टॉयलेट पर किसने ये ताला लगा डाला, दुविधा ने हमारी हमें मार डाला !

झाबुआपोस्ट । अंकित जैन ।

टॉयलेट पर किसने ये ताला लगा डाला, दुविधा ने हमारी हमें मार डाला । यहीं कारण है कि जब कईं लोग अपनी शंका के समाधान के लिए सुविधाघर तक पहुंचे तो वहां लगे तालों ने उन्हें खूले में गंदगी फैलाने को मजबूर कर दिया । वाक्या बस स्टैंड का है,जहां रात में सुविधाघर पर ताला होता है, तो लोगों को मजबूरन दीवारों का सहारा लेना पड़ता है । झाबुआ बस स्टैंड पर दो सुविधाघर हैं, एक नवनिर्मित जिसका दो बार काम हो चुका है, एक पूराना । लेकिन इसके बावजूद बस स्टैंड पर आने वाले यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ता है । रात में 9 बजे के बाद । (तस्वीरें देंखे, सब समझ जाएंगे )

दरअसल माजरा ये है कि नगरपालिका रात में इन सुविधाघरों पर ताला लगा देती है । रात बे रात आने वाले मुसाफिर सुविधाघर का बड़ा सा बोर्ड देखकर वहां पहुंचते तो हैं लेकिन ताला लगा देखकर उल्टे पांव लौट जाते हैं । अब ऐसे तो स्वच्छता में अव्वल आना मुश्किल हैं ना । तो आम लोगों की तरफ से गुजारिश है कि सुविधाघर को 24 घंटे चालू रखा जाए । ड्यूटी का समय हो सकता है, सुविधाघर के खुलने और बंद करने का समय भी रखा जा सकता है, लेकिन इस बात पर भी गौर करें कि  शंका लगने का कोई समय नहीं होता है, चाहे वो दीर्घ हो या लघू । तो रात में 9 के बाद लोगों को समस्या हो रही है उसका समाधान नगरपालिका को करना चाहिए । 

दूसरी और नगरपालिका की परेशानी ये है कि रात में बदमाश अपराधिक तत्व इन सुविधाघरों से ही लाइट्स, बल्ब निकाल ले जाते हैं, अपने घरों में प्रकाश फैलाते हैं , इस बार सुरक्षा के मद्देनज़र नगरपालिका ने इस पर रात को ताला लगाना शुरू कर दिया । नगरपालिका की चिंता भी वाजिब है पर, स्वच्छता का ह्ल्ला भी होगा और सुविधाघर पर ताला भी होगा , तो कैसे नबंर आएंगे ।

 हम सबको मिलकर हमारे झाबुआ शहर को स्वच्छ बनाना है, इसके लिए सबको मिलकर काम करना होगा । स्वच्छता सर्वेक्षण में शहर को ज्यादा नंबर दिलाने के लिए बदमाशों और आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों से भी अपील है कि दोबारा तैयार किए बस स्टैंड के सुविधाघर को बख्श दें , ताकि नगरपालिका को वहां रात में ताला ना लगाना पड़े,  जब ताला नहीं लगेगा तो लोगों को खुले में गंदगी नहीं करनी पड़ेगी । आपके इस सहयोग के लिए आपका नागरिक सम्मान भी किया जा सकता है ।  ये तो रही बदमाशों की बात ।

नगरपालिका की ओर से चौकीदार की व्यवस्था भी की जा सकती है , जब प्रचार-प्रसार पर इतना खर्च हो रहा है सफाई के लिए तो, सुरक्षा के लिए भी खर्च हो सकता है ।  

स्वच्छता को लेकर जमकर हल्ला है , फ्लेक्स, बैनर, गाने, वीडियो,वाल पेंटिंग खूब दिखाई दे रही है । कचरा और गंदगी फैलाने वाले पर नगरपालिका ने जुर्माना भी तय कर दिया है । लेकिन इस पूरी कवायद के ये तस्वीरें और हालात सोचने पर मजबूर करते हैं, उम्मीद हैं, जिम्मेदार इस और ध्यान देंगे , लोगों की दुविधा को दूर करने के लिए भी रात-बे-रात सुविधा घर खुले रहेंगे ।

जय भारत-जय स्वच्छता

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Categories: झाबुआ

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