बकरा-कुकड़ा के लपेटो, ‘बड़ा’ ती एवेरो, आदमी नवो, सोच वा के वाज !

बकरा-कुकड़ा के लपेटो, ‘बड़ा’ ती एवेरो, आदमी नवो, सोच वा के वाज !

malvi juto

बकरा-कुकड़ा पर तकरार । सरकार का नवा मुखिय़ा के मन में जाणे कई आई, बैठा बिठाया एक नवो तोतो पकड़ई दिदो , खुला में मांस- मटन नी बिकेगा । हो भई नी बिकेगा । खावा वाला के कई तकलीफ नी, जां मलेगा वां जाई ने लई आंवंगा । दारू- मटन का धंधा में प्रचार विज्ञापन कई जरूरत ज नी । मसाण में भी खुलेगा तो लोग वां भी पोंची जाएगा । पर वेचवा वाला भुंडा कईड़ा पड़ी रा । हम तो नी जावंगा । हम तो यां ज बैठागां, ने यां ज गंदगी फैलावंगा । बकरा-कुकड़ा- मछरी वारा घणा कई रा चली जांवा पर टांग कुण अड़ई रो नी मालम पड़ी री ।

टांग धोरा री आई री के कारा, भी या भी मालम नी पड़ी री । भाई साब कणी का खावा पिवा पर कणी की कई बंदिश नी, ओपतो परेनो ने भावतो खाणो, पर खावा पिवा पर सरकार का नियम कायदा का हिसाब से तो काम करनो पड़ेगा । सई वात है कि नी । वात भी कणी की सरकार का मुखिया की । तो फेर, हल्को पतलो आदमी के तो हमज भी आवे, पर लोग तो सरकार की नी हुणी रा, सरकार का लोग भी ऐसा ज वई ग्या, यूं तो एक से एक बल्लम पेलवान है, कोई हिंदू सम्राट बणी ने फिरे, तो कई युवा ह्रदय सम्राट पर, गांधी का उपेदश कोई देवा लागी जाए तो विचारधार फेर छोटी लागवा ली जाए ।

लोग तो नरी तरे की वाता करे । कोई कईरो कि हमाए पेला दुकान वास्ते 60 लाख ती जादा पईसा दीदा । वणा रो हिसाब कां । पेला री सरकार में धन हवा वई क्यो, कोई बी नवो आदमी आवे ने थोड़ा दन तो मन मारे फेर निकली जाए ठामड़ा होरवा, फेर कोई आवे मनवार, करे हाथाजोड़ी करे, जदी जाईने नवा आदमी रे हमज में आवे के यां रो लोग तो मिलनसार है । नवा आदमी के भी मन करे कणी को नुकसान करां, पर कई के जमाना में चमत्कार के ज नमस्कार है ।

बकरा-कुकड़ा के लपेटो, 'बड़ा' ती  एवेरो, आदमी नवो, सोच वा के वाज !

बकरा-कुकड़ा पर नवा आदमी ए चमत्कार यो वताड़ियो, के बकार-कुकड़ा के लपेटो, ने ‘बड़ा ती एवेरो’ । लोक कई रा के हाथी दांत खावा का अलग है, ने गणवा का अलग है । अणी मनक जमारा जनम लिदो है तो लोग गणवा रो मतलब तो जाणताज वेगा । एक दन धमक वताड़ी ने नवा आदमी है, आपणो काम जमई ली दो ।

अच्छा एक वात और मजा कि है । हाथे आवे पुलिस वारा के कोई मतलब नी, कोई बी लड़ाओ-कुटाओ,भले कई बी करो,…..वणा को भी सोचनो ठीक ज है, पाड़ा-पाड़ा की लड़ाई में बागड़ को नुकसान कुण करेगा । बारते उबा रई ने तमाशो देखो, जाणे कई रा वे के – नी भाई साब हमारी तो इच्छा ज नी थी, हमा लोगों ने जबरन घेरी ने लिया या ।

ई दन बी देखी लिदा, सरकार का मुखिया की वात री अधिकारी, नेता कई वखत ज नी करे, ऐसा तो कतराई हुन्ना बकता रे, आपणे तो अणी कान ती हुणनो ने वणी कान ती निकाल देणो । यां कुण देखवा आई रो । फिर टाईम टाईम बैंक वारा का भी हिसाब करणो पड़े, आपणी लड़ाई में वणा को मैंटनेंस क्यों खराब करनो । हां नी तो । सई वात है कि ।

बकरा-कुकड़ा पर नवा आदमी को चमत्कार फेर दूर से नमस्कार ।

सरकार तो केती रे,यां हूणे कूण, किने पड़ी, सरकार भी तो आपणो काम करिया के नी करिया, सब जोर जबरदस्ती छोटा आदमी पर थोड़ी कई यार, एतरो लोग भी अन्न खाई रा है । पण सरकार ऐलान करे ने कर्मचारी नी हूणे या टेंशन वारी वात है साब ।

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