झाबुआ में मंत्री विश्वास सारंग ने फहराया तिरंगा, ली परेड की सलामी!

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झाबुआ में सहकारिता राज्य मंत्री और जिले के प्रभारी मंत्री विश्वास सारंग ने ध्वजारोहण किया…ध्वजारोहण के बाद विश्वास सांरग ने परेड का निरीक्षण कर, मुख्यमंत्री के संदेश का वाचन किया. पहले से तय कार्यक्रम के अनुसार विश्वास सारंग राजगढ़ जिले में ध्वाजारोहण करने वाले थे लेकिन लेकिन बाद में कार्यक्रम बदलाव हुआ और विश्वास सांरग ने झाबुआ पुलिस लाईन मैदान पर आयोजित स्वतंत्रता दिवस समारोह में भाग लिया.समारोह झाबुआ विधायक शांतिलाल बिलवाल, पेटलावद विधायक निर्मला भूरिया , बीजेपी जिलाध्यक्ष दौलत भावसार समेत कई
गणमान्य नागरिक, आम जनता और बड़ी संख्या विभिन्न शैक्षणिक संस्थाओं के छात्र-छात्राएं शामिल थे ।

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नाइट्रावेट का नशा कर देते थे वारदात को अंजाम !

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झाबुआ कोतवाली पुलिस ने तीन शातिर बदमाशों को पक़ड़ने में सफलता हासिल की है । पुलिस की इस कार्रवाई में चोरी अलग-अलग दो वारदातों का खुलासा भी हुआ है । पिछले दिनों अस्पताल के सामने किराना दुकान में हुई चोरी के  सिलसिले में झाबुआ थाना प्रभारी आरसी भास्करे और उनकी टीम ने मामले की जांच शुरू की जिसके बाद इन तीनों बदमाशों को पुछताछ के लिए हिरासत में लिया था । पकड़े गए बदमाशों के नाम अजय उर्फ राखी , विकास  उर्फ पप्पू लंगड़ा और विक्की हैं । तीनों के पास करीब 6 हजार रूपए की नगदी, करड़ावद मंदिर से चोरी किया हुआ चांदी का छत्र और सिक्के बरामद हुए हैं । इसके साथ  इनके पास प्रतिबंधित नाइट्रावेट दवा और गांजा भी बरामद हुआ है । ये तीनों नशा करने के बाद ही वारदात को अंजाम देते थे ।

एसडीओपी एसआर परिहार के मुताबिक ये सामने आाया है कि ये तीनों आदतन नशेड़ी हैं, और अपनी नशे की लत को पूरी करने के लिए चोरी करते थे । फिलहाल पुलिस को उम्मीह है कि इनसे पुछताछ में कुछ और भी चोरियों का खुलासा हो सकता है ।

नंदलाला के दरबार में नंदू भैया !

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सावन मास में गोर्वधननाथ जी की हवेली पर झूले के दर्शन होते हैं , जिसमें खासी भीड़ उमड़ती है । शुक्रवार झाबुआ पहुंचे बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार सिंह चौहान गोवर्धननाथ जी की हवेली अचानक दर्शन करने पहुंचे । नंदू भैया के साथ झाबुआ विधायक शांतिलाल बिलवाल भी थे, दोनों चल रहे कीर्तन में 15 मिनट तक बैठ और श्रीनाथ जी के कीर्तनों का श्रवण किया । नंदुकमार सिंह चौहान दरअसल शुक्रवार को झाबुआ विधानसभा कार्यकर्ताओं की बैठक के लिए झाबुआ पहुंचे थे, बैठक खत्म होने के बाद जैसे ही उन्हें गोवर्धनाथ जी की हवेली में झूले के दर्शन और कीर्तन के बारे में बताया गया , तुंरत विधायक शांतिलाल बिलावाल और बीजेपी जिलाध्य्क्ष के साथ मंदिर पहुंचे, जहां उन्होंने शांति के साथ झूले के दर्शन भी किए और कीर्तन भी दोहराया ।

महिला का शव 5 दिन तक करता रहा पति का इंतजार, संवेदनहीनता की पूरी कहानी, आपको झकझोर देगी ।

