मध्य प्रदेश के झाबुआ जिले में स्वास्थ्य सुविधाओं की बदहाल स्थिति फिर उजागर हुई है। ताजा मामला करवड़ प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का है, जहां एक आदिवासी महिला प्रसव के लिए पहुंची, लेकिन डॉक्टर ने इलाज करने से इनकार कर दिया।
इलाज के लिए किया मना, परिजन हुए परेशान
मरीज के परिवार का कहना है कि डॉक्टर ने बिना किसी ठोस कारण के प्रसूता को भर्ती नहीं किया और इलाज करने से इनकार कर दिया। मजबूर होकर परिवार को महिला को पेटलावद के निजी अस्पताल ले जाना पड़ा, जहां अब उसका इलाज चल रहा है।
पहले भी डॉक्टर पर लग चुके हैं आरोप
गड़बड़ स्वास्थ्य केंद्र में पदस्थ डॉ. विमला सिंगार पर पहले भी मरीजों को इलाज से वंचित करने और अनदेखी करने के आरोप लग चुके हैं। कई बार शिकायतों के बावजूद स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।
प्रशासन कब लेगा एक्शन?
झाबुआ जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की लचर व्यवस्था का यह कोई पहला मामला नहीं है। सरकार की स्वास्थ्य योजनाएं कागजों पर तो बेहतर दिखती हैं, लेकिन ग्रामीण इलाकों में मरीजों को अब भी इलाज के लिए भटकना पड़ रहा है।
सवाल यह है कि क्या प्रशासन इस बार कोई सख्त कदम उठाएगा या फिर गरीबों की आवाज़ यूं ही दबा दी जाएगी?
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