एक किशोर, एक बुजुर्ग दोनों बिजली विभाग के सितम के मारे, दोनों सिस्टम से हारे ।

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#jhabuapost। #अंकित जैन 9009305600 । jhabuapostgmail.com

ईश्वर की जिंदगी अब पहले सी नहीं रही है । अब वो पहले की तरह लिख नहीं सकता, वो पहले की तरह खेल नहीं सकता, वो पहले की तरह खा भी नहीं सकता है, सायकिल चलाने का उसका शौक और बाइक दौड़ाने का सपना अब उस तरह से पूरा नहीं होगा जैसा वो सोचा करता था । इन सब के लिए ईश्वर को फिर से  अभ्यास शुरू करना होगा ।

ईश्वर झकनावदा के पास कुंभाखेड़ी गांव का रहने वाला है । एक हादसे में अपना एक हाथ गंवा चुका है । गरीबों के घर उजाले के लिए सरकार बिजली के पोल और तार लेकर आई थी लेकिन लापरवाही और मनमानी के चलते मामूस ईश्वर को अपना एक हाथ गंवाना पड़ा । ये हादसा 12 सितंबर को हुआ । जब ईश्वर दराता लेकर घास काटने पहुंचा और बिजली के तार की चपेट में आ गया । हाथ, पैर और पेट झुलस गए । इलाज के दौरान ईश्वर का एक हाथ काटना पड़ा । ईश्वर का करीब महीने भर तक इंदौर के एमवाय अस्पताल में इलाज चला । अब जेब जवाब दे चुकी है, तो अकरम अपने बेटे को लेकर वापस आ गया है । मदद की गुहार के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगा रहा है ।

बिजली विभाग के पोल और तार काफी समय से गिरे हुए थे, शिकायत के बाद भी इन्हीं यहां से हटाने की जहमत नहीं उठाई गई, ईश्वर के पिता अकरम की माने तो पिछले दो साल से भी ज्यादा समय से बिजली पोल और तार खेत में गिरे हुए थे । एक दिन बिना किसी पूर्व  सूचना के  करंट छोड़ दिया , जिसका झटका ईश्वर के साथ-साथ उसके परिवार को भी लगा । अकरम इसे विभाग की लापरवाही मानते हैं । इस हादसे के बाद भी बिजली विभाग ने खेत से तार नहीं हटाए । शायद ये तार विभाग  ने अपनी लापरवाही की गवाही के लिए यहां छोड़े हों । ईश्वर की जिंदगी बदल चुकी है, मां-पिता को उसकी भविष्य की चिंता खाई जा रही है, उससे भी पहले इलाज के लिए मदद की जरूरत है । हद तब हो जाती है कि हादसे के बाद भी अकरम के खेथ में बिजली के तार गिरे हुए हैं और भयभीत है कि कपास बिनने के लिए वो खेत के भीतर कैसे जाएं ?

मामले में बिजली विभाग अपनी गलती मानने को तैयार नहीं है, झकनावदा सर्किल के जेई दिनेश मोहनिया के मुताबिक खेत में पड़े तारों में करंट नहीं था, मामले में पुलिस एफआईआर दर्ज हुई है । कोर्ट केस के आधार पर जो भी क्लेम होगा वो दिया जाएगा ।

उधर झकनावदा चौकी प्रभारी पृथ्वी डामोर  ने झाबुआ पोस्ट को बताया कि मामले में एफआईआर दर्ज नहीं की है, मामले की जांच की जा रही है, विभाग को पत्र भेजा गया है लेकिन अभी तक जवाब नहीं आया ।

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मासूम ईश्वर की तरह ही बेकल्दा गांव के रालिया परेशान है, इनके खेत में भी बिजली विभाग ने कुछ साल पहले पोल लगाए थे, तार ताने थे लेकिन बिजली पोल लगाते वक्त ठेकेदार सीमेंट कांक्रीट का खर्चा बचा लेते हैं, अधिकारी वर्ग ठेकेदार के झूटी बातों और आकड़ों पचा लेते हैं, इसलिए कई जगहों पर जब पोल लगाए जाते हैं उसी साल जमीन पर धड़ाम हो जात हैं फिर शिकायत ,सुनवाई का दौर चलता है लेकिन ये सिस्टम हाथी हताश होकर छोड़ देता है। आदमी को बिजली के पोल और तार तो दिखते रहते हैं लेकिन करंट की उम्मीद छोड़ देता है, इन तारों को अपना दोस्त समझ लेता है, फिर कभी अचानक करंट दौड़ पड़ता है, इसी करंट की चपेट में मासूम ईश्वर आ जाता है, बुजूर्ग रालिया खुशनसीब है कि अब तक तारों में करंट नहीं आया लेकिन खेत में तारों को इधर से उधर करना उसके लिए बुढ़ापे काफी कठिन साबित हो रहा है ।

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Categories: झाबुआ

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