राजस्थान में पशुओं के बीच तेजी से फैल रहे लंपी वायरस का असर अब सीमावर्ती जिलों पर भी पड़ने लगा है। लंपी वायरस से पशुओं, विशेषकर गोवंश पर गंभीर असर हो रहा है, जिससे पशुपालकों में डर का माहौल है। इस खतरे से निपटने के लिए मध्य प्रदेश के नीमच जिले में नगर पालिका, पशु चिकित्सा विभाग और गऊ सेवा दल ने तत्परता दिखाते हुए आइसोलेशन वार्ड का निर्माण किया है और पशुओं के इलाज के लिए जरूरी व्यवस्थाएं की गई हैं।
50,000 से अधिक टीके उपलब्ध
पशु चिकित्सा विभाग को अब तक 50,000 से अधिक टीकों के डोज प्राप्त हो चुके हैं, जिनमें से करीब 7,000-8,000 टीके लगाए जा चुके हैं। विभाग का ध्यान खासतौर पर शहरी क्षेत्रों पर केंद्रित है, जहां वायरस के फैलने की आशंका अधिक है। उप संचालक पशु चिकित्सा विभाग, डॉ. कृष्ण कुमार शर्मा ने बताया कि जिले में लंपी वायरस का कोई मामला अभी सामने नहीं आया है, लेकिन पशुपालकों को सावधानी बरतने और पशुओं की देखभाल के लिए जागरूक किया जा रहा है।

लंपी वायरस के लक्षण और प्रभाव
लंपी वायरस से ग्रसित पशुओं के शरीर पर छोटे-छोटे उभार (कीलें) हो जाते हैं, जिससे उनकी शारीरिक क्षमता कमजोर हो जाती है। इसके परिणामस्वरूप वे खाना-पीना छोड़ देते हैं, जिससे उनकी सेहत में गिरावट आती है। वर्तमान में राजस्थान के चित्तौड़गढ़, प्रतापगढ़, झालावाड़ और अन्य इलाकों में यह वायरस तेजी से फैल रहा है, और वहां के पशुपालकों में भय का माहौल है।
आइसोलेशन वार्ड और उपचार की व्यवस्था
नीमच में पुराने चमड़ा कारखाने के पास स्थित गोशाला में एक आइसोलेशन वार्ड तैयार किया गया है, जहां संक्रमित पशुओं को रखा जा रहा है। गऊ सेवा दल के सदस्य ने बताया कि नगर पालिका और पशु चिकित्सा विभाग के सहयोग से इस वार्ड में सड़कों पर घूमने वाले बीमार पशुओं को भी इलाज मुहैया कराया जा रहा है। पशुओं को टीके लगाए जा रहे हैं और उनकी बेहतर देखभाल के लिए सभी प्रयास किए जा रहे हैं।
लंपी वायरस से लड़ने के प्रयास
पशु चिकित्सा विभाग नीमच और अन्य संबंधित विभाग निरंतर जिले में इस वायरस से बचाव के लिए प्रयासरत हैं। गौशालाओं, नगरीय निकायों और ग्राम पंचायतों के माध्यम से लंपी वायरस के प्रति जागरूकता फैलाई जा रही है और इसे फैलने से रोकने के लिए टीकाकरण अभियान तेज किया जा रहा है।
लंपी वायरस के खतरे को देखते हुए नीमच जिले में प्रशासन पूरी तरह से अलर्ट मोड पर है। आइसोलेशन वार्ड की स्थापना और टीकाकरण अभियान से उम्मीद है कि जिले में इस वायरस के फैलने से पहले ही रोकथाम की जा सकेगी। पशुपालकों को अपने पशुओं की देखभाल के लिए सतर्क रहने की आवश्यकता है ताकि इस संकट से सुरक्षित रहा जा सके।
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