अजब-गजब महिला एवं बाल विकास विभाग, ना महिलाओं की फिक्र और ना बच्चों की ।

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झाबुआ । महिला एवं बाल विकास विभाग पिछले एक साल से अपने विभागीय कामों को लेकर कम और लोकायुक्त के छापों को लेकर ज्यादा चर्चा में हैं । यहां की कार्यप्रणाली भी लोगों की समझ से परे है । ताजा मामला आंगवाड़ी कार्यकर्ताओं की आपत्ति को लेकर है ।

मंगलवार को जनसुनवाई होती है, ये बात झाबुआ तो छोड़ दीजिए पूरे प्रदेश में लोगों को पता है लेकिन महिला एवं बाल विकास और उससे संबद्ध विभाग को नहीं पता । विभाग को ये भी पता नहीं कि झाबुआ में मंगलवार को ही जनसुनवाई के बाद टीएल बैठक होती है, जिसमें कलेक्टर समेत तमाम विभागों के आला अधिकारी मौजूद रहते हैं , जो कभी-कभी 3 बजे तक चलती है ।

लेकिन ये सब महिला एवं बाल विकास के ध्यान में नहीं, क्यों नहीं इसके बारे में हम ऊपर लिख चुके हैं.  इसलिए तो उन्होंने आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की नियुक्ति के लिए आपत्ति लगाने वाले आवेदकों को मंगवार सुबह जिला मुख्यालय पर हाजिर होने का फरमान जारी किया । इस आवेदकों में से कई महिलाएं अपने 3 माह से लेकर 3 साल तक बच्चों के साथ आई । जो इंतजार करते-करते पानी के लिए तरसती रही । महिलाओं , बच्चों और गर्भवती महिलाओं के लिए काम करने वाले इस विभाग को इनका भी ख्याल नहीं रहा, कई गर्भवती महिलाएं भी सुबह 11 बजे से आकर इंतजार करती रही लेकिन जनसुनवाई और टीएल बैठक के कारण कोई अधिकारी नहीं पहुंचा । आवेदकों का कहना है कि ऐसा जनसुनवाई पहले से तय होती है ऐसे में आपत्ति जताने वालों को बुधवार को भी बुलाया जा सकता था ।

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दरअसल हाल ही में हुई कार्यकर्ताओं की नियुक्ति को लेकर कई लोगों ने आपत्ति दर्ज करवाई है । कुछ आवेदकों ने नाम ना छापने की शर्त पर बताया कि इस भर्ती प्रकिया में जमकर गड़बड़ी हुई है । कम योग्यता वालों की भी नियुक्ति हो गई है । कुछ आवेदकों को 57 से ज्यादा नबंर प्राप्त हुए लेकिन अधिकारियों ने साठगांठ कर वरीयता को ताक में रखकर कम  मैरिट वालों को भी नियुक्ति प्रदान कर दी । इस पूरी प्रक्रिया में धांधली को इस बात से समझा जा सकता है कि जहां मिनी आंगनवाड़ी है, और पहले से सहायिका नियुक्त है वहां भी नई नियुक्ति कर दी है । नई नियुक्ति को लेकर पिछले महीने रामा की महिला सशक्तिकरण अधिकारी चंदू चौहान 10 हजार की रिश्वत लेते लोकायुक्त छापे में पकड़ी गई थी । बाकी जगह भी गड़बड़ी हुई है इससे इनकार नहीं किया जा सकता । ये जांच का विषय है । हालांकि सभी आवेदकों को इस बात की संतुष्टी  है कि प्रभारी कलेक्टर और जिला पंचायत सीईओ ने सभी को बुलाया है और फिर दस्तावेज जांच कर इंसाफ का भरोसा दिया है । लेकिन प्रभारी कलेक्टर के इस कदम से मलाई चाट चुके अधिकारियों में हड़कंप है, और मामले को कैसे निपटाया जाए, इसका रास्ता निकालने में लगे हैं ।

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Categories: झाबुआ

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