झाबुआ में मंत्री विश्वास सारंग ने फहराया तिरंगा, ली परेड की सलामी!

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झाबुआ में सहकारिता राज्य मंत्री और जिले के प्रभारी मंत्री विश्वास सारंग ने ध्वजारोहण किया…ध्वजारोहण के बाद विश्वास सांरग ने परेड का निरीक्षण कर, मुख्यमंत्री के संदेश का वाचन किया. पहले से तय कार्यक्रम के अनुसार विश्वास सारंग राजगढ़ जिले में ध्वाजारोहण करने वाले थे लेकिन लेकिन बाद में कार्यक्रम बदलाव हुआ और विश्वास सांरग ने झाबुआ पुलिस लाईन मैदान पर आयोजित स्वतंत्रता दिवस समारोह में भाग लिया.समारोह झाबुआ विधायक शांतिलाल बिलवाल, पेटलावद विधायक निर्मला भूरिया , बीजेपी जिलाध्यक्ष दौलत भावसार समेत कई
गणमान्य नागरिक, आम जनता और बड़ी संख्या विभिन्न शैक्षणिक संस्थाओं के छात्र-छात्राएं शामिल थे ।

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लोकायुक्त छापा !महिला कर्मचारी 5 हजार की रिश्वत लेते रंगहाथों पकड़ाई ।

झाबुआ में लोकायुक्त की टीम ने एक महिला कर्मचारी को 5 हजार की रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा है…पकड़ी गई महिला कर्मचारी का नाम  तारा सिंगाडि़या है जो एकीकृत बाल विकास विभाग के परियोजना अधिकारी कार्यालय में सहायक ग्रेड तीन के पद पर थी…तारा सिंगगाड़िया ने गेहलर बड़ी गांव की आंगनवाड़ी सहायिका पूना भाबोर से 10 हजार की रिश्वत की मांग थी.जिसके बाद पूना के बेटे साधू भाबोर ने लोकायुक्त में शिकायत की.जिसके बाद आज लोकायुक्त टीम ने तारा सिंगाड़िया के घर पर ही 5 हजार की रिश्वत लेते हुए रंग हाथ पकड़ा. 5 हजार रूपए राखी के बा देने की बात तय हुई थी । दरअसल पूना भाबोर की उम्र 59 वर्ष है., लेकिन सेवा समाप्ति के एक वर्ष पहले ही आंगनवाड़ी सहायिका को नौकरी से निकालने का डर दिखाकर पैसों की मांग कर रही थी ।

PM की सभा से लौटने की जल्दी में हो रहे हैं हादसे, दो बस पलटी !

jhabuapost@gmail.com | nirmal pandya, Ranapur | Ankit chouhan, Para |

भाबरा में आयोजित प्रधानमंत्री की सभा में झाबुआ अलिरापुजर जिलो के अलावा पडोसी जिलों से भी लोग देखने सुनने पहुंचे थे । लेकिन अब  कार्यक्रम खत्म होने के बाद लौटने की जल्दी में ऐसे वाहन सड़क हादसों को जन्म दे रहे हैं । दो अलग-अलग घटनाओं दो यात्री बसें पलटी खा गई हैं । रानापुर के पास रूपखेड़ा में एक यात्री बस पलटी खा गई  । बताया जाता है कि बस रतलाम जिले के रावटी जा रही थी । बस में 22 यात्री सवार थे, हादसे में को गंभीर घायल नहीं हुआ है लेकिन मामूली चोटें आई हैं ।

दूसरी घटना पारा के पास रातीमाली रोड़ की है जहं एक और यात्री बस बेकाबू होकर पलट गई , बस में 25 यात्री सवार थे जो धार जिले के घाटोदा पंचायत से आए थे । घटना में 6 लोग घायल बताए जा रहे हैंं । घटना की सूचना मिलने के बाद पारा पुलिस चौकी की टीम मौके पर पहुंच चुकी है । वहीं खबर लगते ही झाबुआ एसडीओपी एसआर परिहार और झाबुआ कोतवाली थाना प्रभारी आर सी भास्करे भी मौके पर पहुंच चुके हैं , राहत और बचाव कार्य को तेज कर दिया गया है । घायलों को प्राथमिक उपचार दिया जा रहा है ।

महिला का शव 5 दिन तक करता रहा पति का इंतजार, संवेदनहीनता की पूरी कहानी, आपको झकझोर देगी ।

