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Datia Bypoll बीजेपी का दांव; क्या ‘मंत्रिमंडल’ के डर से हाईकमान ने किनारे किए मिश्रा जी?

Datia bypoll : सियासत में कब किसका सिक्का चल जाए और कब कोई अर्श से फर्श पर आ गिरे, कहा नहीं जा सकता। मध्यप्रदेश के दतिया उपचुनाव (Datia By-election) को लेकर बीजेपी ने एक ऐसा ही सियासी धमाका किया है, जिसने प्रदेश की राजनीति में भूचाल ला दिया है। टिकट की पूरी आस लगाए बैठे…

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Datia bypoll : सियासत में कब किसका सिक्का चल जाए और कब कोई अर्श से फर्श पर आ गिरे, कहा नहीं जा सकता। मध्यप्रदेश के दतिया उपचुनाव (Datia By-election) को लेकर बीजेपी ने एक ऐसा ही सियासी धमाका किया है, जिसने प्रदेश की राजनीति में भूचाल ला दिया है।

टिकट की पूरी आस लगाए बैठे प्रदेश के कद्दावर नेता और पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा के हाथ निराशा लगी है। बीजेपी हाईकमान ने उनका पत्ता साफ करते हुए आशुतोष तिवारी को दतिया से अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया है। आशुतोष तिवारी पूर्व में हाउसिंग बोर्ड के चेयरमैन और संगठन मंत्री की जिम्मेदारी निभा चुके हैं।

दतिया में 30 जुलाई को मतदान होना है और 3 अगस्त को नतीजे आएंगे। यह उपचुनाव कांग्रेस विधायक राजेन्द्र भारती की विधायकी निरस्त होने के बाद हो रहा है।

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Datia Bypoll माफी मांगी, फॉर्म खरीदा… फिर भी नहीं पसीजा हाईकमान

नरोत्तम मिश्रा को पूरा ओवर-कॉन्फिडेंस था कि पार्टी दतिया से उन्हीं को मैदान में उतारेगी।

  • राजेन्द्र भारती की विधायकी शून्य होते ही मिश्रा जी एकदम से ‘एक्टिव मोड’ में आ गए थे।
  • चुनाव की तैयारियां शुरू हो चुकी थीं, नामांकन का फॉर्म तक खरीद लिया गया था।
  • पिछले चुनाव में जनता की जो नाराजगी थी, उसे दूर करने के लिए नरोत्तम मिश्रा ने दो जनसभाएं कीं और मंच से बाकायदा हाथ जोड़कर जनता से अपनी पुरानी गलतियों की माफी तक मांग ली थी। लेकिन, लगता है दिल्ली में बैठे आकाओं ने पहले ही उनकी सियासी ‘छुट्टी’ तय कर रखी थी।
Datia bypoll- दतिया के एक कार्यक्रम में बीजेपी नेता नरोत्तम मिश्रा

2020 में निभाई थी सरकार बनवाने में अहम भूमिका, अब दरकिनार

आखिर 2020 में कांग्रेस के 22 विधायकों का पाला बदलवाकर शिवराज सरकार बनवाने वाले इस ‘किंगमेकर’ को पार्टी ने दूध में से मक्खी की तरह बाहर क्यों निकाल फेंका? राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो इसके पीछे एक गहरी सियासी चाल है:

  • ‘सुपर सीएम’ बनने का खतरा: नरोत्तम मिश्रा का कद बहुत बड़ा है। अगर उन्हें टिकट मिलता और वे जीत जाते, तो मोहन यादव सरकार में उन्हें कोई न कोई भारी-भरकम मंत्री पद (जैसे गृह या वित्त) देना ही पड़ता।
  • नई लीडरशिप का फार्मूला: बीजेपी अभी एमपी में सेकंड लाइन लीडरशिप (मोहन यादव, वीडी शर्मा) को सेट कर रही है। ऐसे में नरोत्तम जैसे कद्दावर और मुखर नेता की मंत्रिमंडल में एंट्री से सत्ता का ‘बैलेंस’ बिगड़ सकता था। हाईकमान किसी भी नए ‘पावर सेंटर’ को पनपने नहीं देना चाहता।

6 बार के विधायक, रसूखदार मंत्री,फिर कैसे ढह गया नरोत्तम का किला?

नरोत्तम मिश्रा का राजनीतिक सफर कोई छोटा-मोटा नहीं रहा है। वे 6 बार के विधायक रह चुके हैं। डबरा से तीन बार (1990, 1998, 2003) और दतिया से तीन बार (2008, 2013, 2018) चुनाव जीत चुके हैं।

  • पोर्टफोलियो का अंबार: शिवराज सरकार में वे हमेशा ‘नंबर 2’ की हैसियत में रहे। गृह, जेल, विधि-विधायी, स्वास्थ्य, जल संसाधन और जनसंपर्क जैसे मलाईदार और ताकतवर विभाग उनके पास रहे।
  • 2023 में मिली करारी हार: पिछले विधानसभा चुनाव में जनता ने उनके अहंकार को तोड़ा और कांग्रेस के राजेन्द्र भारती ने उन्हें करीब 2400 वोटों से पटखनी दे दी। हार के बाद से ही मिश्रा जी बिल्कुल शांत और ‘सियासी वनवास’ में नजर आ रहे थे।

हमेशा विवादों और आरोपों से रहा नाता

अपने बयानों और बेबाकी के लिए सुर्खियां बटोरने वाले नरोत्तम मिश्रा का विवादों से चोली-दामन का साथ रहा है:

  1. पेड न्यूज मामला (Paid News Case): 2008 के चुनाव में उन पर ‘पेड न्यूज’ का गंभीर आरोप लगा था। 2017 में चुनाव आयोग ने उन्हें 3 साल के लिए चुनाव लड़ने के अयोग्य तक घोषित कर दिया था, हालांकि बाद में उन्हें कोर्ट से राहत मिल गई।
  2. बॉलीवुड और बायकॉट: गृहमंत्री रहते हुए वे कानून-व्यवस्था से ज्यादा बॉलीवुड फिल्मों के बायकॉट, दीपिका पादुकोण के कपड़ों (पठान विवाद) और वेब सीरीज के सीन पर आपत्ति जताने के लिए नेशनल मीडिया में छाए रहे। स्थानीय मुद्दों से यह दूरी भी उनकी हार का कारण बनी।
  3. अहंकार का आरोप: विपक्षी और खुद उनकी पार्टी के कई नेता दबी जुबान में मानते थे कि सत्ता के नशे में उनका रवैया बेहद सख्त और अहंकारी हो गया था।

अब जब टिकट कट चुका है, तो सवाल यह है कि नरोत्तम मिश्रा का अगला कदम क्या होगा? क्या वे आशुतोष तिवारी के लिए ईमानदारी से वोट मांगेंगे, या दतिया में कोई नया ‘गुल’ खिलेगा? सियासत की बिसात बिछ चुकी है, ऊंट किस करवट बैठेगा, यह तो 3 अगस्त को ही पता चलेगा।

बाकी तो जो है सो है ही ।

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संस्थापक और संपादक है, 15 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं । नेशनल,रीजनल चैनल में रिपोर्टिंग का अनुभव । डिजिटल पत्रकार के रूप मे भी सक्रिय हैं.

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