मध्य प्रदेश के झाबुआ जिले में स्थित टिटकी माता मंदिर प्रकृति के बीच बसा एक अनुपम और अद्भुत धार्मिक स्थल है, जो श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करता है। झाबुआ जिले में कई धार्मिक स्थल हैं, लेकिन टिटकी माता का यह मंदिर अपनी अनूठी विशेषताओं के कारण खास महत्व रखता है। यह मंदिर पहाड़ की चोटी पर स्थित है, जहां माता की प्राचीन मूर्ति एक शिला में स्थापित है। हालांकि, इस मूर्ति की प्राचीनता के बारे में कोई ठोस जानकारी नहीं है, लेकिन वर्षों से लोग यहां आकर पूजा-अर्चना करते आ रहे हैं।

टिटकी माता अनास नदी किनारे से पहाड़ी पर एक शिला के भीतर विराजित हैं । ग्रामीणों के मुताबिक टिटकी माता का संबंध थांदला देवीगढ़ में स्वयं भू माता और पावागढ़ की महाकाली से भी बताते हैं । स्वयं भू माता को टिटकी माता की छोटी बहन बताया जाता है । मंदिर के पूजारी के मुताबिक स्वयं भू माता के मंदिर में जब मेला लगता है, नदी सुख जाती है, लेकिन मेले के दौरान वहां पानी पहुंचता है, टिटकी माता अनास का पानी पहुंचाती है ।
नवरात्रि में उमड़ता है भक्तों का सैलाब
विशेष रूप से शारदेय नवरात्रि के दौरान यहां भक्तों का मेला सा लग जाता है। झाबुआ जिले के अलावा, गुजरात और राजस्थान से भी श्रद्धालु माता के दर्शन करने यहां पहुंचते हैं। नवमी के दिन यहां हवन और भंडारे का आयोजन होता है, जो धार्मिक उत्सव का मुख्य आकर्षण होता है। रोज यहां बड़ी संख्या में आसपास के गांव के लोग पहुंचते हैं और गरबों के जरिये माता की आराधना करते हैं ।

टिटकी माता की सेवा में यहां के पूजारी पिछले 25 सालों से हैं । महाराज समसू डामोर का कहना है कि माता बाल रूप में उन्हें घर पर लेने आई और आदेश की यहां पूजा कर । तब से वे यहां माता की सेवा में लगे । नवरात्रि के दौरान माता रानी के दर्शनों के लिए दूर-दूर भक्त आते हैं । माता रानी के दरबार में जो भी सच्ची श्रद्धा भक्ति के साथ आता है, माता उसकी मनोकामना जरूर पूरी करती है ।
मंदिर की सुविधाओं को लेकर महाराज कहते हैं, मंदिर तक आने का रास्ता ठीक हो जाए तो भक्तों को सुविधा मिलेगी । साथ बिजली की व्यवस्था भी होनी चाहिए । अभी नेगड़िया से नदी के पर से तार निकाल कर ला रहे हैं । कई बार आवेदन दे चुके हैं, लेकिन सुनवाई नहीं हो रही ।
टिटकी माता ने पूजारी को दिया आदेश ।
मंदिर के मुख्य पुजारी समसू डामोर महाराज पिछले 25 वर्षों से माता की पूजा कर रहे हैं। महाराज बताते हैं कि एक दिन उन्हें सपना आया जिसमें माता बाल रूप में प्रकट हुईं और उनसे पूजा का आदेश दिया। तब से वे निरंतर यहां माता की सेवा में लगे हुए हैं। उनका कहना है कि माता आज भी सच्चे मन से याद करने पर दर्शन देती हैं और भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी करती हैं। टिटकी माता का मंदिर आस-पास के क्षेत्र में लोगों के लिए आस्था का बड़ा केन्द्र है ।

प्रकृति के बीच अनोखी स्थिति
यह मंदिर अनास नदी के किनारे स्थित है, जहां से पहाड़ी पर माता का स्थान दिखाई देता है। आसपास का प्राकृतिक सौंदर्य और बिल पत्र के सैकड़ों पेड़ इस धार्मिक स्थल को और भी पवित्र और रमणीय बनाते हैं। यह स्थान न केवल धार्मिक बल्कि पर्यटन की दृष्टि से भी विकसित किया जा सकता है। लेकिन विडंबना है कि जनप्रतिनिधि चुनाव के वक्त माता के दरबार में हाजिर लगाकर वादे करते हैं, लेकिन चुनाव जीतने के बाद पलट नहीं देखते । नवरात्रि के दौरान बीजेपी और कांग्रेस के बड़े नेताओं का यहां आना होता है, लेकिन यहां की सुविधाओं के लिए ध्यान नहीं दिया ।

