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विक्रांत भूरिया : खदान आवंटन प्रक्रिया पर उठाए सवाल, आंदोलन की चेतावनी

विक्रांत भूरिया की चेतावनी : झाबुआ विधायक डॉ. विक्रांत भूरिया ने खदान आवंटन प्रक्रिया को लेकर जिला प्रशासन पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि खदान आवंटन की वास्तविकता को सार्वजनिक किया जाए और बिना ग्रामीणों की सहमति के कोई भी कार्यवाही न की जाए। भूरिया ने चेतावनी दी है कि…

विक्रांत भूरिया

विक्रांत भूरिया की चेतावनी : झाबुआ विधायक डॉ. विक्रांत भूरिया ने खदान आवंटन प्रक्रिया को लेकर जिला प्रशासन पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि खदान आवंटन की वास्तविकता को सार्वजनिक किया जाए और बिना ग्रामीणों की सहमति के कोई भी कार्यवाही न की जाए। भूरिया ने चेतावनी दी है कि अगर प्रशासन ने ग्रामीणों की सहमति के बिना खदान आवंटन की प्रक्रिया पूरी की, तो कांग्रेस पार्टी सड़कों पर उतरकर इसका कड़ा विरोध करेगी।

आदिवासी समाज के अधिकारों की लड़ाई में पीछे नहीं हटेंगे – विक्रांत भूरिया

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डॉ. भूरिया ने कहा, “आदिवासी समाज के लिए यह जमीन केवल आजीविका का साधन नहीं है, बल्कि उनकी संस्कृति और सामाजिक पहचान का अभिन्न हिस्सा है। प्रशासन द्वारा ग्रामवासियों की सहमति के बिना खदान आवंटन करना आदिवासी हितों के खिलाफ है। कांग्रेस पार्टी इस तरह की किसी भी कार्यवाही का पुरजोर विरोध करेगी।”

कांग्रेस ने दी चेतावनी

जिला कांग्रेस अध्यक्ष प्रकाश रांका ने जानकारी दी कि झाबुआ विधानसभा के रानापुर जनपद पंचायत क्षेत्र की मातासुला, भूतखेड़ी, सनोड, सरदारपुरा और बन ग्राम पंचायतों में खदान आवंटन का प्रस्ताव दिया गया है। हालांकि, इन पंचायतों द्वारा ऐसा कोई प्रस्ताव पारित नहीं किया गया है। रांका ने कहा कि “पेसा एक्ट के तहत पंचायतों को यह अधिकार है कि वे खदान आवंटन पर निर्णय लें। बिना पंचायत की सहमति के भूमि आवंटन करना पंचायतों के अधिकारों का उल्लंघन है।”

पूर्व में भी दर्ज कराया विरोध

कांग्रेस ने पहले भी इस मुद्दे पर कलेक्टर को लिखित ज्ञापन दिया था। बावजूद इसके, खदान आवंटन की प्रक्रिया शुरू होने की खबर से कांग्रेस में आक्रोश है। रांका ने कहा, “अगर प्रशासन ने बिना संवाद और उचित विचार के यह प्रक्रिया आगे बढ़ाई, तो कांग्रेस मजबूर होकर जमीन पर उतरकर विरोध करेगी।”

ग्रामीणों और पंचायत प्रतिनिधियों का विरोध

जिले की कई पंचायतों के प्रतिनिधियों ने भी खदान आवंटन का विरोध किया है। सरपंच दिलीप सनोड, रकसिंह ढोल्यावड़, और देवलसिंह परमार सहित अन्य ग्रामीण नेताओं ने कहा है कि यदि बिना सहमति के भूमि आवंटन हुआ, तो यह विश्वासघात होगा।

क्या कहता है पेसा एक्ट?

पेसा एक्ट के तहत आदिवासी क्षेत्रों में खनिज संसाधनों के आवंटन से पहले पंचायतों की सहमति लेना अनिवार्य है। कांग्रेस नेताओं ने प्रशासन को इस कानून का पालन करने की सख्त हिदायत दी है।

आंदोलन की तैयारी में कांग्रेस

डॉ. विक्रांत भूरिया और कांग्रेस के अन्य नेताओं ने स्पष्ट कर दिया है कि अगर प्रशासन ने अपनी मनमानी की, तो वे जनता के साथ मिलकर आंदोलन करेंगे। उन्होंने कहा, “इसकी जिम्मेदारी पूरी तरह जिला प्रशासन की होगी।”

झाबुआ में खदान आवंटन का मुद्दा तूल पकड़ता जा रहा है। कांग्रेस और ग्रामीणों ने मिलकर प्रशासन को सख्त संदेश दिया है कि बिना सहमति के कोई भी कार्यवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस पर क्या कदम उठाता है।

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संस्थापक और संपादक है, 15 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं । नेशनल,रीजनल चैनल में रिपोर्टिंग का अनुभव । डिजिटल पत्रकार के रूप मे भी सक्रिय हैं.

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