उस रात गाड़ी के नीचे जो शख्स आया था वो भी खान था,लेकिन सलमान खान नहीं । कौन था वो ?

150502075749_salman_khan_bollywood_actor_624x351_gettyझाबुआ पोस्ट । 13 साल बाद एक फैसला आया है । एक ऐसा फैसला जो पिछले 13 सालों में कितनी ही बार कोर्ट की दहलीज पर पहुंचा लेकिन सुनाया नहीं जा सका । आज जब एक्टर सलमान को 13 साल बाद दोषी करार दिया गया, मानिए  देश की सबसे बड़ी त्रासदी आ गई हो । सारे दर्द पीछे छूट गए । कुछ यहां तक कहने लगे की सलमान दरियाल दिल हैं, उनके साथ नरमी बरती जा सकती है । कोई परिवार को सदमे में बता रहा है तो कोई फैंस को  । कोई कह रहा है कि सलमान को मोहरा बनाकर सुस्त पड़ चुकी कानून व्यवस्था की धाक जमाना कि कानून किसी को भी माफ नहीं करता चाहे वो सलमान खान जैसी सितार शख्सियत ही क्यों ना हो ।

लेकिन क्या ऐसा नहीं होना चाहिए की कानून को अपना काम करने देना चाहिए । 13 साल बाद फैसला आया है, अगर 13 साल सलमान टार्चर हुए हैं तो क्या 13 साल पीड़ित परिवार ने इसका इंतजार नहीं किया है । क्या 13 साल तक सलमान ने गुमराह करने की कोशिश नहीं की । क्या ये नहीं हो सकता था कि सलमान इतने ही सज्जन थे तो क्यों नहीं वे खुद ही गुनाह कबुल कर लेते । लेकिन ऐसा हो नहीं सका । सलमान बीईंग ह्यमुन के जरिये जो चैरिटी करते हैं हो सकता है कि वो भी उनके अपराधबोध का एक हिस्सा हो । अपनी गलती, अपने गुनाह को इस तरह कबूल करने का रास्ता हो । लेकिन फिर भी किसी भी शख्स को इसलिए माफ या सजा कम नहीं दी जा सकती कि वो सितारा है, चैरिटी करता है । वरना देश में काली कमाई का पैसा समाज सेवा में लगाने वालों की कमी नहीं है ,तो क्या उन्हें भी माफ कर दिया जाना चाहिए । तो  फिर कालेधन पर इतना शोर-शराबा क्यों । वो भी बंद होना चाहिए । सारे बड़े उद्योगपति सीएसआर के तहत समाज सेवा के लिए , समाज के विकास लिए पैसा देते हैं । तो क्या उनकी काली कमाई और उनके टैक्स चोरी, मनी लांड्रिंग को जायज ठहरा देना चाहिए । नहीं ऐसा हो नहीं सकता है । इसलिए कानून ने जो सज़ा सलमान को दी है, उसे स्वीकार कर लेना चाहिए । फिल्म मदर इंडिया के आखरी सीन में गांव की बेटी की इज्जत पर हाथ डालने वाले अपने बेट पर मां गोली चलाती है । ममता मोह में उसके गुनाह को माफ नहीं करती । अगर वो ऐसा करती तो शायद वो मदर इंडिया नहीं होती  ।

इन सब के बीच में सलमान की सज़ा को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाने वाले लोगों को ये बताना चाहिए, जिन सलमान के नाम रोना इतना रोया जा रहा है, जिनके लिए 13 साल बाद आया फैसला और 5 साल की सज़ा त्रासदी जैसी है, क्या वे उस शख्स का नाम बता सकते हैं, जो उस रात गाड़ी के नीचे आया था । शायद बहुत कम लोगों को पता होगा । टीवी चैनलों पर सलमान जिक्र पिछले दो दिनों से और पिछले 13 सालों में कई दफा किया जा चुका है । लेकिन कभी पीड़ित का दर्द सामने नहीं लाया गया । लाया भी गया हो तो उसे इनती बार नहीं दिखाया जा सका, जितना स्पेस सलमान खींच ले जा रहे हैं ।

उस रात  गाड़ी के नीचे जो शख्स आया था वो भी खान था…..लेकिन बदकिस्तमी से सलमान खान नहीं था । और बस यहीं कमी रह गई । नूरउल्ला खान…..सलमान खान नहीं हो सके । अगर सलमान खान होते तो कहीं तो जिक्र होता । नूरउल्ला खान होना, सलमान खान जितना प्यार और सम्मानित नहीं है । इसलिए खान होकर भी नूरउल्ला आज तक पर्दे के पीछे हैं, गुमनाम हैं । और खान होकर भी सलमान  होना बहुुत बड़ी बात है क्योंकि इस नाम पर फिल्म जगत के दो सौं करोड़ लगें हैं, ये चैरिटी करते हैं, लोग दीवाने हैं, घर दीवारों पर इनक पोस्टर चिपकाये जाते हैं, इसलिए इनकी सज़ा ज्यादा है, जो फैसला आया है वो पंसद नहीं आ रहा है । यहीं फर्क है एक  नूरउल्ला खान और एख सलमान खान होने में । इसे आप किसी भी संदर्भ में देख सकते हैं ।

 

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