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झाबुआ कलेक्टर के एक निर्देश ने पटवारियों की उड़ाई नींद

झाबुआ: झाबुआ जिले में राजस्व मामलों की पेंडेंसी और ग्रामीणों की लगातार मिल रही शिकायतों को देखते हुए प्रशासन ने गांव तक अपनी पहुंच बढ़ाना चाहता हैं । खुद कलेक्टर हर मंगलवार को अलग-अलग विकासखंड पर विशेष जनसुनवाई कर रहे हैं । कलेक्टर के एक नए निर्देश के बाद अब जिले के पटवारियों के बीच…

झाबुआ कलेक्टर रामा में पटवारी-सचिव की बैठक लेते हुए ।

झाबुआ: झाबुआ जिले में राजस्व मामलों की पेंडेंसी और ग्रामीणों की लगातार मिल रही शिकायतों को देखते हुए प्रशासन ने गांव तक अपनी पहुंच बढ़ाना चाहता हैं । खुद कलेक्टर हर मंगलवार को अलग-अलग विकासखंड पर विशेष जनसुनवाई कर रहे हैं । कलेक्टर के एक नए निर्देश के बाद अब जिले के पटवारियों के बीच अंदरखाने काफी चर्चाएं हो रही हैं। प्रशासन की मंशा साफ है कि ग्रामीणों को अपने छोटे-छोटे कामों के लिए जिला या तहसील मुख्यालय के चक्कर न काटने पड़ें। सप्ताह में एक दिन पटवारी मुख्यालय पर ही रूके ।

JhabuaPost.com से कलेक्टर ने की पुष्टि

झाबुआ कलेक्टर डॉ. योगेश तुकाराम भरसट ने JhabuaPost.com से विशेष रूप से बात करते हुए इस नए आदेश की पुष्टि की है। कलेक्टर ने Jhabua Post से कहा, “हमने जिले के सभी पटवारियों को निर्देश दिए हैं कि वे सप्ताह में कम से कम एक दिन अपने मुख्यालय पर अनिवार्य रूप से रुकें रात्रि विश्राम करें । कई लोग सुरक्षा को लेकर चिंता भी जाहिर कर रहे हैं लेकिन छात्रावास या जैसी भी सुविधा होगा वहां रुकवाया जाएगा । लेकिन इसको लागू करवाएंगे ।

झाबुआ कलेक्टर रामा में पटवारी-सचिव की बैठक लेते हुए ।

आखिर क्यों पड़ी इस आदेश की जरूरत?

प्रशासन की सबसे महत्वपूर्ण इकाई पटवारी होता है, जिसका सीधा जुड़ाव किसानों और आम ग्रामीणों से होता है।

राजस्व मामलों की भरमार: जनसुनवाई और तहसीलों में आने वाली अधिकतर शिकायतें जमीन बंटवारा, सीमांकन, नामांतरण (Mutation), और नक्शा दुरुस्ती जैसे मामलों की होती हैं। किसानों को फायदा: अगर पटवारी अपने मुख्यालय यानी गांव में मौजूद रहेंगे और रात रुकेंगे, तो किसानों को काफी फायदा मिलेगा और उनके समय व पैसे दोनों की बचत होगी।

शासन के नियम हवा में, मॉनिटरिंग पर उठ रहे सवाल

दरअसल, मध्य प्रदेश शासन की ओर से पहले से ही ये निर्देश हैं कि पटवारी सप्ताह में दो दिन अपने मुख्यालय पर अनिवार्य रूप से मौजूद रहेंगे । लेकिन हकीकत यह है कि धरातल पर इन नियमों का कोई पालन नहीं किया जाता।

अब कलेक्टर डॉ. भरसट ने अपनी तरफ से निर्देश जारी किए हैं। लेकिन आम जनता के बीच सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या वास्तव में पटवारी गांव पहुंच रहे हैं या नहीं? वे मुख्यालय पर रुक रहे हैं या नहीं? इसकी पड़ताल और निगरानी कौन करेगा? जिले में कई पटवारी ऐसे भी हैं, जिनका रवैया किसी से छिपा नहीं है। ऐसे में कलेक्टर के निर्देशों का इन पर क्या असर पड़ता है, यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा। पटवारी वो महत्वपूर्ण कड़ी जो सरकार , शासन और प्रशासन के बीच काम करती है । खासकर जमीन से जुड़े काम को लेकर । लेकिन सबसे ज्यादा परेशान किसान ही होते हैं ।

रामा जनपद की बैठक: ‘सुशासन’ के लिए समय पर काम जरूरी

इसी कड़ी में झाबुआ जिले की रामा जनपद में पटवारियों और पंचायत सचिवों की एक महत्वपूर्ण बैठक भी आयोजित की गई। बैठक को संबोधित करते हुए कलेक्टर ने दो टूक शब्दों में कहा कि प्रशासन का मुख्य कार्य शासन की कल्याणकारी योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना है।

“शासन की योजनाओं का लाभ लोगों को समयबद्ध तरीके से मिलना चाहिए। ग्रामीणों के जो भी काम हैं, वे बिना किसी देरी के समय पर पूरे होने चाहिए। जब हम समय पर लोगों की समस्याएं सुलझाएंगे, तभी मध्य प्रदेश सरकार की ‘सुशासन’ (Good Governance) की कल्पना सही मायनों में सार्थक हो सकेगी।”

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