खुला खत- From a गांववाला to a चायवाला !

आदरणीय प्रधानसेवक महोदय

सादर प्रणाम

आप कुशल मंगल में होंगे, ऐसी आशा करता हूं । टीवी पर दर्शन लाभ, दिन-रात के सभी पहर में मिलता रहता है । दर्शन लाभ का ज्यादा फायदा नहीं होता । जितनी बार आप मित्रों के नाम संबोधित करते हैं उतनी बार दिल कुलांचे मारने लगता है, अब क्या होगा । बस इसी फिराक में रहते हैं कि कुछ अच्छे दिन वाला फील गुड हो जाए, सुनकर ही मिल जाए ।  पर माताजी को आपके द्वारा मेरा ज्ञान बढ़ाया जाना पसंद नहीं आता है । वो कहती है – कई मोदी ने लगाड़ी ने बैठी ग्यो, मुरारजी बापू को लगाड़, राम को नाम ले, अणाने तो एबे 5 साल पूरा वेवा का बाद राम याद आवेगा ।

मनमसोच कर चैनल बदलना पड़ता है ।

खैर आपकी नोटबंदी का फैसला बढ़िया है । 100 फीसदी खरा । हमारे झाबुआ जैसे आदिवासी बाहुल्य जिले में गांव के लोग खुश हैं । खुश इसलिए हैं इतने सालों से जो सेठ लोगों ने इनसे लूटा था, वो आपने झटके में पानी कर दिया ।

फिर ये भी है कि लोग अपने सुख से ज्यादा दूसरो के दुख से खुश होते हैं । हमारे जिले के लोग कहते हैं कि ब्याज पर जिन सेठ से पैसा लिया था, उन्होंने भी तगादा करना बंद कर दिया । बोल रहे हैं, होली के बाद आराम से देना कोई जल्दी नहीं है । ब्याज भी नहीं लेंगे । पर होली के बाद दे जाना । आप तो जानते ही होंगे फिर भी बता दूं कि होली इस बार 13 मार्च को है ।

मतलब हमारे यहां का काला धन तो सूदखोरी में खप गया । खैर कोई बात नहीं हमारे यहां आदिवासी फिर भी खुश है ।

आगे समाचार ये है कि आप कैशलेस इकॉनॉमी पर जोर दे रहे हैं । बहुत अच्छा निर्णय है । लेकिन कुछ व्यवहारिक दिक्कतें आ सकती है पीएम जी । हमारे यहां ग्रामीण क्षेत्रों में लोग खुद की जन्म तारीख तो छोड़ दीजिए, अपने बच्चों की जन्म तारीख तक नहीं बता पाते  । इसी बात से समझिए की अपनी शिक्षा और जागरूकता की गाड़ी अभी स्पीडलेस है, ऐसे में कैशलेस की बात कहा तक उचित है ।

बुनियादी जरूरत पर स्पीडलेस इस सिस्टम को आप कैशलेस बनाने की बात कर रहे हैं । महानगरों के लिए ये संभव  है पर,हम ऐसे साक्षर अभी नहीं हुए । तो साहेब सार ऐ छे के भारत कैशलेस त्यारे ज थशे ज्यारे ते भणशे, अने तेना माटे पायानी सुविधा जेवी के शिक्षण, स्कूल और शिक्षकनी जरुरत छे ।

इस पर आपको जोर देना होगा । हमारे यहां बच्चे स्कूल इसलिए नहीं जाते हैं कि उनको घर मवेशिय़ों को चराने जाना पड़ता है । वो अनिवार्य है । हमारे यहां गांव के लोग बच्चों से कहते हैं कि – ली जा डगरा थोड़ोक फेरी लाव, ने दने जाईने स्कूल में रोटो खातो आवजे ।

(मवेशियों को चराने ले जा औऱ दिन में स्कूल से रोटी खाकर (मिड डे मिल ) घर आ जाना । )

हमारी इस जिला स्तरीय समस्या का कोई समाधान अब तक नहीं खोजा गया है । ना ही किसी ने कोशिश की ।मुझे लगता है कि कम से कम आप इस पर कुछ कर सकते हैं, हमारे मध्यप्रदेश में लोगों को खुश रखने के लिए आनंद मंत्रालय बनाया जा रहा है, जो कुछ दिन में काम भी करने लग जाएगा । तो आपसे ये गुजारिश है कि हमारे गांव के मवेशियों को चराने के लिए मंत्रालय बनाया जाए,ताकि गांव के बच्चों को स्कूल जाने में कोई परेशानी ना हो ।  इस विभाग के तहत गांव के मवेशियों को चराने के लिए कुछ लोगों की  भर्ती की जाए, वो मवेशी चराएंगे और गांव के बच्चे स्कूल जा सकेगें । इससे घर वालों को भी कोई आपत्ति नहीं रहेगी, लड़कियों के लिए घरेलू कामकाज में पारंगत लोगों की भर्ती होनी चाहिए , क्योंकि बहुत सी लड़कियां इसलिए स्कूल नहीं जाती या बीच में पढ़ाई छोड़ देती हैं कि उन्हें माता-पिता के खेत पर जाने के बाद घर के जरूरी काम निपटाने होते हैं, अपने छोटे भाई-बहनों को संभालना होता है ।  शिक्षा जरूरी है, ये ना तो हमारे गांव के लोग समझने को तैयार हैं और ना शासन प्रशासन, समाजसेवियों की अखबार में फोटो छपवाने  से ज्यादा कोई रूची है । हमारे जिले की साक्षरता दर बढ़ाने के लिए ये दो काम काफी कारगर साबित हो सकते हैं ।

क्योंकि साहेब जब पढ़ेगा इंडिया, तभी तो कैशलेस बनेगा इंडिया । हमारे यहां पर जहां स्कूल हैं वहा शिक्षक नहीं, जहां शिक्षक पहुंचते हैं , वहां समय से पहले अवकाश घोषित हो जाता है । ऐसे में मेरा तो एक और सुझाव है कि आप तो गांव के सभी स्कूलों में मशीन में  अंगुठा लगाकर प्रवेश का नियम कर दो, आने और जाने दोनों समय अंगुठा लगाना है । अभी खाली लोग फेसबुक और वाट्सअप पर ही अंगूठा ठोक रहे हैं, फुरसत में जो हैं ।  दिक्कत क्या है कि हमारे यहां एक मेमू रेलगाड़ी चलती है, वो जिले में प्रवेश ही सुबह 9.30 पर करती है तो सोचिए इस ट्रेन में रतलाम से अपडाऊन करने वाले मारसाब कितने बचे स्कूल पहुंचते होंगे । आप अंगूठा मशीन लगा दो , तो इस बहाने सर लोग गांव में रहने लग जाएंगे, और मैं तो कहता मास्टर साहब के लिए ही क्यों सबके लिए अंगूठा मशीन लगा दो, तो हालात में कुछ तो सुधार आएगा ।

उम्मीद है हमारी बातों में आपको कुछ सार की बात मिल रही होगी , समस्याएं और सुझाव तो बहुत हैं पर आप अभी इतने पर ही काम शुरू करो, बाकी काम में आपको याद दिलाता रहूंगा ।

थोड़ी लिखी को ज्यादा समझना और कोई गलती हो तो माफ करना ।

आपका लाड़ला

एक गांववाला, जिला झाबुआ

Advertisements

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.