Jhabua जिले में पीएम श्री कन्या विद्यालय की प्राचार्य सीमा त्रिवेदी पर छात्र संगठन के राजनैतिक कार्यक्रम में शामिल होने के आरोप को लेकर बवाल मचा हुआ है। यह विवाद तब उभरा जब आदर्श मॉडल कॉलेज में एबीवीपी (अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद) की कार्यकारिणी की घोषणा के दौरान प्राचार्य त्रिवेदी की उपस्थिति पर छात्रों ने आपत्ति जताई।
छात्रों का विरोध और आरोप:
छात्रों का कहना है कि प्राचार्य शासकीय पद पर रहते हुए राजनीतिक गतिविधियों में शामिल हो रही हैं, जो शासकीय सेवा आचरण नियमों का उल्लंघन है। छात्रों का आरोप है कि प्राचार्य ने विरोध करने पर उन्हें एफआईआर की धमकी दी। विरोध स्वरूप छात्रों ने जनजातीय कार्य विभाग की सहायक आयुक्त निशा मेहरा और जिला शिक्षा अधिकारी रूप सिंह बामनिया को ज्ञापन सौंपा है, जिसमें प्राचार्य पर कार्रवाई की मांग की गई है।
Jhabua एबीवीपी में फूट:

इस विवाद के बीच एबीवीपी की झाबुआ इकाई में भी अंदरूनी तनाव सामने आया है। निलेश गणावा को जिला संयोजक पद पर होने का दावा कर रहे हैं, और वे ही एबीवीपी के कार्यक्रम में प्राचार्य के जाने का विरोध भी कर रहे हैं । जबकि एबीवीपी झाबुआ ने प्रेस विज्ञप्ति जारी की , जिसमें निलेश गणावा को संगठन का काम करने मना करने की बात कही गई है । हालांकि पत्र पर ना तो किसी नाम है ना कि पद का विवरण ।
हाल ही में झाबुआ पीजी कॉलेज और आदर्श कॉलेज में नई कार्यकारिणी घोषित की गई। इसके जवाब में निलेश गणावा ने छात्र शक्ति संगठन के नाम से एक नई छात्र कार्यकारिणी बनाई है, जिससे संगठन में दो फाड़ हो गए हैं । अब छात्र कार्यकर्ता किससे के साथ जाएं वे असमंजस की स्थिति में है ।
अधिकारी मामले में बोलने बच रहे ।
जिला शिक्षा अधिकारी और जनजातीय कार्य विभाग की सहायक आयुक्त दोनों ने जांच के बाद उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है। हालांकि, उन्होंने कैमरे पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।
सीमा त्रिवेदी का कहना बिरसा मुंडा जयंती कार्यक्रम में शामिल होने गई थी ।
प्राचार्य सीमा त्रिवेदी ने कहा कि वे बिरसा मुंडा जयंती के तहत आयोजित जनजातीय गौरव पखवाड़े के कार्यक्रम में गई थीं और छात्रों के आग्रह पर कार्यकारिणी घोषणा के समय उपस्थित हो गईं। हालांकि, उन्होंने इस विवाद पर कोई विस्तृत टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।
कांग्रेस ने भी कार्रवाई की मांग

कांग्रेस जिलाध्यक्ष प्रकाश रांका ने इस घटना को लेकर कहा कि भाजपा और उससे जुड़े संगठन सरकारी कर्मचारियों का राजनीतिक उपयोग कर रहे हैं, जो शासकीय सेवा के आचरण के खिलाफ है। उन्होंने प्राचार्य के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
मुख्य सवाल:
- क्या शासकीय सेवा में रहते हुए किसी कर्मचारी का राजनैतिक कार्यक्रम में भाग लेना उचित है?
- क्या यह मामला निष्पक्ष जांच के बाद सुलझेगा या इसे दबाने की कोशिश होगी?
जांच जारी है, लेकिन यह मामला न केवल प्रशासनिक दृष्टि से, बल्कि शिक्षा और राजनीति के बीच संतुलन पर भी गंभीर सवाल खड़ा कर रहा है।
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