झाबुआ (Jhabua Post): झाबुआ जिला अस्पताल की स्वास्थ्य और सफाई व्यवस्था एक बार फिर चरमरा गई है। सोमवार दोपहर से अस्पताल के 124 आउटसोर्स कर्मचारी (जिनमें सफाई कर्मचारी भी शामिल हैं) काम बंद कर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर उतर गए हैं। इस Jhabua-Hospital-Strike-Outsource-Staff के कारण अस्पताल की सफाई व्यवस्था और अन्य जरूरी कामकाज बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं, जिससे मरीजों और उनके परिजनों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
Jhabua-Hospital-Strike नई ठेका कंपनी ‘श्रीजी मैनपॉवर’ पर गंभीर आरोप
कर्मचारियों का आरोप है कि नई ठेका कंपनी ‘श्रीजी मैनपॉवर’ ने काम संभालते ही उनके पहले ही महीने का वेतन रोक दिया है। इसके साथ ही उनकी यह भी शिकायत है कि:
- उन्हें कलेक्टर दर से काफी कम, मात्र ₹8,000 महीना वेतन दिया जा रहा है।
- इस भीषण महंगाई में इतने कम वेतन में परिवार का भरण-पोषण करना उनके लिए नामुमकिन हो गया है।
अपनी इन समस्याओं और रोके गए वेतन से नाराज कर्मचारियों ने अस्पताल परिसर में जमकर प्रदर्शन किया और अपनी मांगों को लेकर कलेक्टर के नाम एक ज्ञापन भी सौंपा है।

विवाद की जड़: पुरानी कंपनी का विवादित मैनेजर फिर रखा काम पर
जिला अस्पताल प्रशासन ने व्यवस्थाएं सुधारने के नाम पर पिछले 3 सालों में यह तीसरी बार ठेका बदला है। वर्तमान कंपनी ‘श्रीजी मैनपॉवर’ के पास जिला अस्पताल के 124 सहित पूरे जिले में कुल 184 कर्मचारियों की जिम्मेदारी है।
हड़ताली कर्मचारियों का कहना है कि नई कंपनी का कोई भी जिम्मेदार प्रतिनिधि उनसे मिलने या बात करने नहीं आया। उल्टा, नई कंपनी ने पिछली ठेका कंपनी ‘सुरभि एंटरप्राइजेज’ के उसी विवादित मैनेजर को दोबारा काम पर रख लिया है, जिससे पहले भी वेतन कटौती को लेकर भारी विवाद चल रहा था। कर्मचारियों ने बताया कि पुरानी कंपनी उनका पिछला बकाया भी डकार कर बैठ गई है।
अस्पताल प्रबंधन पर उठ रहे सवाल: साल भर में दर्जन भर हड़तालें
कुप्रबंधन का आलम यह है कि आउटसोर्स और सफाई कर्मचारी पिछले एक साल में ही एक दर्जन से ज्यादा बार हड़ताल पर उतर चुके हैं। कर्मचारियों ने दो-टूक चेतावनी दी है कि जब तक उनका उचित वेतन नहीं मिलता और ठेका नीति पूरी तरह स्पष्ट नहीं होती, तब तक यह अनिश्चितकालीन हड़ताल जारी रहेगी।
सिविल सर्जन से नहीं हो पाया संपर्क इस पूरे मामले को लेकर जब अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. मालवी से संपर्क करने की कोशिश की गई, तो उनसे बात नहीं हो पाई।
‘झाबुआ पोस्ट’ (Jhabua Post) यह सवाल उठा रहा है और जानने का प्रयास कर रहा है कि आखिर ऐसी क्या वजह है कि हर साल सफाई कर्मचारी हड़ताल पर उतरने को मजबूर होते हैं? कर्मचारियों द्वारा लगाए जाने वाले आरोपों और उनकी जायज मांगों को हल करने में जिला अस्पताल प्रबंधन बार-बार नाकाम क्यों साबित हो रहा है?
कर्मचारी तील साल लगातार अपने मेहनत और पीएफ के लिए हड़ताल करते हैं । हर बार कुछ दिनों के काम ठप रहता है । वेतन समय पर नहीं मिलना, वेतन तय दर से कम मिलना और पीएफ कटौती की शिकायत इन कर्मचारीियों की होती है । झाबुआ जिला अस्पताल के होने वाले आउटसोर्सिंग ठेके में राजनीतिक दखल भी होता है । पर्दे के पीछे से पूरा खेल चलता है । सवाल यही है कि हर साल इन कर्माचारियों के हड़ताल पर क्यों उतरना पड़ता है, जो अनुबंध होता है, शर्ते तय होती उनका पालन अस्पताल प्रबंधन क्यों नहीं करवा पाता है । क्या पर्दे के पीछे की मित्रता इसकी वजह है ।
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