Kunwar Vijay Shah: झाबुआ जिले के प्रभारी मंत्री कुंवर विजय शाह का अंदाज ही निराला है। वे झाबुआ में आंधी की तरह आते हैं और तूफान की तरह निकल जाते हैं। कागजों और सरकारी प्रेस नोट में इसे ‘झाबुआ प्रवास’ लिखा जाता है, जबकि ‘प्रवास’ का मतलब होता है रात रुकना और जिले की नब्ज टटोलना। असलियत में इसे प्रवास नहीं, बल्कि सिर्फ एक ‘हवा-हवाई दौरा’ या ‘भ्रमण’ कहना ज्यादा सटीक होगा।
मंत्री जी आते हैं, अफसरशाही की तैयार की गई ‘उजली तस्वीर’ देखते हैं, और वापस लौट जाते हैं। लेकिन पीछे छोड़ जाते हैं कई ऐसे सवाल, जिनका जवाब ना तो प्रशासन के पास है और ना ही सत्ताधारी दल के पास।

Kunwar Vijay Shah प्रभारी मंत्री की घोषणाओं का क्या हुआ? ट्रेन के पुर्जे और ‘स्टेच्यू ऑफ यूनिटी’ का टूर
प्रभारी मंत्री जी बड़ी-बड़ी बातें करने के लिए जाने जाते हैं, लेकिन उनकी घोषणाओं का जमीन पर क्या हश्र होता है, यह झाबुआ की जनता अच्छे से जानती है:
- ‘प्रभारी मंत्री की खिड़की’: बड़े जोर-शोर से ‘प्रभारी मंत्री की खिड़की’ का प्रचार किया गया था। लेकिन आज तक किसी को नहीं पता कि इस खिड़की में कितने आवेदन आए और मंत्री जी ने कितनों पर विचार कर लोगों को राहत दी।
- अंबेडकर पार्क की ट्रेन: मंत्री जी ने अंबेडकर पार्क में बच्चों के लिए टॉय ट्रेन चलाने का सपना दिखाया था। अब कोई जरा यह बताए कि उस ट्रेन के कलपुर्जे तैयार हुए या नहीं, या वह भी पटरी से उतर गई?
- छात्रों का दर्शन टूर: घोषणा हुई थी कि झाबुआ के छात्रों को ‘स्टेचू ऑफ यूनिटी’ के दर्शन कराए जाएंगे। अगर कोई भी छात्र यह दर्शन करके लौटा हो, तो प्रशासन को उसकी तस्वीरें जरूर साझा करनी चाहिए, ताकि जनता को यकीन हो सके।
किसानों का बीज और खरीफ सीजन के आंकड़े
किसानों को बीज उपलब्ध करवाने की बात कही । अगर प्रभारी मंत्री जी सच में किसानों के हितैषी हैं, तो उन्हें यह पता करना चाहिए था कि इस खरीफ सीजन के लिए उद्यानिकी, कृषि और सहकारिता विभाग ने वास्तव में कितना और कैसा बीज वितरित किया है?
लेकिन प्रभारी मंत्री को हकीकत बताएगा कौन? अधिकारी और पार्टी के नेता तो मंत्री जी को वही ‘उजली और चमकदार तस्वीर’ दिखाएंगे जो उन्हें सूट करती है। जब किसी नेता की अधिकारियों से नहीं बनती या उनके मनमुताबिक काम नहीं होते, तभी अंग्रेजी में डायलॉग मारा जाता है— “वाट इस द एडमिनिस्ट्रेशन” । जनता से जुड़े मुद्दों पर खामोशी ही रहती है । तो इनकी नज़र में झाबुआ में “सब चंगा सी… ऑल इज वेल!”
युवा कांग्रेस के साथ दुर्व्यवहार, विपक्ष से इतना डर क्यों?
प्रभारी मंत्री जिले के दौरे पर थे, तो जाहिर सी बात है कि विपक्ष (कांग्रेस) जनता की समस्याएं और ज्ञापन लेकर उनसे मिलने पहुंचेगा ही।
- मंत्री जी को जिले की असली वास्तविकता विपक्ष और मीडिया से ही मिल सकती थी।
- लेकिन युवा कांग्रेस के नेताओं के साथ जो सलूक हुआ, वह हैरान करने वाला था। उन्हें धक्के मारकर बाहर निकाल दिया गया।
- हालांकि बाद में चार लोगों को मिलने दिया गया, लेकिन सवाल यह है कि मिलने से पहले यह ‘सीन’ ही क्यों क्रिएट किया गया? क्या प्रशासन और सत्ता को विपक्ष के सवालों का सामना करने से डर लगता है?
जिले की बदहाली, हवा-हवाई दौरे और कागजी घोषणाएं… सब कुछ आंखों के सामने है।
बाकी तो जो है सो है ही ।
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