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Delhi Mumbai Expressway : 120 की रफ्तार से दौड़ रही थीं गडकरी के काफिले की गाड़ियां, अचानक सामने आ गए ग्रामीण

Delhi Mumbai Expressway: सिस्टम की नींद हमेशा किसी बड़े हादसे के बाद ही क्यों टूटती है? दिल्ली-मुंबई 8-लेन एक्सप्रेसवे पर रतलाम और झाबुआ के हिस्से में जो कुछ भी हुआ, उसने पुलिस और प्रशासन के ‘कड़ी सुरक्षा’ वाले दावों की धज्जियां उड़ा कर रख दी हैं। जरा सोचिए! 120 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से…

Delhi Mumbai Expressway nitin gadkari

Delhi Mumbai Expressway: सिस्टम की नींद हमेशा किसी बड़े हादसे के बाद ही क्यों टूटती है? दिल्ली-मुंबई 8-लेन एक्सप्रेसवे पर रतलाम और झाबुआ के हिस्से में जो कुछ भी हुआ, उसने पुलिस और प्रशासन के ‘कड़ी सुरक्षा’ वाले दावों की धज्जियां उड़ा कर रख दी हैं।

जरा सोचिए! 120 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवा से बातें कर रहा केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का काफिला और अचानक एक्सप्रेसवे के बीचों-बीच मौत से बेखौफ खड़े हो जाएं कुछ ग्रामीण! गनीमत रही कि ड्राइवरों का संतुलन नहीं बिगड़ा, वरना गाड़ियां आपस में टकरा जातीं और मंत्री से लेकर आला अफसरों तक को इस भारी चूक का खामियाजा चुकाना पड़ सकता था ।

Delhi Mumbai Expressway nitin gadkari

Delhi Mumbai Expressway पर हादसा टला, प्रशासन के छूट गए पसीने

घटना रतलाम के शिवगढ़ थाना क्षेत्र की है। केंद्रीय मंत्री गडकरी अपने दौरे के दूसरे दिन मंदसौर के गरोठ से झाबुआ की तरफ आ रहे थे। पूरे रूट पर आम यातायात रोक दिया गया था, चप्पे-चप्पे पर पुलिस तैनात थी।

  • फिर भी, 120 की तूफानी स्पीड से दौड़ रहे वीआईपी (VIP) काफिले के ठीक सामने अचानक कुछ लोग आ गए।
  • ब्रेक लगे, चीख-पुकार मची और गनीमत रही कि काफिले की गाड़ियां आपस में भिड़ने से बाल-बाल बच गईं।
  • एक बहुत बड़ा हादसा होते-होते टल गया, लेकिन इसने प्रशासन के पसीने छुड़ा दिए।

आखिर 120 की रफ्तार के सामने क्यों कूदे ग्रामीण?

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि अपनी जान हथेली पर रखकर कोई 120 की स्पीड से आती गाड़ियों के सामने क्यों कूदेगा? शौक से तो नहीं!

दरअसल, इस चमकते हुए 8-लेन एक्सप्रेसवे के निर्माण ने इन ग्रामीणों की जिंदगी नर्क बना दी है।

  • ग्रामीणों के संपर्क मार्ग (रास्ते) बंद कर दिए गए हैं।
  • निर्माण के कारण खेतों में जलभराव (पानी भरने) की गंभीर समस्या पैदा हो गई है।
  • जब स्थानीय प्रशासन के बहरे कानों तक इन किसानों की आवाज नहीं पहुंची, तो अपनी शिकायतें मंत्री जी को सौंपने के लिए वे बेबस होकर एक्सप्रेसवे पर आ गए। विकास की इस अंधी दौड़ में, किसान की बर्बादी किसी को नजर क्यों नहीं आती?

अब रतलाम पुलिस तलाश रही कौन थे वो

जैसे ही यह भारी सुरक्षा चूक हुई, पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। जो पुलिस पहले सुरक्षा नहीं कर पाई, वो अब वीडियो फुटेज खंगाल कर उन ग्रामीणों को तलाश रही है।

  • रतलाम एएसपी विवेक कुमार लाल का कहना है कि काफिले के आने से पहले स्थानीय लोगों से ज्ञापन ले लिया गया था। अब पुलिस यह जांच कर रही है कि जब ज्ञापन ले लिया था, तो अचानक काफिले के सामने कौन लोग कूद पड़े?

सवाल ग्रामीणों के कूदने का नहीं है, सवाल यह है कि वीआईपी मूवमेंट के दौरान इतनी बड़ी चूक हुई कैसे? अगर आज कोई अनहोनी हो जाती, तो यह कागजी प्रशासन किसे जिम्मेदार ठहराता? खेतों में डूबती फसल और वीआईपी काफिलों की उड़ती धूल के बीच आम आदमी पिस रहा है।

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संस्थापक और संपादक है, 15 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं । नेशनल,रीजनल चैनल में रिपोर्टिंग का अनुभव । डिजिटल पत्रकार के रूप मे भी सक्रिय हैं.

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