टिटकी माता के मंदिर में प्रकृति का सौंदर्य अनुपम है ही । लेकिन यहां खास बात ये है कि मंदिर के आसपास पहाड़ी पर करीब 3 किमी. के दायेर में बेल पत्र के पौधे बड़ी संख्या में हैं । जिसे और नजर जाती है, उधर बेल पत्र के पेड़ नजर आते हैं । लोग इसे माता के साथ साक्षात शिव की मौजूदगी मानते हैं ।
सुविधाओं का अभाव और प्रशासनिक अनदेखी
हालांकि, इस मंदिर को एक प्रमुख धार्मिक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की व्यापक संभावनाएं हैं, लेकिन प्रशासन और जनप्रतिनिधियों ने इस दिशा में कोई खास ध्यान नहीं दिया है। यहां तक पहुंचने के लिए सड़क की स्थिति खराब है, और बड़े वाहनों के लिए रास्ता सुगम नहीं है। पुलिया जर्जर हो चुकी है और बिजली की भी कोई व्यवस्था नहीं है।

मंदिर तक पहुंचने का रास्ता कच्चा है, लोगों को मंदिर सीधी चढाई चढ़कर आना पडता है । कच्चा रास्ते की वजह से बड़े वाहन नहीं आ पाते, दो पहिया वाहन भी मुश्किल से पहुंचते हैं । लंबे समय से सड़क की मांग की जा रही है । लेकिन प्रशासन और जनप्रतिनिधियों ने इस और कोई ध्यान नहीं दिया ।
ग्रामीणों और भक्तों की मांग है कि मंदिर तक पहुंचने के लिए पक्की सड़क, बिजली और सामुदायिक भवन जैसी सुविधाओं का इंतजाम किया जाए। पूर्व विधायक स्वर्गीय शांतिलाल बिलवाल ने यहां एक हैंडपंप लगवाया था, लेकिन इसके बाद कोई और विकास कार्य नहीं हुआ। सांसद गुमान सिंह डामोर ने बिजली पहुंचाने की बात की थी, लेकिन अब तक बिजली आपूर्ति चालू नहीं हो पाई है।

अंतरवेलिया से नेगड़िया होकर टिटकी खेड़ा जाने वाले रास्ते पर अनास नदी ये पुलिया बनी है । पिछले कुछ सालों से इसका कुछ हिस्सा पानी में बह गया । लेकिन इसकी मरम्मत नहीं की गई । यहां से वाहन निकालने में लोगों को काफी परेशानी होती है । फिलहाल बारिश के बाद लोगों ने यहां अपने सुविधा के अनुसार मिट्टी डालकर पुल से वाहन निकालने का रास्ता बनाया है । लेकिन जिम्मेदारों का इस और कोई ध्यान नहीं है ।
टिटकी माता मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि इसके विकास से स्थानीय पर्यटन को भी बढ़ावा मिल सकता है। भक्तों की सुविधा के लिए बुनियादी ढांचे का विकास होना जरूरी है ताकि श्रद्धालु बिना किसी कठिनाई के माता के दर्शन कर सकें। प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से इस दिशा में उचित कदम उठाने की उम्मीद है ताकि यह स्थल धार्मिक और पर्यटन दोनों ही दृष्टियों से समृद्ध हो सके।

टिटकी माता पहुंचने के लिए दो रास्ते हैं । एक रास्ता इंदौर-अहमदाबाद हाईवे से भाजी डूंगरा होकर आता है, लेकिन ये हाइवे से अंदर जाने के बाद कच्चा रास्ता है । दूसरा रास्ता अंतरवेलिया से नेगड़िया होते हुए है । मंदिर के पास से सड़क निकल रही है । लेकिन अनास नदी की पुलिया जर्जर है, वहीं मंदिर तक जाने के लिए रास्ता भी खराब है । वाहन ले जाने में परेशानी होती है ।
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