सोयाबीन- पीला मौजेक और इल्लियों का प्रकोप तो क्या करें !

सोयाबीन- पीला मौजेक और इल्लियों का प्रकोप तो क्या करें !

पीला मौजेक

सोयाबीन की फसल में पीला मौजेक का प्रकोप मानसून की आमद के बाद खरीब फसल की बुवाई हो चुकी है । कई जिलों में धारदार तो कहीं औसत से पिछड़ हुई बारिश देखने को मिल रही है । झाबुआ की बात करें तो यहां 28 जुलाई तक 313 मि.मी. बारिश जिले में हो चुकी है । लेकिन कुछ किसानों की फसलों पर कीट का प्रकोप देखने को मिल रहा है । ऐसे में कृषि विभाग की टीम ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर किसानों के खेतों का मुआयना कर रही है और उन्हें उचित सलाह दे रही है ।

सोयाबीन के में पहुंचे अधिकारी, किया मुआयना ।

झाबुआ के रामा और झाबुआ ब्लॉक में कृषि विभाग के उपसंचालक एन एस रावत ने एलएस चारेल और हीरासिंह चौहान, संतोष मोर्ये, एमएस धार्वे सहायक संचालक कृषि और अन्य सबंधित अधिकारियों और मैदान अमले के साथ खेतों का निरीक्षण किया । कृषि विभाग की टीम ने रामा के नानिया कुंवरा, लक्ष्मण भंवरपिपलिया, महेश, जगदीश, के यहां पहुंचकर सोयाबीन की फसल का निरीक्षण किया ।

इसके साथ अन्य किसानों खेतों में पहुंचकर कपास की फसल निरीक्षण किया । कृषि अधिकारियों की माने तो फसल संतोषजनक हैं लेकिन उनमें कीट का प्रकोप दे खा जा रहा है । खासकर पीला मौजेक । कृषि विभाग के उपसंचलाक एनएस रावत ने किसानों को सलाह दी है कि कुछ उपाय अपनाकर कीट प्रकोप से फसलों का बचाव कर सकते हैं ।

सोयाबन कीू फसल में पीला मौजेक का प्रकोप

जिन किसान भाईयों के खेत में सोयाबीन और उड़द की फसल में पीला मौजके का प्रकोप है, इसके किसान अपने में जगह-जगह पर पीला चिपचिपा ट्रेप लगाए । जिससे इसका संक्रमण फैलाने वाली सफेद में मक्खी के नियंत्रण में सफलता मिल सकती है । साथ ही पीला मौजेक ग्रसित पौधे को अपने से निकाल कर नष्ट कर दे । कुछ क्षेत्रों में रिमझिम बारिश की स्थिति में इल्लियों का प्रकोप भी देखा जा रहा है । ऐसी स्थिति में किसान इन्डोक्साकार्ब 333 एम.एल प्रति हेक्टेयर और लेम्बड़ा सायहेलोथिन 4.9 सीएस. 300 एमएल प्रति हैक्टेयर का छिड़काव कर सकते हैं ।


सोयाबीन, कपास की फसल में फफूँद जनित एन्थेकनोज तथा राइजोक्टोनिया एरियल ब्लाईट नामक बीमारी का प्रकोप होने पर टेबुकोनेझोल 625 एम.एल. प्रति हैक्टेयर या टेबुकोनेझोल सल्फर 1 कि.ग्रा. प्रति हैक्टेयर या हैक्साकोनेझोल 5 प्रतिशत ई.सी. 800 एम.एल. प्रति हैक्टेयर के मान से छिडकाव करें।

तम्बाकू की इल्ली एवं पत्ते खाने वाली इल्लियों तथा रस चूसने वाले कीट जैसे सफेद् मक्खी / जैसीड एवं तनाछेदक एवं गर्डलबिटल कीट के एक साथ नियंत्रण हेतु थायोमिथोक्सम 12.6 + लेम्बडा सायहेलोथ्रीन 9.5 % ZC (125 मि.ली/हैक्टेयर) या बीटासायफ्लूथ्रीन + इमिडाक्लोप्रीड (350 मि.ली / हैक्टेयर) का छिडकाव करें।

मक्का फसल में फॉल आर्मीवर्म के नियंत्रण हेतु क्लोरपायरीफॉस 20 ई.सी. या ईमामेक्टिन बेन्जोएट 5 ई.सी. 04 ग्राम/10 मि.ली. या थायोमेथाक्झम लैम्बाडासायहेलोथ्रिन 0.5 एम.एल. प्रति लीटर पानी में उचित घोल बनाकर छिड़काव करें। कपास की फसल में रस चूषक कीट एफिड का प्रकोप होने पर एसीटामेप्रिड दवा का 10 मिली प्रति स्प्रे पंप के मान से घोल बनाकर छिडकाव करने की सलाह दी गई है ।

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virendra singh rathore
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संस्थापक और संपादक है, 15 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं । नेशनल,रीजनल चैनल में रिपोर्टिंग का अनुभव । डिजिटल पत्रकार के रूप मे भी सक्रिय हैं.

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