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धार बाग प्रिंट की जापान में धूम : इंडिया मेले-2024 मेले में अंतर्राष्ट्रीय मंच पर बढ़ी पहचान

धार: मध्य प्रदेश के बाग क्षेत्र की प्राचीन और विशिष्ट बाग प्रिंट हस्तकला ने जापान में आयोजित “इंडिया मेला-2024” में अपनी अलग पहचान बनाई। धार जिले की इस परंपरागत हस्तकला ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर धूम मचा दी है, जहां भारतीय वस्त्रों और हस्तशिल्प को व्यापक सराहना मिली। बाग प्रिंट के पुश्तैनी कलाकार मोहम्मद यूसुफ खत्री…

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धार: मध्य प्रदेश के बाग क्षेत्र की प्राचीन और विशिष्ट बाग प्रिंट हस्तकला ने जापान में आयोजित “इंडिया मेला-2024” में अपनी अलग पहचान बनाई। धार जिले की इस परंपरागत हस्तकला ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर धूम मचा दी है, जहां भारतीय वस्त्रों और हस्तशिल्प को व्यापक सराहना मिली। बाग प्रिंट के पुश्तैनी कलाकार मोहम्मद यूसुफ खत्री ने जापान के प्रमुख शहरों में मास्टर क्लासेस और जीवंत प्रदर्शन के जरिए इस कला को वहां के लोगों के करीब पहुंचाया।

बाग प्रिंट की कारीगरी ने जीते दिल

धार बाग प्रिंट की जापान में धूम

इस आयोजन में भारत के वस्त्र मंत्रालय की विकास आयुक्त श्रीमती अमृत राज और जापान में भारतीय राजदूत श्री सिबी जॉर्ज ने भी इस कला की तारीफ की। 12 से 20 अक्टूबर 2024 तक ओसाका, क्योटो, और साकाई जैसे प्रमुख शहरों में हुए कार्यक्रमों में मोहम्मद यूसुफ खत्री ने इस कला की विशेष तकनीक और कारीगरी का प्रदर्शन किया।

ओसाका के नजदीक कोबे में आयोजित तीन दिवसीय ‘इंडिया मेला’ में धार के बाग की इस कला का जीवंत प्रदर्शन किया गया, जिसमें स्थानीय लोगों के साथ पर्यटकों ने भी इस कला की बारीकियों को सीखा। बच्चों से लेकर वयस्कों तक, सभी ने बाग प्रिंट की तकनीक में गहरी रुचि दिखाई।

बाग प्रिंट मध्य प्रदेश के धार जिले के बाग गांव से उत्पन्न एक पारंपरिक हस्तकला है, जो अपनी जटिल डिजाइन और प्राकृतिक रंगों के उपयोग के लिए प्रसिद्ध है। यह हस्तकला कपड़े पर लकड़ी के ब्लॉक का उपयोग करके तैयार की जाती है और मुख्यतः सूती और रेशमी वस्त्रों पर की जाती है। बाग प्रिंट की खासियत इसकी प्राकृतिक रंगाई प्रक्रिया और हाथ से छपाई की तकनीक में निहित है। आइए, जानते हैं कि बाग प्रिंट कैसे तैयार होती है:

बाग प्रिंट को मिली अंतर्राष्ट्रीय पहचान

बाग प्रिंट हस्तशिल्प ने भारतीय हस्तकला को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाई है। जापान के लोगों ने इस कला को न केवल सराहा, बल्कि इसे सीखने और समझने में भी दिलचस्पी दिखाई। यह बाग प्रिंट की लोकप्रियता और भारतीय हस्तशिल्प की बढ़ती वैश्विक मांग को दर्शाता है। इस तरह के आयोजन भारतीय कला और संस्कृति को अंतर्राष्ट्रीय मंच पर नई ऊँचाइयों पर ले जाने में सहायक साबित हो रहे हैं।

जापान में इंडिया मेला 2024 का आोयजन 12 से 20 अक्टूबर तक किया गया था । जिसमें हस्तशिल्प के साथ भारतीय उत्पादों भी मेले में नजर आए ।

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संस्थापक और संपादक है, 15 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं । नेशनल,रीजनल चैनल में रिपोर्टिंग का अनुभव । डिजिटल पत्रकार के रूप मे भी सक्रिय हैं.

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