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झाबुआ: माही नहर में दोबारा लीकेज, किसानों की उम्मीदों पर फिरा पानी

झाबुआ जिले के रायपुरिया के पास स्थित माही नहर कैनाल 2 एक बार फिर लीकेज के कारण विवादों में है। 25 नवंबर को मरम्मत के बाद पानी छोड़ा गया था, लेकिन 26 नवंबर को नहर में दरारें आने और लीकेज शुरू होने के कारण पानी की आपूर्ति रोकनी पड़ी। किसानों ने जल संसाधन विभाग पर…

झाबुआ माही नहर में दोबार लिकेज ।

झाबुआ जिले के रायपुरिया के पास स्थित माही नहर कैनाल 2 एक बार फिर लीकेज के कारण विवादों में है। 25 नवंबर को मरम्मत के बाद पानी छोड़ा गया था, लेकिन 26 नवंबर को नहर में दरारें आने और लीकेज शुरू होने के कारण पानी की आपूर्ति रोकनी पड़ी। किसानों ने जल संसाधन विभाग पर घटिया निर्माण का आरोप लगाया है और जांच व सख्त कार्रवाई की मांग की है।

माही नहर में लिकेज से किसानों में नाराजगी, किसान रबी की फसल की कर चुके बुवाई ।

रबी की फसल के लिए सिंचाई के पानी पर निर्भर किसानों की परेशानी बढ़ गई है। किसान सुनील मैड़ा का कहना है कि नहर की मरम्मत केवल लीपापोती है। दरारों को मिट्टी और सीमेंट से भरकर अस्थायी समाधान किया जा रहा है। नरेंद्र कुशवाहा ने चिंता जताई कि पहले सोयाबीन की फसल खराब हो चुकी है, अब गेहूं और चने की फसल पर भी संकट मंडरा रहा है।

विभाग की सफाई, किसी ने नहर को पहुंचाया नुकसान ।

जल संसाधन विभाग के ईई विपिन पाटीदार ने मरम्मत में घटिया निर्माण के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि नहर में जानबूझकर अज्ञात लोगों द्वारा छेद किया गया, जिससे पानी नदी में बहने लगा। उन्होंने आश्वासन दिया कि नहर की मरम्मत जल्द पूरी कर ली जाएगी और गुरुवार तक पानी की आपूर्ति फिर से शुरू हो जाएगी।

विभागीय कार्रवाई:

विभाग ने नहर को नुकसान पहुंचाने वाले तत्वों पर नजर रखने की बात कही है। हालांकि, किसानों का मानना है कि यह बयान केवल घटिया मरम्मत कार्य को छुपाने का प्रयास है।

किसानों की मांग:

  • नहर मरम्मत की निष्पक्ष जांच हो।
  • दोषी अधिकारियों और ठेकेदारों पर कार्रवाई हो।
  • सिंचाई के लिए जल्द पानी की आपूर्ति सुनिश्चित की जाए।

अगस्त माह में इसी तरह बारिश के पानी के चलते माही नहर फूट गई थी ।

झाबुआ-अगस्त माह में इसी तरह बारिश के पानी के चलते माही नहर फूट गई थी ।

माही नहर की खराब स्थिति और बार-बार होने वाले लीकेज ने किसानों की समस्याओं को बढ़ा दिया है। जहां एक तरफ विभाग दोषारोपण से बचने की कोशिश कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ किसानों की फसलें और उनकी उम्मीदें दांव पर लगी हैं। अगर समय पर समाधान नहीं हुआ, तो इस विवाद का असर आने वाले दिनों में और गहरा हो सकता है।

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संस्थापक और संपादक है, 15 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं । नेशनल,रीजनल चैनल में रिपोर्टिंग का अनुभव । डिजिटल पत्रकार के रूप मे भी सक्रिय हैं.

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