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झाबुआ पॉक्सो कोर्ट में पेंडेंसी का अंबार, फास्ट-ट्रैक के बावजूद 495 मामले लंबित

झाबुआ पॉक्सो कोर्ट. बच्चों के खिलाफ होने वाले यौन अपराधों (POCSO) पर त्वरित न्याय के लिए बनाई गई फास्ट-ट्रैक अदालतों (FTSC) की असली तस्वीर सामने आ गई है। झाबुआ जिले में न्याय की रफ्तार कितनी ‘फास्ट’ है, इसके चौंकाने वाले आंकड़े खुद केंद्र सरकार ने लोकसभा में रखे हैं। केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्री अर्जुन…

झाबुआ पॉक्सो कोर्ट में पेंडेंसी का अंबार

झाबुआ पॉक्सो कोर्ट. बच्चों के खिलाफ होने वाले यौन अपराधों (POCSO) पर त्वरित न्याय के लिए बनाई गई फास्ट-ट्रैक अदालतों (FTSC) की असली तस्वीर सामने आ गई है। झाबुआ जिले में न्याय की रफ्तार कितनी ‘फास्ट’ है, इसके चौंकाने वाले आंकड़े खुद केंद्र सरकार ने लोकसभा में रखे हैं।

केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक, मध्य प्रदेश में कुल 67 फास्ट-ट्रैक विशेष अदालतें काम कर रही हैं, जिनमें 56 विशेष पॉक्सो अदालतें हैं। लेकिन अगर फोकस आदिवासी बहुल झाबुआ जिले पर किया जाए, तो हालात चिंताजनक नजर आते हैं।

झाबुआ पॉक्सो कोर्ट में पेंडेंसी का अंबार

झाबुआ पॉक्सो कोर्ट निपटारे से ज्यादा पेंडिंग मामले

झाबुआ जिले में यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम के तहत दर्ज मामलों के त्वरित निपटान के लिए केवल एक झाबुआ पॉक्सो कोर्ट (FTSC) कार्यरत है। लोकसभा में पेश किए गए पिछले दो सालों के आधिकारिक आंकड़ों पर नज़र डालें तो मामलों के निपटारे से ज्यादा पेंडेंसी (लंबित मामले) का अंबार लगा हुआ है:

  • वर्ष 2024: झाबुआ पॉक्सो कोर्ट में कुल 266 नए मामले दर्ज हुए, जबकि केवल 135 मामलों का ही निपटारा हो सका। नतीजतन, साल के अंत तक लंबित मामलों की संख्या 418 पर पहुंच गई।
  • वर्ष 2025: इस साल 231 नए मामले दर्ज किए गए और 154 मामलों को निपटाया गया। लेकिन पेंडेंसी का बैकलॉग कम होने के बजाय बढ़ गया और 31 दिसंबर 2025 तक लंबित मामलों का आंकड़ा 495 पर पहुंच गया।

आंकड़े साफ गवाही दे रहे हैं कि झाबुआ पॉक्सो कोर्ट में मुकदमों का दबाव लगातार बढ़ रहा है और निपटारे की गति उस अनुपात में नहीं है, जिस वजह से पीड़ितों को न्याय के लिए लंबा इंतज़ार करना पड़ रहा है।

रतलाम में दो कोर्ट, फिर भी 696 केस पेंडिंग और आलीराजपुर ‘खाली’

पड़ोसी जिलों की स्थिति भी कोई खास बेहतर नहीं है।

  • रतलाम जिला: यहां एक विशेष पॉक्सो अदालत सहित दो एफटीएससी (FTSC) कार्यरत हैं। रतलाम में साल 2024 में 472 मामले दर्ज हुए और 260 निपटाए गए। वहीं 2025 में 343 मामले आए और 338 निपटाए गए। लेकिन 2025 के अंत तक रतलाम में कुल 696 मामले लंबित पड़े थे।
  • अलीराजपुर जिला: सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि अलीराजपुर जैसे संवेदनशील जिले में फिलहाल कोई भी फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट (FTSC) काम ही नहीं कर रहा है।

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संस्थापक और संपादक है, 15 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं । नेशनल,रीजनल चैनल में रिपोर्टिंग का अनुभव । डिजिटल पत्रकार के रूप मे भी सक्रिय हैं.

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