झाबुआ: मध्य प्रदेश के झाबुआ जिले में मंगलवार को आयोजित कलेक्टर की ‘जनसुनवाई’ में रिश्तों को तार-तार कर देने वाला एक बेहद भावुक मामला सामने आया। यहां एक बेबस, बुजुर्ग और बीमार पिता अपनी फरियाद लेकर झाबुआ कलेक्टर डॉ. योगेश भरसट के पास रामा आयोजित ब्लॉक स्तरीय विशेष जनसुनवाई में पहुंचा। बुजुर्ग का आरोप है कि उसके इकलौते बेटे ने न सिर्फ उसे प्रताड़ित किया, बल्कि बुढ़ापे में उसे घर से धक्के मारकर बाहर निकाल दिया। पिछले पांच सालों से यह बेसहारा पिता न्याय और दो वक्त की रोटी के लिए दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर है।
SDM कोर्ट का आदेश बेअसर, कानून नहीं मानता बेटा
रामा तहसील के ग्राम पारा निवासी पीड़ित काले खां पिता नाजीर खां ने झाबुआ कलेक्टर को दिए अपने लिखित आवेदन में बताया कि उन्होंने अपने बेटे अमीन के खिलाफ भरण-पोषण के लिए अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) न्यायालय में गुहार लगाई थी।
- कोर्ट का सख्त आदेश: बुजुर्ग की दयनीय स्थिति को देखते हुए राजस्व न्यायालय ने 24 जुलाई 2025 को एक आदेश पारित किया था। इस आदेश में बेटे को निर्देश दिया गया था कि वह अपने पिता को प्रतिमाह 10,000 रुपये भरण-पोषण राशि दे।
- बेटे की मनमानी: पीड़ित का आरोप है कि उसके कलयुगी बेटे अमीन ने कानून और कोर्ट के आदेश को ठेंगा दिखाते हुए आज तक इस आदेश का पालन नहीं किया है और न ही कोई आर्थिक मदद दी है।
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बीमारी और बेघर होने का दोहरा दर्द
जनसुनवाई के दौरान अधिकारियों के सामने बुजुर्ग का दर्द छलक पड़ा। अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए उन्होंने बताया कि उनके पास न तो रहने का कोई सुरक्षित ठिकाना है और न ही खाने-पीने की कोई स्थायी व्यवस्था बची है। वे कई गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं, लेकिन देखभाल करने वाला कोई नहीं है।आंखों की रोशनी भी अब कमजोर हो चुकी है और उन्हें तत्काल इलाज की सख्त जरूरत है। घर से निकाले जाने के बाद से इधर उधर जीवन काटने को मजबूर हैं।

कलेक्टर डॉ. योगेश भरसट ने दिए सख्त कार्रवाई के निर्देश
मामले की गंभीरता और एक बुजुर्ग पिता की दयनीय स्थिति को देखते हुए कलेक्टर डॉ. योगेश तुकाराम भरसट ने उनकी शिकायत को बेहद ध्यानपूर्वक सुना। उन्होंने पीड़ित पिता को ढांढस बंधाते हुए तत्काल उचित कार्रवाई का भरोसा दिलाया।
कलेक्टर ने मौके पर ही झाबुआ एसडीएम (SDM) महेश मंडलोई को इस पूरे मामले की त्वरित जांच कर बेटे के खिलाफ आवश्यक और सख्त कानूनी कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन अब यह सुनिश्चित करने में जुट गया है कि बुजुर्ग को उसका कानूनी हक और न्यायालय द्वारा तय की गई भरण-पोषण राशि जल्द से जल्द मिल सके।
जनसुनवाई में सामने आई इस घटना ने एक बार फिर समाज में रिश्तों के गिरते नैतिक मूल्यों और वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा (Senior Citizen Safety) पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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