Thandla Hospital: एसडीएम का का निरीक्षण! अस्पताल की बुझी प्यास, जिम्मेदारों की लगी क्लास

Thandla Hospital में सालों से पेयजल के भारी संकट से जूझ रहे मरीजों और स्टाफ की प्यास आखिरकार बुझ गई है। सरकारी अस्पतालों की बदहाली और सिस्टम की सुस्ती के बीच जब थांदला एसडीएम भास्कर गाचले ने आम जनता की तकलीफों को अपना समझकर एक्शन लिया, तो तस्वीर बदलते देर नहीं लगी। एसडीएम के एक…

Thandla Hospital SDM

Thandla Hospital में सालों से पेयजल के भारी संकट से जूझ रहे मरीजों और स्टाफ की प्यास आखिरकार बुझ गई है। सरकारी अस्पतालों की बदहाली और सिस्टम की सुस्ती के बीच जब थांदला एसडीएम भास्कर गाचले ने आम जनता की तकलीफों को अपना समझकर एक्शन लिया, तो तस्वीर बदलते देर नहीं लगी।

एसडीएम के एक सख्त निर्देश और त्वरित हस्तक्षेप के बाद अस्पताल परिसर में नया बोरवेल खोदा गया है, जिससे वर्षों पुरानी पानी की समस्या का हमेशा के लिए स्थायी समाधान हो गया है। इस बड़ी राहत के बाद मंगलवार को जब एसडीएम खुद व्यवस्थाओं का जायजा लेने अस्पताल पहुंचे, तो अस्पताल प्रबंधन और पूरे स्टाफ ने जनहित में किए गए इस त्वरित काम के लिए उनका आत्मीय सम्मान कर आभार जताया।

जन्म प्रमाण-पत्र शाखा में भीड़ देख भड़के एसडीएम

एसडीएम का यह दौरा सिर्फ सम्मान तक सीमित नहीं रहा। एसडीएम गाचले ने बीएमओ के साथ पूरे अस्पताल परिसर का सघन और बारीकी से निरीक्षण किया और जहाँ भी सिस्टम की खामियां दिखीं, वहां जिम्मेदारों की जमकर क्लास लगाई। जब वे जन्म प्रमाण-पत्र शाखा में पहुंचे, तो वहां भारी भीड़ और अव्यवस्था देखकर उन्होंने गहरी नाराजगी व्यक्त की।

उन्होंने तुरंत बीएमओ को निर्देश दिए कि नवजात शिशुओं के जन्म प्रमाण-पत्र की प्रक्रिया को इतना सरल और समयबद्ध बनाया जाए कि नागरिकों को अनावश्यक धक्के न खाने पड़ें। इसके साथ ही, प्रतीक्षालय में कुर्सियों की कमी पर भी उन्होंने सख्त हिदायत दी कि इलाज के लिए आने वाला कोई भी व्यक्ति बैठने की मूलभूत सुविधा से वंचित नहीं रहना चाहिए।

Thandla Hospital में तीन साल से धूल फांक रही सोनोग्राफी मशीन

अस्पताल के वार्डों, प्रयोगशाला, एक्स-रे कक्ष और एसएनसीयू के दौरों में कई चौंकाने वाली कमियां सामने आईं। एसडीएम ने पाया कि Thandla Hospital में लाखों रुपये की लागत से तीन साल पहले लाई गई सोनोग्राफी मशीन सिर्फ इसलिए धूल फांक रही है क्योंकि उसे चलाने वाला कोई तकनीशियन (Technician) ही नहीं है!

प्रयोगशाला (Lab) के लिए आई नई मशीनों का इंस्टॉलेशन भी अब तक अटका पड़ा है। इन घोर लापरवाहियों पर एसडीएम ने तत्काल औपचारिकताएं पूरी कर मशीनें शुरू करवाने के कड़े निर्देश दिए। इस दौरान बीएमओ ने अस्पताल में नेत्र रोग, अस्थि रोग (ऑर्थोपेडिक), ईएनटी और दंत चिकित्सकों जैसे विशेषज्ञ डॉक्टरों के पद खाली होने की समस्या रखी। इस पर एसडीएम ने तत्काल सीएमएचओ और कलेक्टर के माध्यम से शासन को प्रस्ताव भेजने के निर्देश दिए।

Thandla Hospital SDM

एंबुलेंस का रास्ता रोकने वालों की खैर नहीं

सिर्फ अंदर ही नहीं, अस्पताल के बाहर की बदहाली पर भी एसडीएम का चाबुक चला। अस्पताल परिसर में बेतरतीब खड़े वाहनों और पार्किंग की वजह से आपातकालीन सेवाओं और एंबुलेंस के आने-जाने में हो रही बाधा को देखकर उन्होंने सुरक्षा गार्डों को कड़ी फटकार लगाई। उन्होंने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी कि अस्पताल में सुव्यवस्थित पार्किंग सुनिश्चित की जाए। एसडीएम ने स्पष्ट संदेश दिया कि अस्पताल में आने वाला प्रत्येक मरीज सर्वोच्च प्राथमिकता है। स्वास्थ्य सेवाओं में किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

बाकी तो जो है सो है ही।

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संस्थापक और संपादक है, 15 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं । नेशनल,रीजनल चैनल में रिपोर्टिंग का अनुभव । डिजिटल पत्रकार के रूप मे भी सक्रिय हैं.

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