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9 अगस्त को देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी चद्रशेखर आज़ाद नगर भाबरा में जरा याद करो कुर्बानी कार्यक्रम में भाग लेने आ रहे हैं, आज़ादी मिले हमें 70 साल जो हो रहे हैं उसी का जश्न अलग-अलग जगह मनाया जाना है, लोगों में देशभक्ति की भावना का संचार करना है । लेकिन सरकार और सरकार के अधिकारियों में इस देशभक्ति की भावना ज्यादा जरूरी और ये इस तरह के कार्यक्रम से नहीं आएगी, ये आएगी  आम लोगों की समस्याओं और उनके दुख दर्द में शामिल होने से, आम आदमी की परेशानी को अपनी परेशानी समझने से । आम आदमी की बात जब सरकारी दफ्तरों में ध्यान से सुनी जाने लगेगी तो फिर सुराज आएगा । फिर गर्व भी होने लगेगा की मेरा देश महान है, यहां किसी गरीब, किसी मजबूर , किसी बेसहारा का आवाज कहीं गुम नहीं होती बल्कि किसी समाधान तक पहुंचती है । इस स्वीकारोक्ति के लिए कोई कार्यक्रम की जरूरत नहीं होगी . लोग अपने आप बोलगें, सरकारों के जयकारे लगाएगें, साहेब और मामा के भी खूब गुण गाएंगे लेकिन वो दिन अभी दूर है ।

शायर अदम गौंडवी ने क्या खूब कहा है कि

तुम्हारी फाइलों में गांवों का हाल गुलाबी है ।

ये आकड़े झूठे हैं, ये दावे किताबी हैं ।

आम आदमी की बेहतरी को लेकर लाख दावे हो लेकिन झाबुआ जिले में की एक घटना ने सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या वाकई बड़ी कुर्सियों  पर बैठे लोगों को आम जनता से कोई मतलब है भी या नहीं । झाबुआ के सातसेरा गांव  में एक महिला की मौत के बाद उसका शव 5 दिन तक घर में रखा रहा, परिजन महिला के पति के आने का इंतजार करते रहे लेकिन सरकारी कागज के अभाव में पति अपनी पत्नी के अंतिम संस्कार में नहीं पहुंच सका । सरकारी कागज कई दफा दब जाते, टोकरी में पहुंच जाते हैं, लेकिन ये घटना शर्मसार करने वाली है, परिजनों का आरोप है  कि गुहार, आवेदन लगाने के बाद भी संवेदहीन झाबुआ प्रशासन एक पत्र न लिख सका ।

महिला का नाम संम्बुड़ी बाई जिसकी लंबी बीमारी के चलते रविवार को मौत हो गई । महिला का पति रेवसिंह मेड़ा अलग-अलग अपराधों में इंदौर सेंट्रल जेल में उम्रकैद की सजा काट रहा है । अंतिम संस्कार के लिए इंदौर सेंट्रल जेल ने झाबुआ कलेक्टर के पत्र के बिना रेवसिंह को उसके गांव ले जाने से मना कर दिया । परिजनों का कहना है कि  सोमवार को कलेक्टर और एडिशनल एसपी सीमा अलावा को उन्होंने आवेदन पत्र दिया था । कलेक्टर से परिजनों की सीधी बात नहीं हो पाई क्योंकि आम लोगों से मैडम कम ही इत्तेफाक रखती हैं, आवेदन बाबु को दिया और फिर शायद वो आवेदन किसी रद्दी की टोकरी में जा पहुंचा होगा । लेकिन झाबुआ प्रशासन की इस संवेदहीनता के चलते परिवार में खासा गुस्सा है । रेवसिंह के भाई कहते हैं कि हमारी कहीं सुनवाई नहीं हुई । 5 दिन तक शव को रखना मजबूरी थी, क्योंकि भाई ने कहा था कि वो अंतिम संस्कार में जरूर आएगा ।

