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प्राइवेट स्कूलों की जानकारी अपलोड करने की तारीख बढ़ी, विभाग पारदर्शिता लाना चाहता है या केवल टाइम पास करना ।

प्राइवेट स्कूलों जानकारी अपलोड करने की तारीख बढ़ी, विभाग पारदर्शिता लाना चाहता है या केवल टाइम पास करना ।

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प्राइवेट स्कूलों में हर साल होने वाली फीस बढ़ोतरी की शिकायत को लेकर सरकार ने बड़ा फैसला लिया था । प्राइवेट स्कूलों को स्कूल की फीस और दूसरे विषयों की जानकारी स्कूली शिक्षा विभाग के पोर्टल पर अपलोड करने होगी । इसको लेकर स्कूल शिक्षा विभाग ने प्रदेश के सभी कलेक्टर को इस संबंध में कार्रवाई करने के निर्देश जारी किए । और पहले ये तारीख 8 जून तय की गई थी । अब इस तारीख को 24 जून के लिए बढ़ा दिया गया है ।

स्कूल शिक्षा विभाग की और से जारी आदेश में कहा गया है कि 8 जून तक सभी निजी स्कूल फीस और अन्य विषयों से जुड़ी जानकारी पोर्टल पर अपलोड करेंगे । इसके साथ ही कहा गया है कि फर्जी और डूप्लीकेट पाठ्य पुस्तकों को लेक प्रदेश के सभी जिलों में 30 जून तक विशेष अभियान चलाया जाएगा । किताबों में यदि प्रकाशक और विक्रेता ने कोई छेड़छाड़ की तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी । प्राइवेट स्कूलों की मनमानी रोकने के लिए विभाग की ओर से ये आदेश जारी किए गए हैं ।

सरकार के इस फैसले के बाद पालकों और अभिभावकों में एक उम्मीद की किरण जगी थी, निजी स्कूल संचालक अब अपनी मनमानी नहीं चला पाएंगे और जब सरकार के पोर्टल पर सारी जानकारी होगी तो पारदर्शिता आएगी । मनमाने तरीके से स्कूल की फीस नहीं ली जाएगी । अब इसकी तारीख आगे बढ़ा दी गई है , पोर्टल के सर्वर डाउन वजह बताई जा रही है, जिसकी वजह से स्कूल संचालक जानकारी अपलोड नहीं कर पाए ।

सवाल ये उठता है कि क्या सरकार का पोर्टल इतना कमजोर है कि प्रदेश के निजी स्कूलों की गतिविधियां भी सहन नहीं कर पाया । सच में सर्वर डाउन हो गया या फिर कोई और वजह है । सवाल ये भी उठ रहा है कि क्या स्कूल संचालकों को जानबुझ समय दिया जा रहा है । और पालकों और अभिभावकों के मन में सवाल ये भी है कि क्या पोर्टल पर अपलोड की जाने वाली जानकारी को सार्वजनिक किया जाएगा या फिर सरकार के कर्ताधर्ता और निजी स्कूल संचालक आपस में ही समझ लेंगे ।

प्राइवेट स्कूल को फीस और पाठ्यक्रम की जानकारी सार्वजनिक करने के निर्देश ।

क्योंकि इसके पहले निजी स्कूलों को फीस और पाठ्यक्रम को लेकर जानकारी स्कूल के बाहर सार्वजनिक करने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन उनका कितना पालन हुआ ये सभी जानते हैं । और निर्देशों का पालन नहीं होने की दशा में सरकार और विभाग ने क्या कार्रवाई की । कार्रवाई हुई तो किन पर हुई, और कार्रवाई को सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया । इस तरह के तमाम सवाल अभिभावक और पालकों के मन उठ रहे हैं ।

शिक्षा कभी सेवा के जरिया हुआ करता था लेकिन अब ये पूरी तरह से व्यवसाय बन गया है । गरीब व्यक्ति शहर की किसी बड़े निजी स्कूल में अपने बच्चे को पढ़ाने के बारे में सोच भी नहीं सकता । आस का तारा आरटीई के रियायत पर प्रवेश का तारा होता है, उसमें भी विभाग और स्कूल संचालकों की मिलभगत से कई तरह के खेल चलते हैं । और अन्य-अन्य गतिविधियों के नाम पर शुल्क वसूला जाता है ।

पालकों और अभिभवकों के मन एक सवाल ये भी उठता है कि जिन निजी स्कूलों में बड़े अधिकारियों के बच्चे पढ़ते हैं, क्या ऐसे स्कूल संचालक सामान्य अभिभावक या पालकों की शिकायत या परेशानी को गंभीरता से लेते हैं । खैर सभी को अब इंतजार

जून का हो चला है कि बिना तारीख बढ़े जानकारी पोर्टल पर अपलोड हो, और सार्वजनिक भी । लेकिन लगता है कि सरकार इस आदेश को निकालने में भी देरी कर चुकी है । जब शिक्षा सत्र 1 अप्रैल से शुरू हो ही चुका है, अधिकतर प्रवेश-पाठ्यक्रम को लेकर प्रक्रिया हो ही चुकी है, तो फिर 24 जून तक तारीख आगे बढ़ाने का कारण हो सकता है ।

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