Dhar : किसान कर्ज लेता है, पसीना बहाता है और खेतों में बीज के साथ अपने सपने बोता है। लेकिन बाजार में बैठे मुनाफे के सौदागर चंद रुपयों के लिए इन सपनों को कैसे रौंद देते हैं, इसकी एक बेहद खौफनाक और शर्मनाक तस्वीर धार जिले के बदनावर तहसील से सामने आई है।
सिस्टम की नींद तब तक नहीं टूटती, जब तक कि कोई अन्नदाता अपनी जान पर ना खेल जाए। दत्तीगारा गांव के किसान के साथ भी यही हुआ। नकली दवा बिकी, फसल बर्बाद हुई, और जब न्याय मांगने गया तो गालियां मिलीं। मजबूरी में किसान ने जहर पी लिया, तब जाकर हमारे सरकारी महकमों ने कागजी घोड़े दौड़ाने शुरू किए।

Dhar में दवा नहीं ‘जहर’ बेचा, शिकायत पर मिला अपमान
धार जिले के ग्राम दत्तीगारा के किसान प्रहलादसिंह राठौर ने अपनी 10 बीघा जमीन में सोयाबीन बोई थी। बीज उपचार के लिए कानवन स्थित ‘महावीर इंटरप्राइजेस’ से ‘बरदान’ नाम की दवा खरीदी। लेकिन यह दवा नहीं, फसल के लिए जहर साबित हुई। 10 बीघा में एक भी दाना ठीक से अंकुरित नहीं हुआ। इसी गांव के 35 अन्य किसानों का भी यही हाल हुआ।
जब खून के आंसू रोता हुआ किसान प्रहलादसिंह दुकानदार दिनेश जैन के पास शिकायत लेकर पहुंचा, तो सुनवाई तो दूर, उल्टे उसे भद्दी गालियां और अभद्र भाषा सुनने को मिली। फसल का नुकसान और ऊपर से सरेआम अपमान. इस बेबसी से टूटकर किसान ने उसी कीटनाशक दुकान से दवा उठाकर पी ली। हड़कंप मच गया और आनन-फानन में किसान को धार के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां वह जिंदगी और मौत के बीच झूल रहा है।
अब ‘खानापूर्ति’ की रफ्तार देखिए
जैसे ही किसान अस्पताल के बिस्तर पर पहुंचा, गहरी नींद में सोए कृषि विभाग को अचानक याद आया कि उनकी भी कोई जिम्मेदारी है।
- आनन-फानन में कानवन की दुकान पर छापा मारा गया।
- दुकान का कीटनाशी विक्रय लाइसेंस झटके में निलंबित कर दिया गया।
- ‘बरदान’ दवा का पूरा स्टॉक जब्त कर लिया गया और गुणवत्ता जांच के लिए सैंपल फरीदाबाद लैब भेज दिए गए।
सवाल यह उठता है कि क्या कृषि विभाग का काम सिर्फ तब कार्रवाई करना है जब कोई किसान मौत के मुहाने पर पहुंच जाए? बुवाई के सीजन से पहले बाजार में बिक रहे इस ‘जहर’ की सैंपलिंग और चेकिंग क्यों नहीं की गई?
FIR तो हो गई, लेकिन बर्बाद फसल का क्या?
कृषि विभाग की जांच के बाद कानवन थाने में पुलिस ने कीटनाशी अधिनियम की धारा 29 और BNS 2023 की धारा 318 (3) (धोखाधड़ी) के तहत दो लोगों पर FIR दर्ज की है:
- दिनेश जैन: (प्रोपराइटर, महावीर इंटरप्राइजेस, कानवन)
- राजकुमार चौधरी: (प्रोपराइटर, गुजरात बायो इन्सेक्टीसाइड, इंदौर)
प्रशासन बड़े-बड़े दावे कर रहा है कि किसानों के हितों से खिलवाड़ करने वाले किसी भी व्यक्ति या कंपनी को बख्शा नहीं जाएगा। लेकिन जो सबसे बड़ा सवाल है, वो अब भी वहीं खड़ा है।
अमानक दवा बनाने वाली कंपनी और बेचने वाले डीलर पर एफआईआर तो हो गई, लेकिन प्रहलादसिंह राठौर की 10 बीघा की बर्बाद फसल का मुआवजा कौन देगा? उन 35 अन्य किसानों के नुकसान की भरपाई क्या कृषि विभाग अपनी जेब से करेगा? सीजन तो हाथ से निकल गया, क्या एफआईआर के कागज खेत में बोने से सोयाबीन उग आएगी?
जब तक बाजार में बैठे इन जालसाजों पर सिर्फ कागजी कार्रवाई की जगह इनकी संपत्तियां नीलाम कर किसानों को मुआवजा देने का कानून नहीं बनेगा, तब तक रोज कोई न कोई किसान ऐसे ही ठगा जाता रहेगा और सिस्टम सिर्फ तमाशा देखेगा।
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