रेवसिंह के 6 बच्चे हैं…सबसे बड़ा बेटा भी झाबुआ जेल में हैं…जबकि दो बच्चों की मौत इसी साल पानी में डूबने से हो गई…अब तीन छोटे बच्चे हैं..जिनके ऊपर ना पिता का हाथ है और ना ही मां का साया….रेवसिंह के भाई ने एडिशनल एसपी सीमा अलावा से भी गुहार लगाई लेकिन नतीजा सिफर ही रहा । 5 दिन तक सम्बुड़ी का शव घर में रखा रहा…लोगों ने लकड़ी की पेटी में बर्फ से सुरक्षा करने की कोशिश भी लेकिन शव गलता रहा और उसकी बदबू भी बढ़ती रही….गुरूवार सुबह इंदौर सेंट्रल जेल में बंद रेवसिंह भी हिम्मत हार गया और सुबह 9 बजे अपने भाईयों से कहा कि उसका आना मुश्किल है,पत्नी का अंतिम संस्कार कर दिया जाए…जिसके बाद गुरूवार शाम को संम्बुड़ी का अंतिम संस्कार किया गया वो भी पूरे पांच दिन बाद…इस बीच रेवसिंह का परिवार कलेक्टर कार्यालय और एसपी कार्यालय के चक्कर काटता रहा,  गुहार लगाता रहा लेकिन आम आदमी का कागज साहब लोगों की अकड़ के आगे टीक ना पाया । कलेक्टर के व्यवहार को लेकर लोगों में गुस्सा है, चाहते हैं कि यहां से तबादला भी हो जाए लेकिन आम आदमी का कागज रद्दी की टोकरी में पुहंच जाता है और उसकी आवाज गुलाबी भवन की दीवार से टकराकर ही खामोश हो जाती है ।

 

हादसों से सबक सीखने को तैयार नही, ना जनता और ना ही सिस्टम !

झाबुआ में बीते दो दिनों से बारिश दौर जारी है.और बारिश के बाद कुछ ऐसी तस्वीरें भी सामने आ रही है जो लापरवाही को बयान करती हैं.बारिश में तमाम हादसों से ना तो लोग सबक लेने को तैयार है और ना ही प्रशासन…ये तस्वीर पेटलावद के रामगढ़- करवड़ मार्ग की है..नाला उफान पर होने के बावजूद ड्राइवर स्कूली बच्चों से भरी इस मैजिक वैन को निकाल रहा है…ये एक्सक्लूसिव तस्वीर आपको बता रहे हैं.वैन में पेटलावद के एक निजी स्कूल के बच्चे बैठे हुए थे…लेकिन उसके बावजूद वैन के चालक ने उफनते नाले को पार करनी की कोशिश कर रहा है…..वहीं एक और तस्वीर जिसमें एक शख्स
उफनते नाले से बाइक निकालता दिख रहा है…जिले में भर में ऐसे छोटे-नदी नाले हैं…ऐसे नालों पर ना तो आपदा प्रबंधन की टीम पहुंच रही है और ना ही सुरक्षा…..पिछले दिनों जामली के पास इसी तरह के नाले में तीन बाइक बहकर चली गई थी,जिसमें दो लोगों की मौत हो गई थी…लेकिन उसके बाद भी लोग सबक लेने को तैयार नहीं हैं. यहां आरटीओ की लापरवाही भी सामने आ रही है, नियमानुसार स्कूल का रंग पीला होना चाहिए लेकिन उसके बावजूद जिले स्कूली वाहनों द्वारा नियमों की धज्जियां उ़ड़ाई जा रही है ।

 

मैडम, मम्मी का ट्रांसफर करवा दो…!

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मैडम हमारी मम्मी का ट्रांसफर करवा दीजिए, हम अकेले हैं , बहुत परेशान हैं, हमारा मम्मी के सिवा कोई नहीं है, प्लीज मैम आप कुछ कीजिए ना । ये गुहार लगाई जनसुनवाई में आए 5 बच्चों ने । नियति ने पहले पिता का साया छीन लिया और फिर पेट की मजबूरी ने  मां के आंचल से भी इन बच्चों को दूर कर दिया ।

5 बच्चे जिनमें सबसे छोटा वेदांत जिसकी उम्र करीब 6 साल  अपनी 4 बड़ी बहनों के साथ मंगलवार को होनी वाली जनसुनवाई में पहुंचा । बच्चों ने कलेक्टर अरूणा गुप्ता से गुहार लगाई की उनकी मम्मी का ट्रांसफर करवा दीजिए । दरअसल बामनिया में रहने वाली अंजलि शर्मा और उनके भाई बहन उनकी माता अनिता शर्मा का तबादला जिला नरसिंहपुर से झाबुआ करवाना चाहते हैं ।

अंजलि की पिता रामेश्वर शर्मा जो कि चित्तोड़ीरूंडी में शिक्षक थे, साल 2011 में मृत्यू हो गई थी । पति की मौत के बाद अनिता पर बच्चों की देखभाल और जीविका चलाने का बड़ा सवाल था । कुछ समय बाद अनिता को अनुकंपा नियुक्ति मिली लेकिन मजबूरी के साथ । अनिता की नियुक्ति नरसिंहपुर के कन्या छात्रावास में रसोईयन के पद पर हुई । पारिवारिक स्थितियों के कारण मां ने अपने पांच बच्चों को छोड़कर वहां नौकरी जाने का फैसला किया लेकिन 3 साल से ज्यादा का समय बीत जाने के बाद भी जिले में वापसी नहीं हो पाई । मां और बच्चे इसी उम्मीद रहे कि कभी ना कभी तो घर वापसी होगी ।  ये बच्चे इसके पहले सीएम शिवराज को भी आवेदन सौंप चुके हैं । कलेक्टर अरूणा गुप्ता ने बच्चों की बात को ध्यान से सुना, बच्चों की बात सुनकर उनका भी दिल पिघल गया, उन्होंने कहा कि तबादला उनके हाथ में नहीं है लेकिन वे इसके लिए आयुक्त को पत्र  लिखेंगी । उधर आदिवासी सहायक आयुक्त शकुंतला डामोर ने भी बच्चों के हित में नरसिंहपुर जिला शिक्षा अधिकारी  से बात कर मामले में तेजी लाने की बात कही है ।

बच्चे मां से महीनों नही मिल पाते हैं क्योंकि इतनी छुट्टियां नहीं होती है, ऐसे में अंजलि के मुताबिक मम्मी आ जाएगी सब ठीक हो जाएगा । महिला अधिकारियों की सह्दयता के बाद बच्चों को उम्मीद है कि जल्द ही उनकी मां उनके पास होगी । और फिर से उनका पूरा परिवार एक साथ होगा ।

 

मालवी जूतो । वात पल्ले नी पड़ी- अनुभूति पार्क ।

malvi juto

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रातें रवड़ता-रवड़ता तीन चार लोगों रोट्या पचावा निकली जांवा, ने फेर आई ने बस स्टैंड पर कन्नू भई की दुकान चाय मार ला तो थोड़ों ठीक लागे । 5-6 बाईयां मिल जाए तो, वाता-वाता में घर का ठामड़ा-ठिकरा सब रो हिसाब वई जाए , ने ऐरी मां ने, वेरी मां ने,  वणी री मां री मां सब कथा-पुराण चालू वई जाएsss ।

पण आदमी लोगा रो ऐसो नी है, आदमी लोग मले जद केsss तो खावा पिवा री बात करें, औऱ नी तो फेर ज्ञान को रायतो खूब फैलावे । सब एक दूसरा से परम ज्ञानी वतड़ावा की खूब कोशिश करे । पर आपणा ने भी मालम रे के कुण कतरो चतरो है ।  है के नी ।

चाय गटकी रा था,वाता चाली री थी,  अतरे हमारा भेरूलाल भाईसाहब के हाथ अखबार लग ग्यो, जिनमें लिख्यों थो के

होशंगाबाद की तर्ज पर झाबुआ में भी बनेगा अनुभूति पार्क ।

भाई ए पढ़यो ने सब ने बताड़ियो, बस फेर कईं ढुलवा लागो रायतो….एक हमारो व्यास जी दादो बोल्यो कि ई तो सब लोगा ने बेवकुफ बणावा री स्कीम है, सब पैसा खईजागा, बापड़ा जो शरीर ती लाचार है वणा रा प्रमाण पत्र बणी नी रा, वी रोज कलेक्टर ऑफिस रा चक्कर काटी रा, कणी ने पेंशन नी मली , तो कोई दिव्यांग आदमी,  रोजी-रोटी हारू लोन लेवा पक्तियां ऊपर नीचे चढ़ी रो उतरी रो । सब फालतू वात है । लोगा हारू शहर मे एक भी बगीचों ढंग को कोनी, सरकार ने वा हमज नी पड़ री, ने गाम बारते नवा सर ती काम करेगा । लोग कई गेलिया है ।

अतरा में हमारा एक और परम ज्ञानवान पाटीदार बा बोल्या, व्यास जी तम रेवा दो, ऐसो नी है, वात तो या है कि दिव्यांग हारू काम करवा पर होशगांबाद वारा कलेक्टर ने दिल्ली में ईनाम मल्यो, तारीफ बी खूब वी ।  तो आपना या रा भी अधिकारी होची रा कि आपणे वणी की नकल करी ने थोड़ो तो सरकारी कागजिया में थोड़ो हाऊ काम लिखाड़ी दां, गाम री जनता यूं भी आपणे चाई नी री,  मन् तो लागे की  अणा साबड़ा रे पछाड़ी दो तीन गरम केटलिया है , वणाएज या स्कीम वताड़ी वेगा ।

हमारा भेरू बा के वात गले नी उतरी, बोल्या कि नाम कमाणो है तो अतरो खर्चो करवा की कई जरूरत, आपणे झाबुआ में कतरा बगीचा है, एक भी काम रो नी रेवा द्यो नगरपालिका ऐ । अणामें से कोई अनुभूति पार्क वणई तो कई तकलीफ । सिटी री थोड़ी शान भी आई जाएगा । ने  जनता रो आदो पईसो भी वंचेगा ।

वच में पाटीदार बा बोल्या अरे मैं तो कू के कई जरूरत है अनुभूति पार्क वणावा री, पेला वणा लोगों री जो मैन जरूरत है वी तो पूरी करो, हाल मालम कोनी कि आपणा जिला में कतरा दिव्यांग जणा है, ई लोग के के 8 हजार वेगा , अतरा लोग आया अनुभूति शिविर में, पर या वात मानवा में आवे कई कि जिला में अतरा ज दिव्यांग है, कतराई  लोगा ने तो हाल मालम कोनी की वणा वस्ते कई योजना है, हाल तक लोगों ने साईकिला नी वांटी, दूसरो सामान नी मल्यो , प्रमाण पत्र हारू लोग अई-वई रोज चक्कर काटे, रंगपुरा जावे तो के, ऑफिस में जाओ, ऑफिस में जावे तो के जनपद जाओ, जनपद जावे तो के सचिव ती मिलो, सचिव के के मार कने कई कोनी बाबाजी रो ठुल्लू, तम झाबा जाओ ।  अरे सब चक्कर पे चक्कर है व्यास जी सई कई रा । ई सब ऊंट पर बैठी ने बकरी चरावे साब । आगे-पाछे रो कणी ने ध्यान कोनी ।

व्यास जी बोल्या वच में, दूसरा का दुख में आपणे क्यों दुबला वरी रा यार भईसाब, जणी ने कमीशन मिलनो वेगा मिलेगा, जणी ने फायदों उठाणो वेगा उठावेगा, अनुभूति पार्क वणनो वेगा तो वणेगा, आज कठे वणी रो ।

पाटीदार बा बोल्या के- पर भईसाब आपणे तो वात करी रा, किने केवा थोड़ी जाई रा कई, ने कूण हुणेगा आपणी, या तो वात निकरी तो सब ए आपणो-आपणो सजेशन रखी दिदो ।  पर एक वात है कि अणी पार्क से ज्यादा जरूरी वणा रो सामान और पेंशन है, उ टाईम पर मिलनो चीये पर कां मली रो, अबे रेवा दो नरी वाता है…दन उगी जागा,  आपणे घर चालो पूणा ग्यारा (10.45 ) वईगी, घरे लोगई दरवाजो नी खोलेगा तो पड़ता पाणी में कां जावंगा ।