झाबुआ। जिले में पुलिस की लापरवाही के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। ताजा मामला रानापुर थाना क्षेत्र के ग्राम मांडली लालू का है, जहां एक जमीन विवाद के चलते रायसिंह कटिया मेड़ा पर कुल्हाड़ी से जानलेवा हमला किया गया, लेकिन पुलिस ने सिर्फ NCR (Non-Cognizable Report) दर्ज कर मामले को टाल दिया। पीड़ित ने एसपी कार्यालय पहुंचकर इंसाफ की मांग की है।
क्या है पूरा मामला?
रायसिंह कटिया मेड़ा ने रजिस्टर्ड विक्रय पत्र के जरिए एक भूखंड खरीदा था और वहां मकान निर्माण कर रहे थे। इसी दौरान सामा भूरा परमार, नरेश भूरा परमार, अनकु सामा परमार ने जमीन को लेकर विवाद शुरू कर दिया। रायसिंह ने इस मामले में न्यायालय से अस्थायी निषेधाज्ञा भी प्राप्त कर ली थी, जिसमें साफ निर्देश थे कि विपक्षी भूखंड पर कब्जा करने का प्रयास नहीं करेंगे।

लेकिन 22 फरवरी को आरोपी फिर विवाद करने पहुंचे, जिसकी रिपोर्ट रायसिंह ने 23 फरवरी को रानापुर थाना में दर्ज कराई। इसके बावजूद 24 फरवरी को रायसिंह जब निर्माण करने पहुंचे, तो आरोपियों ने उन्हें धमकाया और झूठे केस में फंसाने की धमकी दी।
कुल्हाड़ी से हमला, लेकिन सिर्फ NCR दर्ज
21 मार्च को रायसिंह ने चौकी प्रभारी को आवेदन दिया और जब वे निर्माण कार्य करने पहुंचे, तो सामा भूरा परमार ने रायसिंह के सिर पर कुल्हाड़ी से हमला कर दिया, जिससे वह लहूलुहान हो गए। आसपास के लोगों ने किसी तरह बीच-बचाव किया।
घायल हालत में जब रायसिंह कंजावानी चौकी पर रिपोर्ट दर्ज कराने पहुंचे, तो उन्हें रानापुर थाना भेज दिया गया। लेकिन वहां पुलिस ने सिर्फ NCR दर्ज कर मामले को रफा-दफा कर दिया।
यानी, एक जानलेवा हमले के बाद भी पुलिस ने संज्ञेय अपराध (Cognizable Offense) के बजाय गैर-संज्ञेय अपराध (Non-Cognizable Offense) का मामला दर्ज कर आरोपियों को बचाने की कोशिश की।
एसपी से की शिकायत, उच्च अधिकारियों को भेजी प्रतिलिपि
पुलिस की इस निष्क्रियता से परेशान रायसिंह ने एसपी कार्यालय पहुंचकर न्याय की गुहार लगाई। उन्होंने मुख्यमंत्री, आईजी, इंदौर रेंज डीआईजी को भी आवेदन की प्रतिलिपि भेजी है।
अब क्या होगी कार्रवाई?
अब देखना यह होगा कि एसपी कार्यालय पुलिस की लापरवाही पर क्या कदम उठाता है? क्या इस मामले में संज्ञेय अपराध की धाराएं जोड़ी जाएंगी, या फिर पुलिस की यह कार्यशैली ऐसे ही बनी रहेगी?