NSA Action Jhabua जिले में गंभीर अपराधों और गुंडागर्दी पर अंकुश लगाने के लिए पुलिस और प्रशासन ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। इसी कड़ी में सोमवार (03 अगस्त 2026) को एक अपराधी पर NSA Action Jhabua (राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम) के तहत बड़ी निरोधात्मक कार्रवाई की गई है। कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी डॉ. योगेश तुकाराम भरसट ने पुलिस अधीक्षक (SP) के प्रतिवेदन पर कालीदेवी थाना क्षेत्र के ग्राम वागनेरा निवासी परबल/प्रबल उर्फ अश्वीन पिता जुवानसिंह मेडा (26 वर्ष) पर NSA लगाने के आदेश जारी किए हैं।

NSA Action Jhabua: कट्टे के साथ रील बनाई थी, हत्या के प्रयास और लूट के मामले दर्ज
पुलिस अधीक्षक झाबुआ द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट के अनुसार, आरोपी प्रबल मेडा साल 2015 से लगातार गंभीर आपराधिक गतिविधियों को अंजाम दे रहा था। इस हिस्ट्रीशीटर के खिलाफ हत्या के प्रयास, मारपीट, लूट, अपहरण, बलवा, चोरी और अवैध हथियार रखने जैसे कई गंभीर आपराधिक प्रकरण (केस) दर्ज हैं।
सबसे ज्यादा चिंताजनक बात यह थी कि आरोपी प्रबल लगातार सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर अवैध हथियारों के साथ अपनी फोटो और वीडियो (रील) साझा करता था। इन वीडियोज का मकसद इलाके में अपना खौफ कायम करना था, जिससे आम जनता में भारी भय और असुरक्षा का माहौल बन गया था और क्षेत्र की लोक व्यवस्था (Public Order) बिगड़ने का खतरा पैदा हो गया था।
NSA Action Jhabua: कलेक्टर का सख्त आदेश, 3 माह के लिए जाएगा इंदौर जेल
जिला दंडाधिकारी डॉ. भरसट ने पुलिस की रिपोर्ट और रिकॉर्ड का गहन परीक्षण करने के बाद यह स्पष्ट पाया कि आरोपी की गतिविधियां समाज और शांति के लिए बड़ा खतरा हैं। चूंकि सामान्य कानूनी प्रक्रिया से उसकी गतिविधियों पर तुरंत रोक लगाना संभव नहीं लग रहा था, इसलिए लोक व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह सख्त कदम उठाया गया।
मध्य प्रदेश शासन, गृह विभाग की हालिया अधिसूचना (1 जुलाई 2026) के तहत शक्तियों का प्रयोग करते हुए, कलेक्टर ने आरोपी प्रबल को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम, 1980 की धारा 3(2) के तहत आदेश की तारीख से तीन महीने (3 माह) के लिए निरुद्ध (हिरासत में) करने के आदेश जारी किए हैं। NSA Action Jhabua के इस आदेश के तहत अब आरोपी को कड़ी सुरक्षा में ‘केंद्रीय जेल, इंदौर’ भेजा जाएगा।
कानूनी अधिकार भी रहेगा उपलब्ध
जिला दंडाधिकारी ने एसपी झाबुआ को इस आदेश के तुरंत क्रियान्वयन (Implementation) और दस्तावेजों की तामीली के निर्देश दिए हैं। साथ ही, अनुमोदन के लिए फाइल राज्य शासन (गृह विभाग) को भेजी जाएगी। हालांकि, कानूनी प्रक्रिया के तहत आरोपी को राज्य शासन, भारत सरकार के गृह मंत्रालय और सलाहकार बोर्ड के समक्ष अपना पक्ष रखने का वैधानिक अधिकार प्राप्त रहेगा।
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