संकरा रास्ता और LDM का लक्ज़री वाहन…

P1000842झाबुआ पोस्ट । झाबुआ नगर में यातायात की हालत क्या है, ये किसी भी छिपा नहीं है । बस स्टैंड से थांदला गेट तक अतिक्रमण और दुकानों की सीमा निर्धारित करने के बाद खुला-खुला सा नजर आता है, लेकिन थांदला के गेट के बाद हालत बद से बदतर हैं । यातायात व्यवस्था में सुधार के लिए कई नियम –निर्देश लागू किए गए, लेकिन पालन एक का भी नहीं करवाया जा सका । इस दौरान ट्राफिक प्रभारी भी बदलते रहे, पर बदले हुए प्रभारी भी नगर की यातायात व्यवस्था को नहीं बदल पाए ।

P1000155 पिछले साल तात्कालीन पुलिस अधीक्षक एसपी सिंह के निर्देश पर बस स्टैंड से मुख्य बाजार में चार पहिया वाहन, ट्रैक्टर,ऑटो रिक्शा आदि पर सुबह 8 बजे से रात 9 बजे तक प्रतिबंध लगाया गया था, व्यवस्था अगर पूरी तरह से लागू हो जाती तो यकीन मानिए नगरवासियों को काफी राहत मिलती । लेकिन ऐसा होना नहीं और ये हो भी नहीं पाया । थांदला के गेट जितने भी मार्ग जा रहे हैं चाहे वो मुख्य बाजार हो, कमल टॉकीज वाला मार्ग हो, रूनवाल बाजार, राधाकृष्ण मार्ग हो  या फिर तेलीवाड़ा, लक्ष्मीबाई मार्ग हो सभी रास्ते संकरे हैं. । एक चारपहिया वाहन अंदर प्रवेश करने पर जाम लग जाता है । और इन मार्गों पर ये स्थित अब तो रोजाना दिन में कई दफा निर्मित हो रही है ।

ताज वाक्या मंगलवार का है । जिले के लीड बैंक मैनेजर अपनी लक्ज़री गाड़ी से अपने ऑफिस के लिए निकले । साहब चाहते को ड्रायवर को बस स्टैंड से उत्कृष्ट स्कूल से राजवाड़ा होते हुए भी अपने ऑफिस जाने को कह सकते थे । पर ऐसा हुआ नहीं । LDM साहब की भारी भरकम लक्ज़री गाड़ी झाबुआ के संकरे रास्ते राधाकृष्ण मार्ग से निकली और जगह-जगह जाम लगाती रही । एलडीएम साहब की गाड़ी बड़ी भी इतनी है कि इन संकरे रास्तों पर आ जाए तो दूसरा वाहन तो छोड़िए आदमी पैदल भी नहीं निकल सकता । साहब का ये वाहन थांदला गेट से लेकर रुनवाल बाजार, राधाकृष्ण मार्ग होते हुए राजवाड़ा पहुंचा, इस बीच जगह-जगह कई बार जाम लगता रहा । और लोग LDM साहब और उनकी बड़ी लक्ज़री गाड़ी को कोसते रहे ।

यहां लापरवाही ट्राफिक विभाग की भी है, थांदला गेट पर खड़े रहने वाले जवान को इस हाथी गाड़ी को वहीं रोक देना था ताकि आगे जाम नहीं लगे । लेकिन वाहन के आगे लगी नेमप्लेट से भ्रमित हो गया ।

उम्मीद है एलडीएम साहब इस अनुभव से सबक लेकर अगली बार अपने वाहन को संकरी गलियों से नहीं ले जाएंगे । और उम्मीद भी है कि इस आधा घंटे में जितने लोग परेशान हुए वो भी सबक लेते हुए कभी चारपहिया वाहन हाथ लगे तो कम-कम यहां से तो नहीं गुजारेगें । स्वनियंत्रण ही आपको कई बार अनेक परेशानियों से बचा लेता है, और ये दूसरों के लिए भी फायदेमंद होता है ।

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Categories: वीर के तीर

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