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9 अगस्त को देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी चद्रशेखर आज़ाद नगर भाबरा में जरा याद करो कुर्बानी कार्यक्रम में भाग लेने आ रहे हैं, आज़ादी मिले हमें 70 साल जो हो रहे हैं उसी का जश्न अलग-अलग जगह मनाया जाना है, लोगों में देशभक्ति की भावना का संचार करना है । लेकिन सरकार और सरकार के अधिकारियों में इस देशभक्ति की भावना ज्यादा जरूरी और ये इस तरह के कार्यक्रम से नहीं आएगी, ये आएगी  आम लोगों की समस्याओं और उनके दुख दर्द में शामिल होने से, आम आदमी की परेशानी को अपनी परेशानी समझने से । आम आदमी की बात जब सरकारी दफ्तरों में ध्यान से सुनी जाने लगेगी तो फिर सुराज आएगा । फिर गर्व भी होने लगेगा की मेरा देश महान है, यहां किसी गरीब, किसी मजबूर , किसी बेसहारा का आवाज कहीं गुम नहीं होती बल्कि किसी समाधान तक पहुंचती है । इस स्वीकारोक्ति के लिए कोई कार्यक्रम की जरूरत नहीं होगी . लोग अपने आप बोलगें, सरकारों के जयकारे लगाएगें, साहेब और मामा के भी खूब गुण गाएंगे लेकिन वो दिन अभी दूर है ।

शायर अदम गौंडवी ने क्या खूब कहा है कि

तुम्हारी फाइलों में गांवों का हाल गुलाबी है ।

ये आकड़े झूठे हैं, ये दावे किताबी हैं ।

आम आदमी की बेहतरी को लेकर लाख दावे हो लेकिन झाबुआ जिले में की एक घटना ने सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या वाकई बड़ी कुर्सियों  पर बैठे लोगों को आम जनता से कोई मतलब है भी या नहीं । झाबुआ के सातसेरा गांव  में एक महिला की मौत के बाद उसका शव 5 दिन तक घर में रखा रहा, परिजन महिला के पति के आने का इंतजार करते रहे लेकिन सरकारी कागज के अभाव में पति अपनी पत्नी के अंतिम संस्कार में नहीं पहुंच सका । सरकारी कागज कई दफा दब जाते, टोकरी में पहुंच जाते हैं, लेकिन ये घटना शर्मसार करने वाली है, परिजनों का आरोप है  कि गुहार, आवेदन लगाने के बाद भी संवेदहीन झाबुआ प्रशासन एक पत्र न लिख सका ।

महिला का नाम संम्बुड़ी बाई जिसकी लंबी बीमारी के चलते रविवार को मौत हो गई । महिला का पति रेवसिंह मेड़ा अलग-अलग अपराधों में इंदौर सेंट्रल जेल में उम्रकैद की सजा काट रहा है । अंतिम संस्कार के लिए इंदौर सेंट्रल जेल ने झाबुआ कलेक्टर के पत्र के बिना रेवसिंह को उसके गांव ले जाने से मना कर दिया । परिजनों का कहना है कि  सोमवार को कलेक्टर और एडिशनल एसपी सीमा अलावा को उन्होंने आवेदन पत्र दिया था । कलेक्टर से परिजनों की सीधी बात नहीं हो पाई क्योंकि आम लोगों से मैडम कम ही इत्तेफाक रखती हैं, आवेदन बाबु को दिया और फिर शायद वो आवेदन किसी रद्दी की टोकरी में जा पहुंचा होगा । लेकिन झाबुआ प्रशासन की इस संवेदहीनता के चलते परिवार में खासा गुस्सा है । रेवसिंह के भाई कहते हैं कि हमारी कहीं सुनवाई नहीं हुई । 5 दिन तक शव को रखना मजबूरी थी, क्योंकि भाई ने कहा था कि वो अंतिम संस्कार में जरूर आएगा ।

रेवसिंह के 6 बच्चे हैं…सबसे बड़ा बेटा भी झाबुआ जेल में हैं…जबकि दो बच्चों की मौत इसी साल पानी में डूबने से हो गई…अब तीन छोटे बच्चे हैं..जिनके ऊपर ना पिता का हाथ है और ना ही मां का साया….रेवसिंह के भाई ने एडिशनल एसपी सीमा अलावा से भी गुहार लगाई लेकिन नतीजा सिफर ही रहा । 5 दिन तक सम्बुड़ी का शव घर में रखा रहा…लोगों ने लकड़ी की पेटी में बर्फ से सुरक्षा करने की कोशिश भी लेकिन शव गलता रहा और उसकी बदबू भी बढ़ती रही….गुरूवार सुबह इंदौर सेंट्रल जेल में बंद रेवसिंह भी हिम्मत हार गया और सुबह 9 बजे अपने भाईयों से कहा कि उसका आना मुश्किल है,पत्नी का अंतिम संस्कार कर दिया जाए…जिसके बाद गुरूवार शाम को संम्बुड़ी का अंतिम संस्कार किया गया वो भी पूरे पांच दिन बाद…इस बीच रेवसिंह का परिवार कलेक्टर कार्यालय और एसपी कार्यालय के चक्कर काटता रहा,  गुहार लगाता रहा लेकिन आम आदमी का कागज साहब लोगों की अकड़ के आगे टीक ना पाया । कलेक्टर के व्यवहार को लेकर लोगों में गुस्सा है, चाहते हैं कि यहां से तबादला भी हो जाए लेकिन आम आदमी का कागज रद्दी की टोकरी में पुहंच जाता है और उसकी आवाज गुलाबी भवन की दीवार से टकराकर ही खामोश हो जाती है ।

