मिड-डे मील योजना में लापरवाही: बच्चों को रोटियां हाथ में देने पर उठे सवाल

मिड-डे मील योजना में लापरवाही: बच्चों को रोटियां हाथ में देने पर उठे सवाल (झाबुआ):मध्य प्रदेश सरकार जहां अपने एक साल पूरा होने का जश्न मना रही है, वहीं सरकारी स्कूलों में मिड-डे मील योजना की बदहाली ने इसकी सच्चाई उजागर कर दी है। मेघनगर जनपद के खाल खांडवी हाई स्कूल में मिड-डे मील का…

मिड-डे मील योजना में लापरवाही

मिड-डे मील योजना में लापरवाही: बच्चों को रोटियां हाथ में देने पर उठे सवाल

(झाबुआ):
मध्य प्रदेश सरकार जहां अपने एक साल पूरा होने का जश्न मना रही है, वहीं सरकारी स्कूलों में मिड-डे मील योजना की बदहाली ने इसकी सच्चाई उजागर कर दी है। मेघनगर जनपद के खाल खांडवी हाई स्कूल में मिड-डे मील का वितरण अव्यवस्थित और अपमानजनक तरीके से किया जा रहा है।

स्कूल में देखा गया कि जिन बच्चों के पास अपने बर्तन थे, उन्हें भोजन थाली या कटोरे में दिया गया। लेकिन जिन बच्चों के पास बर्तन नहीं थे, उन्हें रोटियां हाथ में थमा दी गईं। बच्चों ने शिकायत की कि उन्हें घर से बर्तन लाने के लिए मजबूर किया जाता है, जबकि मिड-डे मील गाइडलाइन्स के अनुसार, बर्तनों की व्यवस्था स्कूल प्रशासन या स्वयं सहायता समूह की जिम्मेदारी होती है।

क्या कहती हैं मिड-डे मील की गाइडलाइन्स?

मिड-डे मील योजना के तहत बच्चों को पौष्टिक और गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराना स्कूल प्रशासन और संबंधित समूह की जिम्मेदारी होती है। यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि:

  1. भोजन स्वच्छ और निर्धारित पोषण मानकों के अनुरूप हो।
  2. भोजन वितरण के लिए उचित बर्तनों की व्यवस्था हो।
  3. भोजन की गुणवत्ता और मात्रा का निरीक्षण शिक्षकों द्वारा किया जाए।
मिड-डे मील योजना में लापरवाही

खाल खांडवी स्कूल का हाल

स्कूल प्रभारी का कहना है, “समूह ने थालियां बच्चों को दी थीं, लेकिन बच्चे उन्हें स्कूल नहीं लाते।” वहीं बच्चों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि उन्हें घर से बर्तन लाने के लिए कहा जाता है।
बच्चों ने यह भी शिकायत की कि उन्हें पर्याप्त भोजन नहीं मिलता। केवल दो रोटियां दी जाती हैं और दाल का स्वाद भी अच्छा नहीं होता।

गुणवत्ता जांच पर सवाल

भोजन की गुणवत्ता को लेकर जब स्कूल प्राचार्य से सवाल किया गया तो उन्होंने कहा, “हमारे शिक्षक रोजाना यही खाना खाते हैं।” लेकिन वितरण से पहले भोजन की गुणवत्ता की जांच क्यों नहीं होती, इस पर उन्होंने स्पष्ट जवाब देने से बचा।

मुद्दे उठाते सवाल

  • मिड-डे मील में पोषण और स्वच्छता की गारंटी देने की गाइडलाइन का पालन क्यों नहीं हो रहा?
  • बच्चों को बर्तन लाने के लिए क्यों मजबूर किया जा रहा है?
  • भोजन की गुणवत्ता और मात्रा को लेकर बच्चों की शिकायतों पर कार्रवाई क्यों नहीं होती?

सरकार की जिम्मेदारी

मध्य प्रदेश सरकार को इन गड़बड़ियों पर संज्ञान लेते हुए मिड-डे मील योजना की सख्त मॉनिटरिंग करनी चाहिए। बच्चों का पोषण और सम्मान सुनिश्चित करना इस योजना का मुख्य उद्देश्य है, जिसे लापरवाही की भेंट नहीं चढ़ने दिया जा सकता।

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