बामनिया रेलवे स्टेशन पर अंधे कत्ल का, झाबुआ पुलिस ने किया खुलासा

बामनिया रेलवे स्टेशन पर मिली लाश और अंधे कत्ल का खुलासा किया है।

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बहन के प्रेम-प्रसंग से खफा चचेरे भाइयों ने रची थी खूनी साजिश; झाबुआ एसपी देवेंद्र पाटीदार ने किया ‘अंधे कत्ल’ का पर्दाफाश

झाबुआ/पेटलावद।

मध्य प्रदेश के झाबुआ जिले में बामनिया रेलवे स्टेशन के पास मिली एक अज्ञात युवक की लाश की गुत्थी को पुलिस ने सुलझा लिया है। जिसे शुरुआत में एक साधारण रेल दुर्घटना दिखाने की कोशिश की गई थी, वह असल में ऑनर किलिंग का मामला निकला। झाबुआ पुलिस अधीक्षक (SP) देवेंद्र पाटीदार ने मीडिया के सामने इस सनसनीखेज अंधे कत्ल का पर्दाफाश करते हुए दो मुख्य आरोपियों को सलाखों के पीछे भेज दिया है। हत्या की यह खौफनाक साजिश मृतक के प्रेम-प्रसंग से नाराज लड़की के चचेरे भाइयों ने रची थी।

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झाबुआ में अंधे कत्ल का खुलासा, आरोपी गिरफ्तार ।

मामला पेटलावद थाना क्षेत्र का है। बीती 24 मई 2026 को पुलिस को सूचना मिली थी कि बामनिया रेलवे स्टेशन के बाहर सड़क किनारे एक 20 वर्षीय युवक का शव संदिग्ध हालत में पड़ा है। मृतक की शिनाख्त सुखराम (पिता नाहरसिंह निनामा), निवासी पिपलीपाड़ा के रूप में हुई।  मजदूरी कर परिवार का सहारा बना हुआ था। जब पुलिस ने शव का बारीकी से निरीक्षण किया, तो उसकी पीठ और कूल्हों पर गंभीर चोटों के निशान मिले। इन निशानों ने पुलिस के मन में गहरे संदेह पैदा कर दिए। पुलिस ने फौरन भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103(1) के तहत अज्ञात हत्यारों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी।

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झाबुआ एसपी देवेंद्र पाटीदार जानकारी देते हुए।

​लड़की को पहले से था अनहोनी का अंदेशा

इस खूनी दास्तान के पीछे तीन महीने पुराना एक प्रेम प्रसंग छुपा हुआ था। सुकराम और ग्राम सातेर की एक युवती दोनों मजदूरी के दौरान एक-दूसरे के करीब आए थे। दोनों के बीच प्यार इस कदर परवान चढ़ा कि वे जीवन भर साथ रहने के सपने देखने लगे। लेकिन लड़की के परिवार को ये भनक लगी तो फिरे साजिश करवट लेने लगी । लड़की के घरवाले  उसकी शादी कहीं और तय करना चाहते थे।

​घटनाक्रम के मुताबिक, बीती 23 मई को सुकराम अपनी प्रेमिका से मिलने चोरी-छिपे उसके गांव सातेर गया था। इसकी भनक लड़की के चचेरे भाइयों (कजिन) देवीलाल सिंगाड और कालू सिंगाड को लग गई। बहन को किसी और के साथ देखना उनके तथाकथित पारिवारिक ‘सम्मान’ को ठेस पहुंचा गया। दोनों भाइयों के सिर पर खून सवार हो गया और उन्होंने अपने दो अन्य साथियों के साथ मिलकर सुकराम को रास्ते से हटाने की खौफनाक साजिश रच डाली।

​जंगल में पेड़ से बांधकर लट्ठ और पत्थरों से की बेरहमी

​साजिश के तहत चारों आरोपी सुकराम की तलाश में निकल पड़े। उन्होंने सुकराम को बामनिया रेलवे स्टेशन पर सोते हुए ढूंढ निकाला। वहां से चारों आरोपियों ने उसे दबोच लिया और जबरन पास के घने जंगल में ले गए। जंगल के सन्नाटे में आरोपियों ने सुकराम के ही गमछे से उसके दोनों हाथ एक पेड़ से बांध दिए, ताकि वह खुद का बचाव न कर सके और न ही वहां से भाग सके।

​इसके बाद आरोपियों ने क्रूरता की सारी हदें पार करते हुए लट्ठ (लाठियों) और भारी पत्थरों से उसकी पीठ और शरीर पर ताबड़तोड़ वार किए। सुकराम दर्द से चीखता रहा, रहम की भीख मांगता रहा, लेकिन चचेरे भाइयों का दिल नहीं पसीजा। अत्यधिक चोटें आने और आंतरिक रक्तस्राव के कारण सुकराम ने मौके पर ही दम तोड़ दिया।

​साजिश: हत्या को रेल दुर्घटना का रूप देने का प्रयास

​सुकराम की मौत के बाद आरोपियों ने कानून की आंखों में धूल झोंकने की शातिराना चाल चली। उन्होंने सोचा कि अगर लाश जंगल में मिली तो सीधे उन पर शक जाएगा। इसलिए, उन्होंने शव को अपनी मोटरसाइकिल पर बीच में लादा और रात के अंधेरे में बामनिया रेलवे स्टेशन के पास लाकर फेंक दिया। उनकी योजना इस हत्याकांड को एक पटरी पार करते समय हुई रेल दुर्घटना या ट्रेन से गिरकर हुई मौत का रूप देने की थी।

​कॉल डिटेल और मुखबिर की सूचना से खुली पोल

​मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए एसपी देवेंद्र पाटीदार, एएसपी प्रतिपाल सिंह महोबिया और एसडीओपी पेटलावद अनुरक्ति साबनानी ने घटनास्थल का दौरा किया था। थाना प्रभारी निर्भयसिंह भूरिया और चौकी प्रभारी हीरालाल मालीवाड के नेतृत्व में एक विशेष टीम और साइबर सेल को काम पर लगाया गया। पुलिस ने जब सुकराम के मोबाइल की कॉल डिटेल (CDR) खंगाली और तकनीकी साक्ष्य जुटाए, तो कड़ियां जुड़ती चली गईं।

​आखिरकार, 29 मई 2026 को सटीक मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने घेराबंदी कर मुख्य आरोपी देवीलाल सिंगाड (28 वर्ष) और कालू सिंगाड (33 वर्ष) को धर दबोचा। पुलिसिया पूछताछ और कड़ाई के आगे हत्यारे ज्यादा देर टिक नहीं सके और उन्होंने अपने दो अन्य साथियों के साथ मिलकर सुकराम की बेरहमी से हत्या करने का जुर्म कबूल कर लिया। पुलिस अब फरार चल रहे बाकी दो आरोपियों की तलाश में जुटी है।

सराहनीय कार्य: इस अंधे कत्ल का पर्दाफाश करने में थाना प्रभारी पेटलावद निर्भयसिंह भूरिया, चौकी प्रभारी बामनिया हीरालाल मालीवाड, प्रधान आरक्षक रविन्द्र अमलियार, आरक्षक राकेश डामोर, मनीष चारेल, दिनेश डोडियार और झाबुआ साइबर सेल टीम की अहम भूमिका रही।

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