आध्यात्मिक शिक्षा से मूल्य निष्ठा समाज- ज्योति दीदी

शिक्षा का मूल उद्देश्य है चरित्रवान बनना गुणवान बनना लेकिन वर्तमान समय इसके लिए जरूरी है। जीवन में नैतिक शिक्षा का समावेश होना क्योंकि आज के बच्चे कल का भावी समाज हैं। अगर भावी समाज को अच्छा बनाना है, तो वर्तमान में बच्चों को भौतिक शिक्षा के साथ-साथ मूल्य सीखने की जरूरत है, क्योंकि मूल्य…

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शिक्षा का मूल उद्देश्य है चरित्रवान बनना गुणवान बनना लेकिन वर्तमान समय इसके लिए जरूरी है। जीवन में नैतिक शिक्षा का समावेश होना क्योंकि आज के बच्चे कल का भावी समाज हैं। अगर भावी समाज को अच्छा बनाना है, तो वर्तमान में बच्चों को भौतिक शिक्षा के साथ-साथ मूल्य सीखने की जरूरत है, क्योंकि मूल्य से समाज चलता है। मूल्य की कमी के कारण समाज में बहुत बड़ी विकृति आती जा रही है।

समाज नैतिक मूल्यों के आधार से चलता है सहन करना मीठा बोलना सत्य बोलना भाईचारा रखना यह नैतिक मूल्य और नैतिक मूल्यों से ही संस्कार बनते हैं शिक्षा का मूल अध्याय है अंधकार से प्रकाश की और अग्रसर होना बंधनों से मुक्त होना (नशे का, व्यसन का बंधन) इस संसार से जाने के बाद भी अमर बनना ।

आध्यात्मिक शिक्षा से मूल्य निष्ठा समाज- ज्योति दीदी

आध्यात्मिक शिक्षा जीवन में जरूरी ।

उक्त उद्गार ब्रह्माकुमारी ज्योति दीदी ने पीएम श्री जवाहर नवोदय विद्यालय(लालू डुंगरा) में उपस्थित विद्यार्थियों के समक्ष प्रस्तुत किये। आपने कहा की पढ़ाई में मन और बुद्धि दोनों को एकाग्र करने की आवश्यकता होती है और इस एकाग्रता को बढ़ाने में सहयोग करता है सकारात्मक चिंतन। सकारात्मक चिंतन हमें सिखाता है राजयोग, राजयोग अर्थात मेडिटेशन को दैनिक दिनचर्या में समावेश करने से जीवन में नैतिक मूल्यों की प्रवेशता शुरू हो जाती है। क्योंकि राजयोग में आत्मा रूपी बैटरी परमात्मा रुपी पावर हाउस से जुड़ती है, तो आत्मा का सशक्तिकरण और शुद्धिकरण प्रारंभ हो जाता है।

इस अवसर पर ब्रह्माकुमारी रितु बहन ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा की जैसा सोचोगे वैसा बनोगे इसलिए मेडिटेशन हमारी सोच अर्थात विचारों को चेंज करता है। जैसे कांटे को काटा ही निकलता है इसी प्रकार पुराने विचारों को नए विचारों के द्वारा ही बदला जा सकता है। आपने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि जीवन को श्रेष्ठ बनाने की नींव संकल्प है, तो हमारा श्रेष्ठ संकल्प बहुत ही शक्तिशाली होना चाहिए। यदि कोई गलत कर रहा है तो हम राइट रहे उसके प्रभाव में ना आए। हम एक जिम्मेदारी उठाएं कि मैं राइट मार्ग पर ही चलती रहूंगी।

इस अवसर पर विद्यालय परिवार भी उपस्थित था। कार्यक्रम शुरू होने से पूर्व संस्था प्राचार्य ने स्वागत किया। अंत में ज्योति दीदी ने सभी को मेडिटेशन का अभ्यास कराया एवं बच्चों को म्यूजिकल एक्सरसाइज करवाई।

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संस्थापक और संपादक है, 15 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं । नेशनल,रीजनल चैनल में रिपोर्टिंग का अनुभव । डिजिटल पत्रकार के रूप मे भी सक्रिय हैं.

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