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आस्था की अग्निपरीक्षा: हिंगलाज माता की मन्नत पूरी करने धधकते अंगारों पर चले सैकड़ों भक्त

रिपोर्ट: अरुण भोला पाटीदार |

करवड़: सनातन धर्म में आस्था और विश्वास के कई अद्भुत रंग देखने को मिलते हैं। ऐसा ही एक विहंगम और रोंगटे खड़े कर देने वाला नजारा करवड़ ग्राम में देखने को मिला, जहां सदियों पुरानी ‘गल चूल’ परंपरा का निर्वहन करते हुए सैकड़ों मन्नतधारी भक्त धधकते अंगारों पर चले। मां हिंगलाज माता के जयकारों के बीच संपन्न हुए इस आयोजन ने एक बार फिर साबित कर दिया कि अटूट आस्था के आगे आग की लपटें भी ठंडी पड़ जाती हैं।

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पुरातन काल से चली आ रही है ‘गल चूल’ की परंपरा

​ग्राम के मध्य स्थित जय मां अंबे माता मंदिर परिसर में यह आयोजन पुरातन काल से चला आ रहा है। इस धार्मिक अनुष्ठान की शुरुआत ग्रामवासियों द्वारा लकड़ियां एकत्रित करने से होती है। इसके पश्चात मंदिर परिसर में ‘गल चूल’ (एक प्रकार की लंबी खाई) खोदी जाती है और उसमें लकड़ियां डालकर आग लगाई जाती है। अग्नि प्रज्वलित होने के बाद इन अंगारों पर घी डालकर इन्हें विशेष रूप से पकाया और पवित्र किया जाता है।

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आस्था के आगे बेअसर दिखी आग की तपिश

​आज के इस वैज्ञानिक युग में भी सनातन धर्म के प्रति लोगों का विश्वास अडिग है। जैसे ही गल चूल के अंगारे धधकने लगे, सैकड़ों की संख्या में मन्नतधारी भक्तों ने मां हिंगलाज माता का स्मरण कर आग की लपटों के बीच चलना शुरू कर दिया। ग्रामीणों का स्पष्ट मानना है कि जो भी भक्त मां हिंगलाज और अपने ईष्ट देव पर पूर्ण विश्वास रखकर इस चूल में प्रवेश करता है, उसे आग की तनिक भी आंच नहीं आती। इस वर्ष भी करवड़ सहित आसपास के कई नगरों और कस्बों के भक्तों ने अंगारों पर चलकर अपनी मन्नतें पूरी कीं और माता का आशीर्वाद प्राप्त किया।

प्रशासन की मुस्तैदी से सफल रहा आयोजन

​सैकड़ों लोगों की भीड़ और आग से जुड़े इस संवेदनशील व विशाल आयोजन को सुरक्षित रूप से संपन्न कराने में स्थानीय प्रशासन और पुलिस विभाग की भूमिका बेहद अहम रही। कार्यक्रम के दौरान शांति और सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए इन अधिकारियों ने मुस्तैदी से मोर्चा संभाला:

  • अनीता भिडे (तहसीलदार, पेटलावद)
  • अनिरूक्ति सबनानी (एसडीओपी, पेटलावद)
  • निर्भय सिंह भूरिया (थाना प्रभारी, पेटलावद)
  • प्रहलाद सिंह चुंडावत (चौकी प्रभारी, करवड़)

​प्रशासन की इस उत्कृष्ट व्यवस्था और सहयोग के लिए समस्त ग्रामवासियों और आयोजन समिति ने अधिकारियों का हृदय से आभार व्यक्त किया। धर्म और आस्था का यह आयोजन शांतिपूर्ण तरीके से अपनी पूर्णता को प्राप्त हुआ, जो क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।