सरकार के सर्कुलर की उड़ रही धज्जियां, कार्यक्रम के अतिथि मेला प्राधिकरण के अध्यक्ष-कलेक्टर-एसपी !

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झाबुआपोस्ट । super Exclusive

एक निजी स्कूल संस्था मध्यप्रदेश सरकार के सर्कुलर की धज्जियां उड़ाई जा रही है  । इसमें जिला प्रशासन भी उसका साथ देता नज़र आ रहा है । मध्यप्रदेश सरकार के तत्कालीन मुख्य सचिव अॅन्टोनी डिसा ने 3 नवंबर 2015 को प्रदेश के सभी कलेक्टर और एसपी को सर्कुलर जारी करते हुए निर्देशित किया था कि खेल मैदान में केवल खेल गतिविधियां संचालित की जाएं । इसके इतर राजनैतिक,सामाजिक और अन्य सांस्कृतिक गतिविधियों को खेल मैदान ना होने दिया जाए । इस सर्कुलर के दो साल बाद भी जिला प्रशासन इसका पालन करवाने में असफल रहा है  । इधर कॉलेज के खेल मैदान पर निजी स्कूल के सांस्कृतिक कार्यक्रम पर प्रशासन ने चुप्पी साध रखी है । इतना ही प्रशासन के जिम्मेदार और जनप्रतिनिधि खुद इस कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि आमंत्रित हैं ।

आए दिन आयोजित होने वाले राजनैतिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों से खिलाड़ी परेशान हैं, लेकिन रसूखदार लोगों के बोलने से बच रहे हैं । आयोजकों ने कार्यक्रम के लिए आधे मैदान पर कब्जा कर लिया है ।  दूसरी और कॉलेज मैदान पर निजी संस्था को कार्यक्रम की अनुमति देने को लेकर कलेक्टर कुछ भी कहने से बचते नज़र आए । कॉलेज प्रिसींपल अनिजवाल ने जनभागीदारी समिति के अध्यक्ष की सहमति का हवाला दिया ।

शहीद चंद्रशेखर आज़ाद पीजी कॉलेज की जनभागीदारी समिति के अध्यक्ष यशवंत भंडारी पूरे कार्यक्रम को कॉलेज ग्राउंड पर अनुमति देने की बात स्वीकार रहे हैं । उनका ये भी कहना है कि सरकार के सर्कुलर की उन्हें जानकारी नही हैं । गौरतलब है कि यशवंत भंडारी जनभागीदारी अध्यक्ष समेत कई सामाजिक, विधिक संस्थानों से जुड़े है  ।

इसके पहले भी कई तरह के आयोजन हो चुके हैं लेकिन प्रशासन कभी इन कार्यक्रमों को रोक नहीं पाया । सांसद कांतिलाल भूरिया के बेटे की शादी का रिसेप्शन भी इसी मैदान पर सम्पन्न हुआ था, संस्था शिवगंगा भी अपने वार्षिक कार्यक्रम हलमा का आयोजन इसी मैदान पर करती है ।

कार्यक्रम के बाद मैदान को असमतल छोड़कर आयोजक नौ दो ग्यारह हो जाते है । उसके बाद परेशानियों का सामना खिलाड़ियों को करना पड़ता है । कई बार इस तरह के कार्यक्रमों में खोदे गए गड्डों में पैर गिरने से खिलाड़ियों को मोच भी आ चुकी है । इसी तरह की परेशानियों की वजह से मध्यप्रदेश सरकार की ओर से प्रमुख सचिव अॅन्टोनी डिसा  ने सर्कुलर जारी किया था लेकिन उसी सर्कुलर का पालन करवाने में प्रदेश के कलेक्टर-एसपी अब तक नाकाम रहे हैं ।

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कॉलेज ग्राउंड पर कार्यक्रम करने के पीछे की एक वजह ये भी है कि झाबुआ में संचालित होने वाले निजी गार्डनस् का किराया दैनिक 55 हजार से 80 हजार के बीच है । बाकी आप समझ सकते हैं कि कॉलेज ग्राउंड पर कार्यक्रम करना मतलब हिंग लगे ना फिटकरी रंग चोखे का चोखा वाली बात है ।  सवाल यहां ये  भी है कि पिछले दिनों दीपावली पर पटाखा व्यवसायियों को स्कूल प्रबंधन ने कोई राशि ना लेकर जनसेवा में लगाने के नाम पर खूब प्रोपोगेंडा किया था । तो क्या संस्था अपने स्कूल के खेल मैदान में इस कार्यक्रम को आयोजित नहीं कर सकती थी । जनसेवी संस्था के द्वारा खेल मैदान पर शहर के खिलाड़ियों के लिए गड्डे खोदे जा रहे हैं लेकिन जिम्मेदार खुद कार्यक्रम में मुख्य अतिथि बनकर पहुंच रहे हैं । इन तमाम परिस्थियों के बीच में ही आगामी 26 दिसंबर को प्रशासन सुशासन दिवस के रूप में मनाने जा रहा है । रसूखदारों के आगे नतमस्त और आम जन को न्याय के लिए इंतजार करवाता सिस्टम ही आज की तारीख में सुशासन की परिभाषा है ।

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