अन्नदाता तेरा दर्द ना जाने कोई…

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देश की अर्थव्यवस्था और देश की आबादी में सबसे ज्यादा हिस्सेदारी किसान की है । लेकिन किसानों का शोषण ही सबसे ज्यादा होता है । कभी सिस्टम ये शोषण करता है, कभी व्यापारी और रही सही कसर प्रकृति पूरी कर देती है । ग्रामीण इलाकों में जाने पर, किसानों से बात करने पर ये भ्रम भी दूर हो जाता है कि कृषि प्रधान देश में खेती को लाभ का धंधा बनाने की कोशिश की जा रही है ।

देश बहुत बड़ा क्षेत्र हो जाता है, अगर झाबुआ जिले से ही किसान के हालातों को समझने की कोशिश करें,तो साफ हो जाएगा कि अनाज के लिए पसीना बहाने वाले किसान का किस तरह से खून चुसा जाता है ।

झाबुआ में कृषि विभाग समय-समय पर किसानों के लिए सलाह देता है, लेकिन किसानों तक कितनी पहुंच पाती है , इसकी साथर्कता कितनी है किसान से मिलिए वो खुद ही बता देगा । ताजा बात करें तो कृषि विभाग ने पीआरओ के जरिये किसानों को सलाह दी है कि लाइसेंसधारी व्यापारी से खाद खरीदें, खाद का बिल भी लें, और अधिक मूल्य मांगे जाने पर विभाग को को शिकायत करें ।

अब यहीं से पता चलता है कि किसानों के लिए बना ये विभाग किसानों की जमीनी हकीकत से कितना दूर है, कृषि विभाग के अधिकारियों से निवेदन हैं कि आपने जो सलाह दी है उसके साथ लाइसेंसधारी व्यापारियों की सूची भी जारी कर देते तो क्या ये किसानों के लिए बेहतर नहीं होता, किसान किस- किस से सर्टिफिकेट मांगने जाएगा । दूसरी बात आपको पता ही नहीं है किसानी 80 से अधिक और झाबुआ जैसे जिले में 95 प्रतिशत खेती क्रेडिट पर की जाती है । किसान व्यापारी से खाद , बीज, दवा सब खरीदता है, लेकिन उधारी पर । ऐसे में व्यापारी जो देता है, उन्हें वो लेना पड़ता है । जहां उसने लाइसेंस मांगा, उसी वक्त व्यापारी उसे दुकान से बाहर कर देगा । इसी मजबूरी का फायदा उठाकर व्यापारी किसानों को एक्सपायरी डेट की कीटनाशक दवा भी थमा रहे हैं । लेकिन आपका मैदानी अमला ये तमाशा देख रहा है, आपके निरीक्षण अधिकारियों के पास ये सूचना होगी, नकली खाद बीज की खबरें भी सामने आई हैं, लेकिन पिछले सालों में उंगलियों पर गिनी जा सकने वाले कार्रवाई के अलावा कुछ नहीं है ।

जिले का गरीब किसान, व्यापारी के पास जाने के लिए मजबूर हैं,क्योंकि जेब में पैसा नहीं है, और सरकार किसान की जरूरत की हिसाब से खाद-बीज-दवा नहीं पहुंचा पा रही है । किसान को जरूरत 5 क्विंटल बीज की होती है, सोसायटी एक किसान को 2 क्विंटल बीज भी नहीं दे पा रहा है । मजबूरन किसान उसी व्यापारी के पास जाता है । जब किसान को बार-बार काम उसी व्यापारी से पड़ना है, तो उससे बैर क्यों लेगा । यही कारण है कि खेती-किसानी की सामग्री ज्यादा कीमत चुकाने के बाद भी किसान खामोश रहता है ।

एक बात और कि किसान क्यों बताएं कि उसका शोषण हो रहा है, आपके विभाग की नैतिक जिम्मेदारी नहीं है कि इस समय सतत मॉनिटरिंग करें, किसानों को भरोसे में ले, कार्रवाई करें, आप तक सूचना पहुंचाने से किसान उस खाद बीज से भी वंचित रह जाएगा जो समय पर उसे उधार में मिल जाता है । ये काम तो आपको ही करना पड़ेगा ।

