मंत्री जी लोकतंत्र को बचाने काम तो पत्रकार ही कर रहे हैं, बाकी तो औपचारिकता हो रही है !

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लोकतंत्र का महापर्व गणतंत्र दिवस । सम्मान है, बहुत सम्मान है  । दिल में जगह है । औपचारिकताएं नहीं करते, ना करने की आदत है । दिल से अपने देश की फिक्र है । अपने गांव-जिले के विकास की चिंता सताती है । फिक्र होती है कि यहां की आबादी की बुनियादी जरूरतें मिल रही है कि नहीं । तभी तो रात दिन लगे रहते हैं कि लोकतंत्र को कैसे बचाया जाए,कैसे इसकी सेवा की जाए, कैसे समाज के आखिरी व्यक्ति तक इस लोकतंत्र के लिए लिपिबद्ध कर्तव्यों को पहुंचा जाए ।

लोगों को पीने का पानी नहीं मिलता है, ये बात आपका कोई अधिकारी- नेता नहीं बताएगा, ये बात पत्रकार आप तक पहुंचाता है । लोग आज़ादी के बाद भी अंधेरे में हैं, ये भी आपके विभागीय प्यादे नहीं बताएंगे, ये खबर भी आपको पत्रकार से मिलेगी । सड़क नहीं है, राशन नहीं मिल रहा है, भ्रष्टाचार है, शिक्षक समय पर नहीं पहुंच रहे हैं स्कूल में , मिड डे मील में बच्चों को खाना नहीं मिल रहा है, ये सूचना भी पत्रकार देता है, किसी विभागीय अधिकारी-कर्मचारी ने इसकी शिकायत कभी की हो तो बता दीजिए ।

जमीन की लड़ाई लड़ने वाले भगवान सिंह शक्तावत से हमारा क्या रिश्ता था, हमारी क्या पहचान थी उनसे, क्यों सारे पत्रकारों ने मिलकर उसकी आवाज़ उठाई । तीन साल से बीपीएल राशन कार्ड के लिए कोई शख्स भटके तो ये किसका नाकारापन है। मीडिया ने उस विक्रम की आवाज उठाई, तीन दिन में राशन कार्ड बनने की प्रक्रिया शुरू हो गई, उस विक्रम की मीडिया से कोई दोस्ती थी क्या, या हमारा कोई हित था । नहीं ये सब हमारे कर्तव्य का हिस्सा है जो इस देश के प्रति, यहां के गणों के प्रति हमारा है । जो लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के रूप में हमें प्रदान किए गए हैं ।

प्रभारी मंत्री जी आपका ही उदाहरण ले लीजिए- आज आप 26 जनवरी पर भोजन करने पहुंचे बच्चों के साथ, तो भोजन की पूरी थाली सज गई,खीर-पुरी, दाल-चावल, दो सब्जी ।  क्या आपने ये सवाल उठाया कि आज जो भोजन मेरी थाली में है  वो  जिले की हर बच्चे की थाली में है या नहीं , और क्या आपने अपने अधिकारियों से पूछा कि अगर ऐसा नहीं है तो क्यों नहीं है ।  

हम गणतंत्र के चौकीदार हैं, इस तंत्र के गणों की आवाज है,  हमारा काम केवल नेताओं-अधिकारियों के फोटो-वीडियों बनाना नहीं है । गणतंत्र दिवस के लिए पिछले कई दिनों से बच्चे मेहनत कर रहे थे, उनका उत्साह भी बढ़ाना जरूरी है, ताकि जब वो खुद को खबर के बीच पाएं तो उनका उत्साह दोगुना हो जाए । तो आपके अधिकारियों को तकलीफ क्यों होने लगी ।

हमें बैठने की जगह नहीं मिली, हमें सरकारी कार्यक्रम में कभी पीने के लिए पानी नहीं मिला, हमें कवरेज के लिए बार-बार मांग किए जाने के बाद भी कभी प्लेटफार्म बनाकर नहीं दिया गया । हमने प्यासे रहकर , खड़े रहकर भी घंटों मंत्री और सरकारी कार्यक्रमों का कवरेज किया । फिर हमने कभी भी अपने लिए शिकायत नहीं की । इसे भी हमने अपने काम का हिस्सा मान लिया । हमारी जब भी कलम चली, जब भी शब्द निकले तो इस  गणतंत्र के लिए । यहां के लोगों के लिए । गणों के प्रति तंत्र की अनदेखी को लेकर । फिर भी असम्मान होगा तो क्या कीजिएगा । हम जो तस्वीरें उतार रहे थे, वो तस्वीरें हमारे घर के ड्राइंग रूम को सजाने के लिए नहीं थी ।

असम्मान, गलत व्यवहार कतई बर्दाश्त नहीं है । आपके कुछ लोग ये ज्ञान भी बांटते दिखे की राष्ट्रीय पर्व का कार्यक्रम है उसका कवरेज कर लीजिए ।

 तो साहब हमारी राष्ट्रीयता , हमारी देश भक्ति , इस देश और संविधान के प्रति हमारे समर्पण का प्रमाण  केवल मंत्री जी, अधिकारियों और नेताओं को कवरेज देना तो नहीं हो सकता । राष्ट्र का सम्मान है, तिरंगे का सम्मान है, पूरे जिले से स्कूलों, सामाजिक संस्थाओं, आम नागरिकों की तस्वीरें तिरंगे के साथ आएंगी लेकिन प्रशासन नहीं होगा हमने तो ये फैसला किया है ।

हमें ज्ञान बांटने वाले पहले ये बताएं कि  जिले के कलेक्टोरेट कार्यालय के सामने बगीचे में ध्वजारोहण किया गया था, नाश्ता किया और कचरा उसी तिरंगे के आसपास डाल दिया । क्या ये राष्ट्रीय पर्व का सम्मान है ।  पत्रकारों ने उस कचरे को साफ किया । हम तो हमारी हर जिम्मेदारी समझते हैं ।

हम तो गण की आवाज है, तंत्र जब भी गलती करेगा, हम लिखेंगे भी और बोलेंगे भी । और जब इस गणतंत्र के लिए , नागरिकों के लिए कोई अच्छा काम करेगा वो भी सामने आएगा । जो कलमकार आम लोगों की आवाज बनकर , उनकी समस्य़ाओं को लेकर , उनकी परेशानियों को अपने शब्दों के जरिये उठाता आया है, जो इन गणों की आवाज़ है, जो इस गणतंत्र का सच्चा सेवक है, उसको ही आप अपमानित करेंगे । नहीं साहब अपमानित होकर काम नहीं किया जा सकता और ना ही करेंगे ।

 

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