 

दिल्ली का दंगल

modi-kejriwal-rahul– आलोक कुमार –
दिल्ली विधानसभा चुनाव ‘आप’ के लिए अस्तित्व का प्रश्न  बन गया है। यही वजह है कि देश भर की  ’आपियों’ टीम भी दिल्ली चुनाव में जुट गई है।  ’आप’ कार्यकर्ता दिल्ली के वोटरों के फोन की घंटी बजा रहे हैं , वे कॉल करके ‘आप’ को वोट देने की अपील कर रहे हैं। दिल्ली जाने वाली हर ट्रेन और बस में ‘आप’ के कार्यकर्ता पर्चे बांट रहे हैं। कुछ सीधे दिल्ली पहुँचकर वहाँ घर-घर संपर्क से लेकर केंद्रीय कार्यालय की बागडोर संभाले हुए हैं।परिणाम तो भविष्य के गर्त में छुपा है या प्रचलित शब्दों में कहूँ तो जनता के हाथों में है लेकिन ‘आप’ भाजपा को ललकारती तो अवश्य ही दिख रही है , ‘सैद्धांतिक लोकतान्त्रिक’ अवधारणा के लिए ये शुभ-संकेत तो अवश्य ही l

सबसे असमंजस की स्थिति तो कॉंग्रेस में है “लोकसभा चुनाव और उसके बाद तेजी से राज्य दर राज्य हारती जा रही कॉंग्रेस ने दिल्ली चुनाव में भाजपा को नहीं, बल्कि आम ‘आप’ को टारगेट करने की रणनीति बनाई है। राजधानी में सियासी टारगेट बदलकर कॉंग्रेस खुद को उबारने का नहीं, बल्कि आप को तीसरा विकल्प बनने देने से रोकना चाहती है। यही वजह है कि पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने दिल्ली चुनाव प्रभारी अजय माकन को मोदी के नेतृत्व वाली भाजपा को नहीं, केजरीवाल की ‘आप’ को निशाने पर रखने के निर्देश दिए हैं। आज की परिस्थितयों में काँग्रेस शायद ये मान कर चलाने को विवश है कि भाजपा से सीधे तौर पर मुक़ाबला करना उसके वश की बात नहीं है और चुनावों में जीत के लायक खुद को फिर से तैयार करने के लिए अभी अनुकूल समय नहीं है और सबसे पहले अपनी खो चुकी साख व बिगड़ती छवि को दुरुस्त किया जाए  l काँग्रेस  की इस रणनीति के पीछे शायद  ये मकसद भी काम कर रहा हो “जनता को इस सोच से बाहर निकाला जाए  कि भ्रष्टाचार के हरेक मामले और जनता की हर मुसीबत के लिए काँग्रेस ही जिम्मेदार है।”  इस संदर्भ में काँग्रेस की ये रणनीति कुछ हद तक व्यावहारिक भी दिखती है क्यूँकि ‘आप’ आज भी भ्रष्टाचार के मुद्दों पर भाजपा से ज्यादा आक्रामक रवैया अपनाए हुए है l सूत्रों के मुताबिक एक अंदरूनी वजह ये भी  है कि “यदि ‘आप’ को दिल्ली में इस बार सरकार बनाने का मौका मिल गया  तो भ्रष्टाचार के मुद्दों पर ‘आप’ काँग्रेस के लिए अवश्य ही बड़ी मुसीबतें खड़ी करेगी ,  यही वजह है कि धुर विरोधी भाजपा को छोड़कर महज एक साल पुरानी ‘आप’ को दिल्ली चुनाव में निशाना बनाने में ही काँग्रेस अपनी ‘भलाई’ समझ रही है l”

4 करोड़ पोर्न वेबसाइट्स किस-किस को बंद करें- केन्द्र सरकार

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सुप्रीम कोर्ट में पोर्न साइट्स के खिलाफ दायर याचिका पर केन्द्र सरकार ने अपना जबाव देते हुए कहा कि 4 करोड़ से ज्यादा पोर्न साइट हैं । एक बंद करते हैं तो दूसरी खुल ज्यादा है । सब पर प्रतिबंध नहीं लगा सकते । कोर्ट ने कहा कि ‘टेक्नोलॉजी चमत्कार कर सकती है, वह विनाश भी कर सकती है। केंद्र सरकार पोर्न वेबसाइट्स, खासतौर से चाइल्ड पोर्न से जुड़ी वेबसाइट्स को ब्लॉक करने के लिए प्रभावी कदम उठाए।’ हालांकि सरकार ने कहा है कि इस पर काम जारी है। साथ ही सरकार  ने ये भी जानकारी की सरकार विदेश में स्थापित सर्वरों को भारत में लाने की कोशिश कर रही है । ताकी इस काम में तेजी लाई जा सके ।  उधर याचिकाकर्ता का कहना है कि पिछले 18 महीनों में सरकार ने एक भी ऐसी वेबसाइट को ब्लॉक नहीं किया है ।