अमित शाह पर भारी कांग्रेसी भीड़, संभागीय संगठन मंत्री की हठधर्मिता बनेगी भाजपा के लिए मुसीबत ।

jaypal

Political Post@आलोक कुमार द्विवेदी 

6 अक्टूबर को झाबुआ जिले के कॉलेज मैदान पर भीड़ को लेकर भाजपाई दावे जिस तरह से खोखले निकले, लेकिन भाजपाईयों को फिर भी ये लगता है कि अगर जोर से बार-बार झूठ बोला जाए तो वो सच हो जाएगा । लेकिन झूठ को सच बनाने का ये खेल भाजपा के भविष्य के लिए ठीक नहीं है, वो भी ऐसे समय में चुनाव सर पर है  । मौजूदा दौर में भक्त और भगवान देानो को निंदा पंसद नहीं है और शायद यही कारण है कि भक्त-गणों को जब भी आईना दिखाया जाता है, तो आईने में कमी ढूंढते हैं । 6 अक्टूबर को जो कॉलेज मैदान पर भीड देखी गयी उससे साफ हो गया की अमित शाह का जादू भी आदिवासीयों पर नहीं चला । भाजपा के नेता जो पहले एक लाख लोगों के आने का दावा कर रहे थे बाद में आकाड़ा 50 हजार पर आ गया, लेकिन पचास हजार लोग में से 40 तो ठीक बीस हजार भी लोग पहुंच जाते तो शायद भाजपा की नाक बच जाती । कॉलेज ग्राउन्ड पर पन्द्रह हजार कुर्सियां लगाई थी लेकिन जब भरी नही गयी तो पीछे से कुर्सियां उठानी पड़ी । विश्व की सबसे बड़ी पार्टी का तमगा लेकर घूम रही बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष  की सभा में आम जनता टोटा सवाल खड़े करता है कि आदिवासी क्षेत्र में भाजपा का जादू फीका पड़ गया है, वो भी चुनाव से महज 50 दिन पहले….

 कमलनाथ भारी,BJP के नाथ पर 

12 सितम्बर को झाबुआ जिले के पेटलावद में कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ की सभा रखी गयी थी, जिस मैदान मे सभा रखी वहां पांव रखने की  जगह भी नही थी,भले ही भाजपाई इस बात को उपरी मन से स्वीकार नहीं करे लेकिन आफ द रिकार्ड भाजपाई भी मानते हैं कि 12 सितम्बर की भीड के सामने अमित शाह की भीड  बरगद और गमले वाली दिखाई दी । बीजेपी के विश्वास सारंग राहुल गांधी और अमित शाह की तुलना गमले और बरगद से करें लेकिन यहां तो कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष की सभा ही बरगद साबित हुई, और शाह की सभा गमले के समान लगी…

आखिर किसने बनया शाह का यह प्रोग्राम 

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह झाबुआ का यह दौरा आखिर किसने बनाया ,यह क्योंकि जब राष्ट्रीय अध्यक्ष झाबुआ आ रहे तो झाबुआ से बडी संख्या में जिम्मेदार कार्यकर्ताओ को इन्दौर बुलवा लिया गया,  जब बूथ लेवल का कार्यकर्ता ही इन्दोर पहुच गया तो भीड कौन लायेगा मतलब साफ है कि शाह का प्रोग्राम बनाने वाला भी चाशनी-धारी  होगा, जिसने जरा भी अकल लगाने का काम नही किया और अमित शाह के दौरे केा इस प्रकार से बना दिया झाबुआ में विश्व की सबसे बड़ी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष की सभा में उनके कद के अनुसार भीड़ का टोटा रहा । सीधे शब्दों में कहा जाए तो ये अमित शाह का फ्लॉप शो था । क्योंकि ना तो उनके भाषण में वो धार दिखी और ना ही वो सभा में बैठे लोगों को बांध सके ।

13 विधायक और एक मंत्री को नकार दिया जनता ने 

अमित शाह के इस आयोजन में चार जिलो के विधायक और मंत्री यानी की लगभग 13 विधायक और एक मंत्री होते हुए भी अपने ही राष्ट्रीय अध्यक्ष की सभा में सम्मान जनक भीड तक नही जुटा पाए, जनता ने या तो इन विधायक को नकार दिया या फिर विधायक ने तो प्रयास किया लेकिन जनता ने अमित शाह को लेकर कोई रूचि नहीं दिखाई । भाजपाईयों के दावों के उलट शब्द प्रवचन के श्रोता झाबुआ कॉलेज ग्राउन्ड तक नहीं पहुचे । जहां तक झाबुआ की बात की जाय तो झाबुआ के विधायक भी कही न कही भीड़ लाने में पास नही हो पाए । भाजपा के ही जमीन से जुड़े कार्यकर्ता दबी जुबान से कहते हैं कि 1500 की संख्या भी बताने में ज्यादा मालूम पड़ रही है ।  कलसिह और निर्मला की बात की करना बेमानी है दिलीप कटारा जरूर अपने साथ तीन से चार हजार लोगो की भीड़ लेकर कार्यक्रम स्थल तक पहुंचे थे लेकिन तब तक अमित शाह का भाषण प्रारंभ हो चुका था।

सब दुखी,हो रही कानाफूसी- जयपाल चावड़ा डुबायेगा नाव

अदंर खाने से छन कर आ रही खबरों पर भरोसा करे तो भाजपा संगठन को मजबूत करने के लिए भेजे गये संभागीय संगठन मंत्री जयपाल चावड़ा आदिवासी अंचल में भाजपा के ताबूत में आखरी किल ठोकेगें क्योकि जयपाल चावडा की हठधार्मिता के कारण ही भाजपा को आदिवासी जिलों में कई प्रकार से खामियाजा भुगतना पड़ रहा है  । जानकार बताते है कि  झाबुआ में चावड़ा की ज़िद के चलते दौलत भावसार को जिला अध्यक्ष बनाया और बाद में जयपाल चावडा ने ही उन्हें हटावा दिया ।  उसके बाद जयपाल चावडा की पसंद बने मनोहर सेठिया  ।  लेकिन जब मनोहर सेठिया ने भी जयपाल चावडा की हां मे हां मिलाना कम कर दी तो बस यही से सेठीया के बुरे दिन प्रारंभ हो गये । और आखिर कर जयपाल की नारजगी भारी पडी और सेठिया को असम्मान-जनक रूप से विदा होना पडा । अब जयपाल की पंसद बने ओम शर्मा कितने दिन तक जयपाल की पंसद बने रहते है यह देखना है लेकिन इस सबमे बडा नुकसान हो रहा भाजपा का जो कोई देखना नही चाहता । अब तो यहां तक कहा जाने लगा है कि जयपाल की हां में हां मिलाओ और सत्ता का आनंद लो अगर ऐसा ही चलता रहा तो निश्चित है कि झाबुआ में विधानसभा के टिकीट भी जयपाल की पंसद के मिलेगे और उसका परिणाम क्या होगा यह भी टिकीट के साथ पता चल जायेगा । वैसे अमित शाह के दौरे को लेकर भीड की प्रशंसा करने वाले भाजपाई भक्तो को बहुत धन्यवाद जो सार्वजनिक रूप से भले ही नहीं स्वीकारें की भीड ने वाट लगा दी लेकिन आफ द रिकार्ड यह जरूर कहते हैं कि जयपाल जी की वजह से  जिले में संगठन की वाट लगी हुई पड़ी है ।

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Categories: झाबुआ

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