तो आप बताईये एक तरफ सरकार किसानों की मांग पूर्ति नहीं कर पा रही है, दूसरी और व्यापारी है जो किसान को उनकी मनचाही सामग्री देने को तैयार है लेकिन अपनी शर्तों पर । बताईये किसान किधर जाए और क्या करें ।

किसानों की दशा विज्ञापनों और किताबी दावों से नहीं सुधरने वाली  है । इसके लिए जमीन पर काम करना होगा, ये दो स्थितियों इन दोनों ही हालातों को कृषि विभाग और सरकार जितनी सक्रियता  और गंभीरता से लेगी,किसानों को उतना ज्यादा फायदा होगा ।  किसान के लिए भगवान सरकार या प्रशासन नहीं है, किसान के लिए भगवान प्रकृति और व्यापारी हैं , जो उसे उसकी खेती किसानी का सामान देते हैं, दोनों रूठे तो फिर खेती मौजूदा हालतों में संभव नहीं है, क्योंकि आपकी सरकार प्रकृति और व्यापारी से मिलने वाली सुविधाओं का इंतजाम नहीं कर सकती । तालाब और सिंचाई साधनों पर भी बात होगी क्योंकि कृषि प्रधान देश में किसानों की कई बातें, कई समस्याएं हैं । अन्नदाता जो सब कुछ सहकर भी सबका पेट भर रहा है, उसका दर्द कोई नहीं समझ पा रहा है, ना व्यापारी, ना शासन-प्रशासन और ना ही अन्न का उपभोग करने वाले लोग । उम्मीद है कुछ ऐसा देखने को मिलेगा जिससे किसानों को लगे की उनके लिए भी कोई है । वरना बाकी तो जो है सो है ही ।

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19 जुलाई से झाबुआ में जमकर बरसेंगे बदरा, मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान ।

m2झाबुआ पोस्ट । के. उपाध्याय की रिपोर्ट ।  मानूसन के देश में अलग-अलग रूप नजर आ रहे हैं, कहीं बदरा जमकर बरस रहे हैं तो कही अब भी बेसब्री से इंतजार हो रहा है । झाबुआ जिले की बात करे तो यहां मानसून की खेंच से किसान ही नहीं आमजन भी चिंतित है ।  फसलें मुरझा रही है, अगर जल्द बारिश नहीं हुई तो दोबारा बोवनी भी करनी पड़ सकती है ।

 ऐसे हालातों में अच्छी खबर ये हैं कि जिले में जल्द ही जोरदार बारिश की  संभावना है । मौसम विज्ञान केन्द्र के तकनीकी सलाहकार डॉ. त्रिपाठी के मुताबिक उड़ीसा और बंगाल की खाड़ी में दबाव बन रहा है, 19-20 जुलाई से जिले में जोरदार बारिश की संभावना है ।

   बारिश की खेंच से लोगों की चिंताएं बढ़ा दी हैं । जिले की अर्थव्यवस्था में मानसून और फसल दो अहम पहलू हैं । मानसून अच्छा तो फसल भी अच्छी और उसके बाद व्यापार भी । लेकिन मानसून की बेरूखी ने किसानों और व्यापारियों के माथे पर सिकन ला दी है । आधा आषाड़ बीत चुका है, पंद्रह दिन बाद श्रावण मास शुरू हो जाएगा । लेकिन अब तक धरती प्यासी है । पूरे जिले में बोवनी की जा चुकी है, ऐसे में फसलों के मुरझाने का खतरा मंडरा रहा है ।

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उड़ीसा और बंगाल की खाड़ी में सिस्टम बन रहा है । 19 जुलाई के आसपास जिले में जोरदार बारिश के आसार हैं । पहले बंगाल की खाड़ी में बनने वाला सिस्टम जिले में दस्तक दे सकता है । डॉ. आर.के.त्रिपाठी, मौसम वैज्ञानिक

बारिश के लिए लोग तरह के जतन कर रहे हैं, कहीं घरों के बाहर भोजन पकाकर उजमनी मना रहे हैं , तो कहीं हनुमान चालीसा का पाठ किया जा रहा है । इंद्र देवता को मनाने के लिए हवन भी किए जा रहे हैं । कुछ जगहों पर  बारिश के लिए भगवान शिव को ही जलमग्न कर दिया । तो कहीं बारिश के टोटके के रूप में जिंदा आदमी की अर्थी निकाली जा रही है  ।  अच्छा मानसून ही जिले की अर्थव्यवस्था की रीढ़ की हड्डी है । मानसून की बेरूखी अंचल में चोरी, लटू जैसी आपराधिक गतिविधियों को बढ़ा सकती है । पिछले एक माह में कई बड़ी बारदातें हो भी चुकी हैं । फिलहाल तो इस वक्त हर नागरिक यही उम्मीद कर रहा है जो अनुमान मौसम वैज्ञानिक लगा रहे हैं उसके मुताबिक बरसात हो जाए तो मुरझाई फसलों से साथ-साथ मुरझाए चेहरों पर भी रौनक लौट आएगी ।  

