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ड्रैगन फ्रूट की खेती : रतलाम के युवा किसान को मिल रहा मुनाफा

रतलाम। जिले में स्वास्थ्यवर्धक और स्वादिष्ट ड्रैगन फ्रूट की खेती का क्षेत्र बढ़ता जा रहा है। राज्य उद्यानिकी मिशन के अंतर्गत अनुदान सहायता और उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों के प्रोत्साहन ने इस क्षेत्र में कई किसानों को ड्रैगन फ्रूट की खेती के प्रति आकर्षित किया है। रतलाम जिले के डेलनपुर गाँव के युवा किसान गगन…

ड्रैगन फ्रूट की खेती

रतलाम। जिले में स्वास्थ्यवर्धक और स्वादिष्ट ड्रैगन फ्रूट की खेती का क्षेत्र बढ़ता जा रहा है। राज्य उद्यानिकी मिशन के अंतर्गत अनुदान सहायता और उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों के प्रोत्साहन ने इस क्षेत्र में कई किसानों को ड्रैगन फ्रूट की खेती के प्रति आकर्षित किया है। रतलाम जिले के डेलनपुर गाँव के युवा किसान गगन पाटीदार इस खेती के सफल उदाहरण बने हैं, जो पिछले तीन वर्षों से ड्रैगन फ्रूट की खेती कर रहे हैं और अच्छी कमाई भी कर रहे हैं।

उद्यानिकी मिशन से मिली सहायता, कलेक्टर ने की प्रशंसा

राज्य उद्यानिकी मिशन के तहत गगन पाटीदार को 1 लाख 10 हजार रुपये का अनुदान भी प्राप्त हुआ है, जिसने उनकी खेती को और आसान बना दिया। बुधवार को कलेक्टर श्री राजेश बाथम और जिला पंचायत के सीईओ श्री श्रृंगार श्रीवास्तव ने गगन की ड्रैगन फ्रूट की खेती का निरीक्षण किया और उनके प्रयासों की सराहना की।

ड्रैगन फ्रूट की खेती से लाभ और इंटरक्रॉपिंग की विशेषता

गगन बताते हैं कि ड्रैगन फ्रूट की खेती में अच्छा मुनाफा मिलता है, जिससे वे प्रति बीघा लगभग दो लाख रुपये का लाभ कमा रहे हैं। शुरुआत में एक बीघा में खेती शुरू की और अब छह बीघा में ड्रैगन फ्रूट के पौधे लगाए हैं। ड्रैगन फ्रूट की खेती के साथ वे बची हुई जमीन में लहसुन और डालर चने की इंटरक्रॉपिंग भी कर रहे हैं।

रतलाम का ड्रैगन फ्रूट पहुंच रहा दिल्ली मुंबई ।

गगन के अनुसार, ड्रैगन फ्रूट की खेती में जून से लेकर नवंबर तक हर साल लगभग छह बार हार्वेस्टिंग होती है। पहले साल में प्रत्येक पोल से 5-6 किलोग्राम फल प्राप्त होता है, जो दूसरे और तीसरे साल में बढ़कर 10-20 किलोग्राम तक हो जाता है। उनकी उपज मुंबई, दिल्ली, कोटा, जयपुर, और उदयपुर जैसे शहरों में जाती है, जहां के व्यापारी स्वयं वाहनों के माध्यम से फ्रूट मंगवाते हैं।

नई तकनीक सीखकर मुफ्त में दे रहे हैं प्रशिक्षण

गगन पाटीदार ने ड्रैगन फ्रूट की खेती की तकनीक भारत के विभिन्न हिस्सों में जाकर सीखी है। अब वे स्थानीय किसानों को नि:शुल्क प्रशिक्षण भी प्रदान करते हैं, जिससे अन्य किसान भी इस लाभदायक खेती को अपना सकें। वे अपने अनुभव साझा कर किसानों को ड्रैगन फ्रूट की खेती के लिए प्रेरित कर रहे हैं।

गगन की यह पहल न केवल उनकी आर्थिक स्थिति को सुधार रही है बल्कि अन्य किसानों के लिए भी एक प्रेरणा बनी है।

ड्रैगन फ्रूट की खेती

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