लिया धर्म लाभ ।

bhagwat katha 01झाबुआ पोस्ट ।  तीर्थेन्द्र नगर पुराना हाउंसिंग बोर्ड कालोनी में सप्त दिवसीय  श्रीमद भागवत कथा रस प्रवाह कथा का आज महायज्ञ एवं भण्डारा प्रसादी के साथ समापन हुआ । सात दिनों तक पूज्य कथाव्यास डा. स्वामी श्री कृष्णषरणदेव जी महाराज के मुख से भगवान श्रीकृष्ण चरित्र पर बडे ही रोचक तरिके से शनिवार सायंकाल को सुदामा चरित्र एवं परिक्षित मोक्ष की कथा के साथ कथा का समापन हुआ । इस अवसर पर अंचल के प्रसिद्ध संत पूज्य रामदयालदास जी महाराज एवं संत मंडली भी कथा श्रवण हेतु पधारी तथा व्यास पीठ पर बिराजित स्वामी कृष्णषरणदास जी ने सभी संतों का शाल श्रीफल दक्षिणा एवं माल्यार्पण के साथ स्वागत किया । इस अवसर पर हिन्दु उत्सव समिति के ओपी राय, ओम प्रकाष शर्मा, दौलत भावसार, जितेन्द्र पटेल, श्रीमती चेतना पटेल, गोपालसिंह पंवार आदि द्वारा पूज्य स्वामीजी का स्वागत कर उन्हे प्रषस्ति प्रदान किया गया जिसमें हिन्दूधर्म जागरण में पूज्य स्वामीजी के धर्म जागरण कार्य की प्रसंषा की गई । वही रोटरी क्लब आजाद के डा. संतोषप्रधान, संजय कांठी, आदि ने भी पूज्य स्वामीजी को सम्मानपत्र अर्पित किया । स्वामीजी के कर कमलों से भागवत कथा में परोक्ष एवं प्रत्यक्ष रूप  से सहयोग देने वाले सभी कार्यकर्ताओं का भी दुपट्टा डालकर तथा उपहार देकर सम्मानित किया गया । नगर के विभिन्न धार्मिक एवं समााजिक संगठनों की और से पूज्य स्वामीजी का स्वागत सम्मान किया गया ।

पूज्य स्वामीजी ने सुदामा चरित्र को प्रस्तुत करते हुए भगवान की लीलाओं का जीवन्त प्रस्तुतिकरण हर किसी को आल्हादित किया । उन्होने कहा कि जिस प्रकार शरीर  का पोषण भोजन से होता है उसी प्रकार आत्मा का पोषण भगवान की कृपा से होता है। परंपरा से चले आरहे ज्ञान के सम्यक प्रवाह को सम्प्रदाय कहते है । भागवत को श्री वललभ आचार्य ने साक्षात श्रीनाथजी का स्वरूप  माना है । सदगुरू समर्थ हो और षिष्य सुयोग्य हो तो  ब्रह्म संबंध होते ही खरा सोना बन जाता हे । भगवान को पानेkatha का केवल एक ही तरीका है, और वह है प्यास । ईष्वर की प्राप्ति कोई अप्राप्त की प्राप्ति नही बल्कि नित्य प्राप्त की प्राप्ति है । दे हके रहते, देह से अलग हो जाना ही गुरूज्ञान श्रवण का सत्फल है । जो ’’ नही होना चाहिये’’ उसकी चाह पाल लेना ही दुख का कारण है । स्वामीजी ने आगे कहा कि भागवत का वक्ता श्रोत्रिय एवं ब्रह्मनिष्ठ होना चाहिये । जिसने ’’चाह’’ को मार दिया उसने अमीरी पा ली ।

कथा स्थल तीर्थेन्द्रधाम से भागवतजी की शोभायात्रा हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति में निकाली गई । नगर के मुख्यमार्गो से होती हुइ्र्र भजन, गरबानृत्य करते हुए युवाओं एवं महिलाओं ने पूरे नगर को भक्तिमय कर दिया । नगर के हर चोराहों पर षीतल जल की व्यवस्था की गई थी । तथा आजाद चैक में श्रद्धालुओं द्वारा चल समारोह में शामील सभी श्रद्धालुओं को आईस्क्रिम भी खिलाया गया ।  मुख्य यजमान आरएस रघुवंषी एवं उनकी पत्नी द्वारा सिर पर भागवत जी को धारण कर  चल समारोह में चल रहे थे । रथ में बिराजित स्वामीजी सभी को  आषीर्वाद प्रदान कर रहे थे । चल समारोह का  समापन श्री गोवर्धननाथजी की हवेली में हुआ । खचाखच भरे गोवर्धननाथ मंदिर में स्वामीजी ने श्री वल्लभाचार्य भगवान की कथामृत का पान कराते हुए भजनों के माध्यम से पूरे मंदिर को गोवर्धननाथ मय कर दिया । पूज्य स्वामीजी का गोवर्धननाथ मंदिर के अधिकारी श्री त्रिवेदी द्वारा पुष्पमालाओं से स्वागत  अभिनंदन किया गया । भगवान के श्रीविग्रह की आरती में पूरा वातावरण भक्तिमय बन गया आरती के पष्चात प्रसादी वितरण के साथ कार्यक्रम का समापन किया गया ।

रविवार को पूज्य स्वामीजी की दीव्य उपस्थिति में कथास्थल पर महायज्ञ में मुख्य जजमान रघुवंषी परिवार द्वारा आहूतिया अर्पित की गई । यज्ञ के समापन के बाद  कथास्थल पर विषाल भंडारा प्रसादी का आयोजन किया गया जिसमें करीब 3000 से अधिक श्रद्धालुओं ने महाप्रसादी प्राप्त की ।

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