अब तक जिले में 245941.00 क्विंटल गेहूं खरीदा गया

imagesझाबुआ पोस्ट । जिला आपूर्ति अधिकारी  खान ने बताया कि जिले में 21 खरीदी केन्द्रो पर किसानो से 25 मार्च से खरीदी प्रारंभ की गई है। अब तक जिले में 245941.00 क्विंटल गेहॅू सरकार द्वारा घोषित समर्थन मूल्य 1450 रू. प्रति क्विंटल की दर से खरीदा गया एवं किसानो को ई. पेमेट के माध्यम से 356769600.00 रूपये का भुगतान किया गया। अब तक कुल 242580.00 क्विंटल गेहूॅ का परिवहन कर भण्डार ग्रह तक पहुचा दिया गया है।             जिले में समर्थन मूल्य पर गेहूॅ उपार्जन 26 मई 2015 तक किया जाएगा। रबी विपणन वर्ष 2015-16 के लिए गेहूॅ का समर्थन मूल्य 1450 रू. प्रति क्ंिवटल घोषित किया गया है। किसानो से अपील की गई है कि वे अपना गेहूॅ सुखाकर एवं छन्ना लगाकर ही खरीदी केन्द्र पर लाये।

संदला  में जल्द शुरू होगा रेशम उत्पादन केन्द्र

IMG_20150128_15193528 जनवरी झाबुआपोस्ट ।  कल्याणपुरा के समीप स्थित ग्राम संदला में रेशम उत्पादन केन्द्र में रेशम कीट पालन के लिए खेत तैयार किये जा रहे है। रेशम कीट पालन के लिए खेत में शहतूत के पौधों की कलम लगाई जा रही है। शहतूत की कलम से पौधे जुलाई माह तक रेशम की खेती के लिए तैयार हो जाएगे।

कलेक्टर बी.चन्द्रशेखर ने सिखाया कलम को काटना

शहतुत के पौधो को तैयार करने के लिए कलम काट रहे मजदूरों को आज 28 जनवरी को केन्द्र के निरीक्षण के दौरान कलेक्टर श्री बी चन्द्रशेखर एवं मुख्य कार्यपालन imagesअधिकारी जिला पंचायत श्री धनराजू एस ने देखा। कुछ मजदूर कलम को तीरछा नहीं काट रहे थे। कलम के जल्दी से पौधा बनने के लिए उसे तीरछा काटना जरूरी होता है। कलेक्टर एवं सीईओ जिला पंचायत ने मजदूरों को कलम काटने का प्रशिक्षण दिया।

एमपीआर एलएम के समूह जुडेगे रेशम उत्पादन से

निरीक्षण के दौरान कलेक्टर श्री बी.चन्द्रशेखर ने रेशम की खेती के लिए एमपीआरएलएम के समूहो को प्रेरित कर रेशम उत्पादन से जोडने के लिए सीईओं जिला पंचायत को निर्देशित किया। आसपास के गाॅवों के लगभग 500 किसान रेशम उत्पादन ईकाई से जुडकर उत्पादन करेगे। इसके लिए रेशम विभाग, हितग्राही एवं बैंक लोन के माध्यम के कार्यवाही की जाएगी बैंक लोन के लिए रेशम विभाग को पहल करने के निर्देश कलेक्टर ने दिये।

जिस गांव में अत्यधिक माइग्रेशन होता है, उस गांव में यदि किसान के पास एक एकड जमीन है, तो रेशम की खेती से जोडने पर अत्याधिक फोकस किया जाये। रेंशम उद्योग से जोडने के लिए किसान को कुआॅ, रेशम कीट पालन के लिए शेड एवं तकनिकी प्रशिक्षण दिया जाये। एवं रेशम केन्द्र के लिए चैकी सेन्टर बनाने के लिए रेशम विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिये।