डीजे संचालक : रोजगार बचाने के लिए गाइडलाइन के अनुसार बजाने दिया जाए डीजे ।

डीजे संचालकों ने मांगी अनुमति । रोजगार बचाने के लिए गाइडलाइन के अनुसार बजाने दिया जाए डीजे । मंगलवार को झाबुआ जिले में बड़ी संख्या..

डीजे संचालक पहुंचे ज्ञापन देने ।

डीजे संचालकों ने मांगी अनुमति । रोजगार बचाने के लिए गाइडलाइन के अनुसार बजाने दिया जाए डीजे । मंगलवार को झाबुआ जिले में बड़ी संख्या में डीजे संचालकों ने अपनी समस्याओं के समाधान की मांग करते हुए प्रशासन को ज्ञापन सौंपा। ये डीजे संचालक गाइडलाइन के तहत डीजे संचालन की अनुमति की मांग कर रहे हैं।

आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं डीजे संचालक

झाबुआ जिले में करीब 1,000 से अधिक डीजे संचालक हैं, जिनमें अधिकांश आदिवासी युवा शामिल हैं। उन्होंने लोन लेकर डीजे का व्यवसाय शुरू किया था, लेकिन हालिया समय में पुलिस-प्रशासन द्वारा डीजे और उनके वाहनों को जब्त किए जाने की घटनाओं ने उनके रोजगार पर संकट खड़ा कर दिया है।

डीजे संचालकों का कहना है कि उनके व्यवसाय पर प्रतिबंध से उनकी आजीविका पर गहरा असर पड़ा है। रोजगार बंद होने से न केवल उनके परिवार का गुजारा मुश्किल हो गया है, बल्कि वे लोन की किस्तें चुकाने में भी असमर्थ हो रहे हैं।

रैली और ज्ञापन के माध्यम से अपनी बात रखी

जिले भर से आए डीजे संचालक अंबेडकर पार्क में एकत्र हुए और रैली निकालकर तहसीलदार को कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में उन्होंने अपनी मांगें रखते हुए कहा कि वे गाइडलाइन के तहत ही डीजे का संचालन करते हैं और आगे भी नियमों का पालन करेंगे।

उनकी मुख्य मांग यह है कि विवाह, मांगलिक और धार्मिक कार्यक्रमों में डीजे बजाने की अनुमति दी जाए। उन्होंने प्रशासन से अपील की कि उनके व्यवसाय पर रोक लगाना उचित नहीं है, क्योंकि इससे सैकड़ों आदिवासी युवाओं की रोजी-रोटी छिन रही है।

डीजे संचालक पहुंचे अपनी मांगों को लेकर ज्ञापन देने ।

शराब पर प्रतिबंध की मांग भी उठाई

डीजे संचालकों ने तर्क दिया कि विवाह और मांगलिक कार्यक्रमों में शराब पर रोक लगाई जानी चाहिए। उनका कहना है कि शराब का सेवन आदिवासी समाज के लिए अधिक नुकसानदायक है। उन्होंने डीजे व्यवसाय को समुदाय के विकास के लिए जरूरी बताते हुए प्रशासन से सकारात्मक कदम उठाने की अपील की।

प्रशासन से समाधान की उम्मीद

डीजे संचालकों ने स्पष्ट किया कि वे गाइडलाइन का पालन करते हुए डीजे संचालन करेंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो वे आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।

डीजे व्यवसाय आदिवासी युवाओं के लिए एक महत्वपूर्ण आजीविका का साधन है। इस पर प्रतिबंध से उनके जीवन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। प्रशासन को डीजे संचालकों की मांगों को गंभीरता से लेना चाहिए और गाइडलाइन के अनुसार समाधान निकालना चाहिए।

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