जो लड़े दीन के हेत, महानाट्य ने जीता लोगों का दिल, अभिनय के जरिये मुक्ताकाश मंच पर बिखेर 1857 की क्रांति के रंग ।

3झाबुआ में रंगकर्म की अलख जगाने वाली संस्था साज़ रंग ने महानाट्य जो लड़े दीन के हेत के मंचन के साथ ही एक नया इतिहास रच दिया । 1857 की क्रांति के नायक तात्या टोपे के जीवन पर आधारित इस नाटक में कलाकारों के अभिनय, वेशभूषा,रूपसज्जा , भव्य मंच और अदभुत ध्वनि और प्रकाश संयोजन और सबसे ऊपर भूषण भट्ट के निर्देशन और लेखन ने जेल बगीचे में मौजूद 1000 से ज्यादा लोगों को अचरज कौतुहल में डाल दिया कि ये रंग चमत्कार झाबुआ में झाबुआ के ही लोग कर रहे हैं । कई लोगों को तो नाटक खत्म होने के बाद भी विश्वास ही नहीं हुआ कि मंच पर अभिनय करने वाले कलाकार झाबुआ नगर के ही हैं ।  नाटक सभी पात्रों और कलाकारों की अतिथियों समेत लोगों ने जमकर तारीफ की । करीब 200 लोगों ने इस नाटक में एक साथ अपनी प्रस्तुति दी, जिनमें 26 बच्चे जिला विकलांग पुर्नवास केन्द्र के भी शामिल थे ।

002नाटक में तात्या टोपे की भूमिका निभाने वाले वीरेन्द्र सिहं ठाकुर, नारायण सिंह पिंडारी की भूमिका में भरत व्यास, बगाराम पंडित की भूमिका में आशीष पांडे, जनरल मीड की भूमिका धर्मेन्द्र मालवीय, बाजीराव पेशवा की भूमिका में वीरेन्द्र सिंह राठौर, केशव  की भूमिका में रघुवीर सिंह चौहान , राजा मानसिंह की भूमिका में हर्षुल त्रिवेदी को खूब सराहा गया ।  दिल्ली से आए कुमारदास और सप्तरथी मोहंता की लाईट डिजाईनिंग, कन्हैयाल लाल कैथवास की मंच आकल्पन और हर्ष दौंड और अनामिक सागर के नृत्य संयोजन की भी लोगों ने जमकर वाह-वाही की ।

5मंच पर तीसरी घंटी बजने के बाद ही अभिनेताओं ने ऐसा जलवा बिखेरा की 1 घंटे 20 मिनट तक दर्शक नाटक में पूरी तरह से रमे रहे । झाबुआ की आदिवासी लोक परंपरा में अनुरूप वेशभूषा में इस क्रांति गाथा को आगे बढ़ाने वाले सूत्रधारों को भी खूब सराहा गया । वहीं संगीत ,गीत और नृत्य ने भी लोगों का मन मोह लिया । खासकर होली वाले गीत पर लोग झूमने लगे । नाटक ने 1857 की क्रांति के समय अलग-अलग परिस्थियों को बखूबी उकेरा गया । ग्राम स्वराज का सपना संजोए तात्या की जीवन के कई किस्सों को जेल बगीचे के 200 साल पुराने बरगद के नीचे दी गई इस प्रस्तुति दी सभी दृश्यों को जीवंत बना दिया । नाटक का लेखन, संगीत और निर्देशन ख्यात रंगकर्मी भूषण भट्ट ने किया था । नाटक के मंचन के साथ ही एक माह से  चल रहे रंगक्रांति शिविर का समापन हो गया ।

4 शनिवार शाम जेलबगीचे में तैयार किए गए मुक्ताकाश मंच पर मंचित इस नाटक को लोगों का खूब प्रतिसाद मिला । नाटक के पहले अतिथि के रूप में पधारे झाबुआ विधायक शांतिलाल बिलवाल, कलेक्टर बी. चंद्रशेखर, एसपी कृष्णावेणी देसावतु, सीईओ जिला पंचायत धनराजू एस , ख्यात आर्ट डायरेक्टर जयंत देशमुख ने तात्य टोपे के तस्वीर पर पुष्प अर्पित कर उन्हें याद किया । नाटक के बाद रंगक्रांति शिविर में प्रशिक्षण देने वाले भूषण भट्ट, कन्हैयालाल कैथवास,कुमारदास टीएन,सप्तरथी मोहंता,हर्ष दौंड, विक्रम मोहन, नंदनसिंह, सुश्री अनामिका सागर, सुश्री पुनम अरोरा, आशीष पांडे आदि प्रशिक्षकों का अभिनंदन पत्र भेंट कर सम्मानित किया गया । नाटक के बाद कलेक्टर बोरकर ने कहा कि ये प्रस्तुति अदभुत दी, मैं कुछ और ही सोच कर आया था लेकिन कलाकारों के उम्दा प्रदर्शन ने मेरा भ्रम तोड़ दिया ।

7कलेक्टर  ने झाबुआ आकर प्रशिक्षण देने वाले सभी प्रशिक्षकों का आभार माना और कहा कि आगे भी हमें इस तरह के आयोजन देखने को मिलेंगे । विधायक शांतिलाल बिलावल ने कलाकारों की प्रशंसा करते हुए कहा कि पूरी टीम की मेहनत रंग लाई है । कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए मंच से परे दीपक दोहरे, विकास पांडे, आदित्य गुप्ता,आकाश विश्वकर्मा,रविन्द्र सिंह झाला, विपिन अडबालकर आदि का भी सहयोग सराहनीय रहा । कार्यक्रम के अंत में संस्था की ओर से आभार धर्मेन्द्र मालवीय ने माना । कार्यक्रम का संचालन शरद शास्त्री ने किया ।6

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Categories: कला-साहित्य

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