डीजे के शोर से बढ़ता ब्लड प्रेशर और हार्ट अटैक का खतरा: एमपी हाई कोर्ट में जनहित याचिका

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में डीजे के शोर से स्वास्थ्य को हो रहे गंभीर नुकसान पर एक जनहित याचिका दायर की गई है। यह याचिका..

डीजे का तेज शोर—स्वास्थ्य के लिए खतरा

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में डीजे के शोर से स्वास्थ्य को हो रहे गंभीर नुकसान पर एक जनहित याचिका दायर की गई है। यह याचिका जबलपुर के नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ. गोविंद प्रसाद मिश्रा, इंडियन एयर फोर्स के 100 वर्षीय रिटायर्ड अधिकारी आरपी श्रीवास्तव समेत चार वरिष्ठ नागरिकों ने दायर की है।

मुख्य दलील: डीजे का तेज शोर—स्वास्थ्य के लिए खतरा

याचिका में कहा गया है कि डीजे की तेज आवाज से लोगों में ब्लड प्रेशर (बीपी) की समस्या बढ़ रही है और हार्ट अटैक जैसी जानलेवा बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। याचिकाकर्ताओं ने इस मुद्दे पर कई विशेषज्ञों की रिपोर्ट भी अदालत में पेश की है, जो यह साबित करती हैं कि अत्यधिक ध्वनि प्रदूषण मानव स्वास्थ्य के लिए घातक हो सकता है।

याचिका में दावा किया गया है कि धार्मिक और सामाजिक आयोजनों के दौरान डीजे की ध्वनि तीव्रता 75 डेसीबल से अधिक हो जाती है, जो कि स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है। नियमानुसार, 75 डेसीबल तक की ध्वनि मानव शरीर सहन कर सकता है, इससे अधिक ध्वनि तीव्रता कई गंभीर बीमारियों का कारण बन सकती है।

डीजे का तेज शोर—स्वास्थ्य के लिए खतरा

नवरात्र पर्व में बच्चे की मौत का मामला उठाया

इस जनहित याचिका में भोपाल के नवरात्र पर्व के दौरान डीजे के तेज शोर से एक 13 वर्षीय बच्चे की मौत का जिक्र भी किया गया है। यह मामला इस बात को रेखांकित करता है कि ध्वनि प्रदूषण केवल स्वास्थ्य पर बुरा असर नहीं डालता, बल्कि जानलेवा भी हो सकता है।

अंतरराष्ट्रीय उदाहरण और ध्वनि प्रदूषण के खिलाफ कार्रवाई

याचिका में दुनिया के कई विकासशील और गरीब देशों के उदाहरण भी दिए गए हैं, जहां ध्वनि प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए ठोस कदम उठाए गए हैं। इन देशों में ध्वनि प्रदूषण से निपटने के लिए कठोर नियम बनाए गए हैं और उनकी सख्ती से पालना भी की जा रही है। याचिकाकर्ताओं ने भारतीय सरकार से भी इस दिशा में तत्काल कार्रवाई की मांग की है।

अदालत की प्रतिक्रिया

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की युगलपीठ, जिसमें चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जज विनय सराफ शामिल थे, ने इस मामले की सुनवाई के बाद केंद्र सरकार, राज्य सरकार, और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को नोटिस जारी कर दो सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है। अदालत ने अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद निर्धारित की है।

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