सार्वजनिक टॉयलेट vs वीआईपी टॉयलेट !

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jhabuapost@gmail.com ।  देश के प्रधानमंत्री का ड्रीम प्रोजेक्ट स्वच्छ भारत अभियान । जिसके कई तरह की एंजेसिंयां लगी हुई हैं, सरकारी हो , निजी  हो या फिर कार्पोरेट । सभी लगे हैं । मकसद यही कि एक कदम स्वच्छता की ओर बढ़ाया जाए और देश को गंदगी से मुक्त रखा जाए । ये तो हुई योजना की बात हकीकत क्या है जरा वो समझ लेते हैं, झाबुआ कलेक्टर में एक सार्वजनिक शौचालय जिस पिछले 1 साल से ज्यादा समय से ताले लटके पड़े हैं । ताले किसने लगाए क्यों लगाए कोई नहीं जानता । हां इतना जरूर है कि इन तालों में जकड़े इस शौचालय के कारण लोग परेशान होते हैं । जहां जिले को खुले में शौच करने से मुक्त करने की बात कही जा रही है, वहीं शौचालय पर लगे ये ताले लोगों को खुले में शौच करने को मजबूर कर रहे हैं । कलेक्टोरेट में कईं विभाग हैं, तहसील है, पास में कोर्ट हैं, मगंलवार को जनसुनवाई होती है । सैकड़ों ग्रामीण रोजना यहां आते हैं लेकिन सुविधाघर के अभाव में परेशान होते रहते हैं । खासकर महिलाओं को खासी दिक्कत जाती हैं ।

मामला जब प्रभारी कलेक्टर अनुराग चौधरी के पास पहुंचा तो उन्होंने तुरंत सार्वजनिक शौचालय के ताले खुलवाने की बात कही । लेकिन साहब के फरमान पर अमल कब होता है । ये देखना होगा ।

ये तो हुई पब्लिक टॉयलेट की बात अब करते हैं, वीआईपी टॉयलेट की बात । कलेक्टर ऑफिस के कॉरिडोर में ही एक वीआईपी टॉयलेट बनाया गया है । जो इस पूरी इमारत पर एक दाग जैसा लग रहा है । कलेक्टोरेट में ही जनता सुविधाघर के लिए परेशान हो रही है । लेकिन एडीएम साहब ने अपनी सुविधा के लिए टॉयलेट बनवा लिया । इतना ही नहीं जिस बगीचे को साफ करने की कवायद पिछले कई दिनों से कर्मचारी कर रहे हैं, उसी में ड्रेनेज लाईन छो़ड़ दी । अब तो पूरे बगीचे के बीच से पाईप निकालकर ड्रेनेज को सड़क पर छोड़ा जा रहा है । शिवराज सरकार में बेलगाम होती अफसरशाही का ये नमूना है । मामा शिवराज मेरे लोग, मेरे भांजा -भांजियां, जनता भगवान है जैसे जुमले फरमाते हैं और उनके अफसर आत्मकेन्द्रित होकर काम करते हैं जनता की कोई फिक्र नहीं है ।

 

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