दोस्ती की मिसाल । 25 साल बाद दोस्तों का महामिलन,वाट्सग्रूप से रियूनियन ।

दोस्ती का नाम आते ही कई तरह के किस्से जहन में उभर आते हैं । कहते हैं कि कई रिश्ते होते हैं, लेकिन दोस्ती वाला रिश्ता बिल्कुल अलग होता है । ये रिश्ता हम खुद चुनते हैं, मन का रिश्ता होता है, इसकी लिए दोस्त कुछ भी कर सकता है । ऐसी ही दोस्ती की मिसाल देखने को मिली झाबुआ में, जहां 25 साल के बाद दोस्तों का महा मिलन हुआ । इस महामिलन में दोस्तों से मिलने एक दोस्त दुबई से झाबुआ पहुंच गया ।

झाबुआ के स्कूली दोस्तों ने कोरोना काल में एक वाट्सग्रूप बनाया और सभी साथियों को उससे जोड़ा । जिंदगी की आपाधापी में सभी लोग बिछड़ गए, कोई बिजनेस में कोई नौकरी में लग गया । ऐसे में बरसों से एक दूसरे से मिलना नहीं हुआ । कोरोना काल में वाट्सग्रूप पर जब बातों और यादों का सिलसिला शुरू हुआ तो सभी ने एक बार मिलने की इच्छा जाहिर की । लेकिन जिंदगी की व्ययस्ता इसमें रोड़ा बन रही थी ।

फिर एक दोस्त ने ग्रूप में लिखा क्या मरने के बाद मिलोगे , बस ये बात सभी को भावुक कर गई और दोस्तों के महामिलन की योजना बनाई गई । दिन तय किया गया 23 जुलाई । 23 जुलाई को सभी मित्र झाबुआ पहुंचे और फिर यादों और बातों का सिलसिला शुरू हुआ । नाच-गाना-शेरों-शायरी से दोस्तों की महफिल गुलजार हो गई ।

25 साल बाद दोस्तों का महामिलन, दुबई पहुंचे यारी निभाने ।

दोस्तों के महामिलन में दोस्ती निभाने के लिए दुबई से हुसैनी बोहरा फ्लाइट पकड़कर झाबुआ पहुंचे। इसके अलावा सूरत इंदौर – रतलाम – पेटलावद – पारा – राणापुर के दोस्त भी 25 साल बाद मिले और अपनी स्कूली जीवन की यादों को ताजा करते हुए अपने-अपने जीवन की विकास यात्रा को सभी के साथ साझा किया । 25 साल बाद दोस्तों का महामिलन में दुबई पहुंचे यारी निभाने ।

23 जुलाई को अमर शहीद चंद्रशेखर आज़ाद की जयंती थी । सभी ने पहले इस माटी महान सपूत को याद किया । उन्हें नमन करते हुए देशभक्ति गीतों के तराने छेड़े । फिर दोस्ती की नगमें गाए, सालों मिले तो फिर जमकर नाचना-गाना हुआ । और यारों की ये महफिल सभी के लिए यादगार बन गई ।

कार्यक्रम की जानकारी देते हुए डॉक्टर नीरज सिंह राठौर एवं कर सलाहकार दिनेश रुनवाल ने बताया कि कोरोना काल के दौरान पुराने स्कूली दोस्तों का एक छोटा सा व्हाट्सएप ग्रुप बनाया गया था। पिछले दो वर्षों से दोस्तों का मिलन समारोह आयोजित करने की बात चल भी रही थी लेकिन सभी की व्यस्तताओं के चलते मिलना नहीं हो पा रहा था।

राष्ट्र प्रेम की दिखाई अद्भुत मिशाल

कार्यक्रम के बारे में जानकारी देते हुए लेखक व कलाकार अंबरीष भावसार एवं मेडिकल एसोसिएशन के महावीर जैन ने बताया कि सभी पुराने दोस्तों में राष्ट्र प्रेम की भावना कूट-कूट कर भरी हुई है। आज़ाद को नमन करते हुए कार्यक्रम की शुरूआत की गई । उसके बाद मेरा रंग दे बसंती चोला, हमू काका बाबा ना पोरिया, में जैसे गीतों एवं दोस्ती संबंधी अनेक गीतों पर सभी उपस्थित 40 दोस्तों ने जमकर डांस किया । साथ ही भारत माता की जय, वंदे मातरम दोस्ती जिंदाबाद, चंद्रशेखर आजाद अमर रहे, जब तक सूरज चांद रहेगा आजाद तेरा नाम रहेगा, जैसे नारों से सदन राष्ट्रभक्ति मय हो गया।

25 साल बाद दोस्तों का  महामिलन,वाट्सग्रूप से रियूनियन ।

भारतीय परंपरा अनुसार सभी दोस्तों के आगमन अवसर पर कंकू – चावल से तिलक लगाकर पुष्प हार पहना कर गर्म जोशी से स्वागत भी किया गया। सभी दोस्तों ने इस अवसर पर अपने-अपने खट्टे मीठे संस्मरण सुनाए एवं 25 वर्षों बाद एक साथ एक दूसरे को गले मिलकर अत्यधिक प्रसन्नता व्यक्त कर रहे थे। साथ ही आने वाले वर्षों में पारिवारिक मिलन समारोह आयोजित करने पर भी बल दिया गया।

दोस्ती के तरानों ने बांधा समा

दोस्तों के महा-मिलन कार्यक्रम में दोस्ती विषय पर कई फिल्मी गीत प्रस्तुत किए गए। जिसमें बने चाहे दुश्मन जमाना हमारा सलामत रहे दोस्ताना हमारा, यह दोस्ती हम नहीं छोड़ेंगे,जैसे अनेक फिल्मी गीत दिनेश चौहान , अंबरीष भावसार, राजनारायण गुप्ता , आशीष कोठारी ने गाकर महफिल में शमा बांध दिया। गीतों की प्रस्तुति पर सभी दोस्तों ने धून के साथ गुनगुनाते हुए इस आयोजन में अपनी गर्म जोशी दिखाई।

यह दोस्त रहे मौजूद ।

दोस्तों के महा-मिलन के अवसर पर दुबई से आए हुसैनी बोहरा , इंदौर से आए किरीट सिंघी, निशांत जैन ,प्रदीप दुबे सूरत से आए राजेंद्र जैन पेटलावद से आए प्रमोद मेहता , पारा से आए मुकेश भंडारी, अशीष कोठारी, पंकज जैन राणापुर से आए समाजसेवी जयेश जैन एवम झाबुआ के सभी दोस्त जगदीश राठौर, सुरेश गहलोत, महावीर जैन, देवेंद्र सोनी, मनोज भानपुरिया, दिनेश चौहान, दिनेश रूनवाल, मनीष सोनी, मितेश गादिया, वीरेंद्र पवार डैनी, देवेंद्र पांचाल, जगदीश राठौर, राज नारायण गुप्ता, मितुल शाह, रंजीत राठौर, राकेश सोनगरा, शैलेंद्र चौरे, प्रफुल्ल पटेल, नरेंद्र पवार, राजेश नायडू, नितिन शुक्ला आदि दोस्त उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन डॉक्टर नीरज सिंह राठौर एवं साहित्यकार लेखक अंबरीष भावसार ने किया।

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