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लठ से पीट-पीटकर की थी हत्या, कोर्ट ने सुनाया आजीवन कारावास का फैसला

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– जिला एवं सत्र न्यायालय पेटलावद ने सुनाया बड़ा फैसला

हत्या के आरोप में 5 आरोपी दोषी करार, कोर्ट ने सुनाई सजा
झाबुआ जिले की पेटलावद अदालत ने एक सनसनीखेज हत्याकांड में फैसला सुनाते हुए पांच आरोपियों को उम्रकैद और जुर्माने की सजा सुनाई है। आरोपियों ने मिलकर रामचंद्र ताड़ की हत्या की थी। माननीय न्यायाधीश श्री ओमप्रकाश बोहरा (जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश, पेटलावद) ने यह फैसला सुनाया।

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इन आरोपियों को हुई सजा

1. सुरेश पिता पप्पू मैडा, उम्र 21 वर्ष

2. शारदा पति पप्पू मैडा, उम्र 38 वर्ष

3. रामा पिता गोबा उर्फ नानूराम मैडा, उम्र 54 वर्ष

4. राधेश्याम पिता रामा मैडा, उम्र 26 वर्ष

5. बालूबाई पति रामा मैडा, उम्र 52 वर्ष
सभी आरोपी ग्राम छायनपूर्व, थाना पेटलावद, जिला झाबुआ के निवासी हैं।

कोर्ट का फैसला और सजा

धारा 302/149 IPC: सभी आरोपियों को आजीवन कारावास एवं ₹10,000 जुर्माना

धारा 147 IPC: प्रत्येक को 6 माह का कारावास एवं ₹100 जुर्माना

धारा 341/149 IPC: प्रत्येक को 1 माह का कारावास

क्या था पूरा मामला?
मामला 12 अप्रैल 2022 को दर्ज हुआ जब अंगूरी पिता रामचंद्र ताड़ ने FIR दर्ज कराई। गांव के पप्पू मैडा की मौत 18 मार्च 2022 को माही नदी में डूबने से हुई थी। पप्पू के परिजनों ने रामचंद्र ताड़ पर हत्या का शक जताया।

भील पंचायत के बाद बढ़ा तनाव, हत्या को दिया अंजाम
पप्पू की मौत के अगले दिन गांव में भील पंचायत हुई, जिसमें मृतक के परिजनों ने रामचंद्र को दोषी बताया। घटना के दिन जब रामचंद्र बड़नगर से लौटकर गांव आ रहे थे, तो पप्पू मैडा के परिजनों ने उन्हें पकड़ लिया, रस्सी से बांधा और लाठियों से पीट-पीटकर हत्या कर दी।

बेटी ने देखा पिता को पेड़ पर लटका कर मारते हुए
रामचंद्र की बेटियां जब चीख-पुकार सुनकर पहुंचीं, तो देखा कि उनके पिता को पेड़ से बांधकर लकड़ियों से पीटा जा रहा था। रामचंद्र को इतनी गंभीर चोटें आईं कि मौके पर ही उनकी मौत हो गई।

अभियोजन पक्ष ने ऐसे पेश किया मजबूत पक्ष
शासन की ओर से केस का संचालन विशेष लोक अभियोजक श्री प्यारे लाल चौहान ने किया। मिडिया प्रभारी सुश्री सूरज वैरागी (एडीपीओ, जिला झाबुआ) ने बताया कि कोर्ट में गवाहों और दस्तावेजों के जरिए अभियोजन पक्ष ने यह साबित कर दिया कि यह हत्या सुनियोजित थी।

सनसनीखेज और चिन्हित प्रकरण घोषित किया गया था
पुलिस ने इसे गंभीर अपराध मानते हुए “सनसनीखेज और चिन्हित” प्रकरण घोषित किया था। जांच पूरी कर कोर्ट में चालान पेश किया गया, जहां न्यायालय ने साक्ष्यों के आधार पर दोषियों को सजा सुनाई।

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