भोपाल: राजधानी भोपाल में निजी स्कूलों द्वारा सरकारी आदेशों की धज्जियां उड़ाने और मनमाने ढंग से फीस वृद्धि व ड्रेस-किताबों के नाम पर लूट मचाने के खिलाफ भोपाल पालक संघ ने मोर्चा खोल दिया है। शुक्रवार को पालक संघ की भोपाल इकाई के सदस्यों ने जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) कार्यालय पहुंचकर जमकर विरोध प्रदर्शन किया और कलेक्टर के आदेशों का सख्ती से पालन कराने की मांग की।

कलेक्टर के आदेश बेअसर, साठ-गांठ का आरोप
पालक संघ का आरोप है कि राजधानी के निजी स्कूल कलेक्टर के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद अभिभावकों पर किसी एक विशेष दुकान से ही किताबें, कॉपियां और यूनिफॉर्म खरीदने का दबाव बना रहे हैं। संघ ने जिला शिक्षा अधिकारी और निजी स्कूल संचालकों के बीच ‘साठ-गांठ’ का गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि विभाग जानबूझकर इन स्कूलों पर नकेल नहीं कस रहा है।
फीस में मनमानी और स्टेशनरी माफिया का खेल
अभिभावकों का कहना है कि स्कूलों ने न केवल फीस में अवैध रूप से बढ़ोतरी की है, बल्कि कमीशन के खेल में पालकों की जेब पर भारी बोझ डाल रहे हैं। सरकारी नियम कहते हैं कि स्कूल किसी दुकान विशेष का नाम नहीं ले सकते, लेकिन धरातल पर स्थिति इसके उलट है।
विभाग की सफाई: जांच के लिए टीमें गठित
मामले को बढ़ता देख जिला शिक्षा अधिकारी ने स्पष्ट किया कि विभाग कार्रवाई कर रहा है। उन्होंने बताया:
- नोटिस जारी: जिन स्कूलों ने जनवरी की तय समय सीमा में अपनी फीस और पुस्तकों की सूची सार्वजनिक नहीं की है, उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं।
- निगरानी दल: कलेक्टर के निर्देशानुसार, एसडीएम (SDM) की अध्यक्षता में अलग-अलग टीमें गठित की गई हैं जो स्कूलों और दुकानों की आकस्मिक जांच करेंगी।
- शिकायत की अपील: अधिकारियों ने पालकों से अपील की है कि वे दबाव बनाने वाले स्कूलों के खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज कराएं ताकि दंडात्मक कार्रवाई की जा सके।





